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बस्ती के हर्रैया में मनोरमा-रामरेखा नदी की सफाई केवल कागजों में पूरी दर्शाई जा रही है। जमीनी स्तर पर युवा 50 दिनों से अधिक समय से श्रमदान कर रहे हैं। प्रशासन पत्राचार में व्यस्त है, लेकिन वास्तविक सफाई या अतिक्रमण पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। वरिष्ठ भाजपा नेता और समाजसेवी चंद्रमणि पांडेय सुदामा ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन गंभीर होता, तो केवल पत्र जारी करने के बजाय जमीनी निरीक्षण करता, प्रगति रिपोर्ट का मूल्यांकन करता और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करता। सुदामा ने जानकारी दी कि उनके साथ सैकड़ों युवाओं ने मखौड़ा धाम, पंडूलघाट और झुंगीनाथ शिव मंदिर के पास नदी व घाट की सफाई की है। इसी अभियान से प्रेरित होकर हर्रैया के लजघटा गांव के युवा आकाश गुप्ता अपने साथियों के साथ 50 दिनों से अधिक समय से मनोरमा नदी की सफाई में लगातार जुटे हुए हैं। क्षेत्रीय लोगों में विपिन कुमार, प्रेम कुमार, वंश बहादुर, नरेंद्र, छोटे, शिव मंगल और राम जनम सहित कई अन्य ने बताया कि उन्हें अपने जानवरों को पानी पिलाने व स्नान कराने में कठिनाई होती है। इस संबंध में उन्होंने अपने ग्राम प्रधान व क्षेत्रीय विधायक से कई बार शिकायत की है। इस संबंध में खण्ड विकास अधिकारी विक्रमजोत अवध प्रताप सिंह ने कहा कि जिस गांव से होकर मनोरमा निकल रही है, उन गांवों के प्रधानों द्वारा मनरेगा के लेबरों को लगाकर सफाई कराई गई है। उन्होंने यह भी बताया कि मनोरमा की सफाई एक बहुत बड़ा कार्य है और इसमें शासन की मदद से ही पूरी सफाई संभव है।
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बस्ती में मनोरमा नदी की सफाई कागजों में:युवा 50 दिन से कर रहे श्रमदान, प्रशासन पत्राचार में व्यस्त
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