रामपुर:मंडल में बेसहारा और निराश्रित गोवंशों के संरक्षण की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। 12 मई को आयुक्त आंजनेय कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित गो आश्रय स्थलों की समीक्षा बैठक के आंकड़ों ने मंडल की एक बेहद सकारात्मक और मजबूत तस्वीर पेश की है।वर्तमान में मण्डल के 218 गो आश्रय स्थलों में कुल 65,113 गोवंशों को सुरक्षित आश्रय प्रदान किया जा चुका है।मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना के तहत मण्डल ने अभूतपूर्व सफलता दर्ज करते हुए निर्धारित लक्ष्य 4125 के मुकाबले 7703 गोवंशों को पशुपालकों की सुपुर्दगी में देकर 186.76 प्रतिशत का आंकड़ा छू लिया है।इसके साथ ही,गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने,हरे चारे की आपूर्ति सुनिश्चित करने और गर्मियों में गोवंशों के बचाव के लिए भी जमीनी स्तर पर व्यापक इंतजाम किए गए हैं।
सड़कों पर बचे चंद पशु
आंकड़ों के अनुसार,मंडल में संभल जिला गोवंश संरक्षण में सबसे आगे है,जहां सर्वाधिक 27,768 गोवंश संरक्षित किए गए हैं।इसके बाद बिजनौर में 14,658,मुरादाबाद में 10,781,अमरोहा में 8,647 और रामपुर में 3,259 गोवंशों को आश्रय मिला है।प्रशासन की मुस्तैदी का ही नतीजा है कि मण्डल के शहरी और ग्रामीण इलाकों को मिलाकर अब केवल 684 निराश्रित गोवंश ही ऐसे बचे हैं,जिन्हें आश्रय स्थलों तक पहुंचाना बाकी है।इनमें ग्रामीण क्षेत्रों के 471 और शहरी क्षेत्रों के 213 गोवंश शामिल हैं,जिन्हें जल्द ही संरक्षित करने की योजना है।
चारे का पुख्ता इंतजाम,नेपियर घास से हरियाली
गोवंशों के भरण-पोषण के लिए भूसा संग्रहण और हरा चारा उगाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।मंडल में कुल 5,36,396.2 कुंतल भूसा संग्रहण के लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 4,24,478 कुंतल (79.14 प्रतिशत) भूसे की व्यवस्था की जा चुकी है।इसमें अमरोहा जनपद ने अपने लक्ष्य का 100.31 प्रतिशत और मुरादाबाद ने 94.64 प्रतिशत हासिल कर लिया है।हरे चारे की निर्बाध आपूर्ति के लिए 372.62 हेक्टेयर गोचर भूमि पर चारा उत्पादन किया जा रहा है।इसके अलावा विशेष अभियान चलाकर बाबूगढ़ प्रक्षेत्र,हापुड़ से नेपियर रूट और स्लिप मंगाकर लाभार्थियों को बांटी गई हैं।इसके तहत कुल 6,10,000 रूट का वितरण कर 16 हेक्टेयर क्षेत्रफल को आच्छादित किया गया है।
गोशालाएं बन रहीं आत्मनिर्भर,गोबर से हो रही बंपर कमाई
गो आश्रय स्थलों को केवल सरकारी अनुदान पर निर्भर रखने के बजाय उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं।मुरादाबाद,अमरोहा और रामपुर के कान्हा और वृहद गो संरक्षण केंद्रों में सीबीजी (गोबर गैस प्लांट) सफलतापूर्वक काम कर रहे हैं।रामपुर के गो आश्रय स्थल किरा में तो गोबर गैस प्लांट से 15 केवी का जनरेटर भी चलाया जा रहा है।गो उत्पाद और गोबर की बिक्री से मंडल में अच्छी आय हो रही है।रामपुर ने गोबर प्रबंधन से सर्वाधिक 6,17,636 रुपये,अमरोहा ने 5,40,600 रुपये और मुरादाबाद ने 82,829 रुपये की आय प्राप्त की है
इसके अलावा मुरादाबाद,बिजनौर और सम्भल में गोबर से लकड़ी (गोकास्ट),मूर्तियां,दीये और धूपबत्ती तैयार की जा रही है।
गर्मी से बचाव और सुरक्षा पर खास जोर
आगामी हीट स्ट्रोक और भीषण गर्मी को देखते हुए गोशालाओं में पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।सभी जनपदों के गो आश्रय स्थलों में दरवाजे और खिड़कियों को टाट व बोरों से ढक दिया गया है,जिन पर नियमित रूप से पानी का छिड़काव किया जा रहा है ताकि तापमान नियंत्रित रहे।संरक्षित गोवंशों के लिए छाया और ताजे पानी की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।सुरक्षा और निगरानी के लिहाज से भी मण्डल काफी सतर्क है।कुल 216 गो आश्रय स्थलों में से 210 को सीसीटीवी कैमरों से लैस कर दिया गया है,ताकि गोवंशों की हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके।












