HomeHealth & Fitnessचीन ने बिजली के तारों में लपेट दिए ‘रोबोटिक सांप’ जाने क्यों

चीन ने बिजली के तारों में लपेट दिए ‘रोबोटिक सांप’ जाने क्यों

नई दिल्ली। तकनीक का उपयोग करने में चीन बाकी देशों से हमेशा आगे नजर आता है। वहां दक्षिण-पश्चिम प्रांत युन्नान की राजधानी कुनमिंग में बीते दिनों बिजली फॉल्ट से बचने के लिए रोबोटिक सांपों (Robotic Snakes) का यूज किया गया। एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन की सबसे बड़ी और फेमस कॉलेज एडमिशन परीक्षा ‘गाओकाओ’ (Gaokao) को सही ढंग से कराना एक चुनौती थी। परीक्षा के दौरान सेंटरों पर बिजली गुल न हो, इसलिए चीन की बिजली कंपनियों ने रोबोटिक सांपों और रोबोटिक डॉग्स को काम में लगाया। इस परीक्षा में लगभग 1.29 करोड़ स्टूडेंट्स शामिल हुए।

रोबोटिक सांप क्या काम करते हैं?
जानकारी के अनुसार, चीन में रोबोट सांप, बिजली फॉल्ट का पता लगाने के लिए पावर लाइनों में लिपटकर जांच करते हैं। इस गजब की तकनीक में रोबोटिक सांप, बिजली के तारों से लिपट जाते हैं और उस पर रेंगते हुए आगे बढ़ते हैं। वह पावर लाइनों में कमियों को तुरंत पकड़ लेते हैं। रोबोट सांप में खास कैमरे और सेंसर लगे हैं जो बिजली के तारों की गड़बड़ी, पुराने हो चुके तार और ओवरहीटिंग का पता लगा लेते हैं।

इंसानों से 3 गुना फास्ट
रोबोटिक सांप ने इंसानों से 3 गुना फास्ट काम किया है। इससे बिजली कर्मचारियों को तारों की जांच नहीं करनी पड़ती और उन्हें जान का खतरा कम हो जाता है। रोबोट की खूबी है कि वह खुद को बिजली के तारों से ही चार्ज कर लेता है।

रोबोट में लगा वायरलेस सिस्टम ‘रोबोट सांप’ को तारों मे रेंगते हुए चार्जिंग में मदद करता है।
इसका फायदा यह होता है कि ग्राउंड टीम को बार-बार रोबोटिक स्नेक को नीचे नहीं उतारना पड़ता।

सांप जैसा फ्लेक्सिबल शरीर
रोबोटिक सांप, कई जोड़ों यानी जॉइंट्स से मिलकर बना है। यह इतना अधिक लचीला है कि तारों में लगे इंसुलेटर को भी पार कर जाता है। चीन में बिजली की लाइनों की जांच के लिए ड्रोन का उपयोग किया जाता है, लेकिन नो फ्लाइंग जोन जैसे- एयरपोर्ट के आसपास वह नहीं उड़ सकता। रोबोटिक सांप इस कमी को पूरा करता है।

चीन की रोबोटिक सांप की मदद से एयरपोर्ट के पास लगभग 130 किलोमीटर लंबी लाइनों की जांच की गई है।
ड्रोन को खराब मौसम या बैटरी की दिक्कत के कारण हमेशा उपयोग नहीं किया जा सकता है।
रोबोटिक स्नेक हर मौसम में बिजली के तारों की जांच के लिए रेडी रहते हैं। यह तारों से ही बिजली लेते हैं, इसलिए इन्हें चार्ज करने की जरूरत नहीं होती।

चीन में बिजली फॉल्ट का पता लगाने के लिए इस्तेमाल की गई तकनीक अपने आप में अनोखी है। भारत के पड़ोसी ने अपने यहां कॉलेज एडमिशन परीक्षा को सही से पूरा कराने के लिए इसका भरपूर उपयोग किया। सबसे खास बात कि इसने इंसानों से बेहतर काम किया और बिजली कर्मचारियों की जान को जोखिम भी नहीं रहा।

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