राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के मुताबिक देशभर में अपराध के मामले कम तो हुए लेकिन बच्चों के खिलाफ अपराध के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। हैरानी की बात है कि 10 में से 9 यानी 90 प्रतिशत साइबर क्राइम के मामलों में चाइल्ड पोर्न भेजना भी शामिल था। डेटा के मुताबिक, साल 2024 में बच्चों के खिलाफ कुल जितने मामले दर्ज हुए उसमें बच्चों से जुड़े साइबर क्राइम के मामले सिर्फ 0.7 प्रतिशत थे। इसमें से 90 प्रतिशत मामलों में चाइल्ड पोर्न के मामले थे। यानी बच्चों से जुड़े साइबर अपराध के मामलों में चाइल्ड पोर्न भेजने के मामले सामने आए।
साल 2024 में पूरे भारत में बच्चों के खिलाफ अपराध के कुल 1,87,702 मामले दर्ज किए गए थे, जो 2023 के 1,77,335 मामलों से 5.8 प्रतिशत ज्यादा थे। इसके उलट, पिछले चार साल में भारत में कुल अपराध में लगभग 10.8 प्रतिशत की कमी आई है। 2020 में कुल मामले 66.01 लाख थे जो 2024 में घटकर 58.86 लाख हो गए। इसी दौरान, बच्चों के खिलाफ अपराध 2020 में 1,28,531 मामलों से बढ़कर 2024 में 1,87,702 हो गए जो 46 प्रतिशत से ज्यादा की चिंताजनक बढ़ोतरी का दर्शाता है।
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छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा केस
‘चाइल्ड राइट्स एंड यू’ (क्राई) संस्था के मुताबिक, एनसीआरबी के ताजा आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि 2024 में बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध के संबंध में सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत 1,238 मामले दर्ज किए गए, जो बच्चों के खिलाफ सभी अपराध का लगभग 0.7 प्रतिशत हैं। इनमें से 1,099 मामलों में बच्चों का अश्लील तरीके से चित्रण करने वाली सामग्री प्रकाशित या प्रसारित की गई जबकि बाकी सभी श्रेणियों के कुल मामले सिर्फ 139 थे। क्राई के राज्य-वार एनसीआरबी डेटा के विश्लेषण के अनुसार, छत्तीसगढ़ में बच्चों के खिलाफ सबसे ज़्यादा 268 साइबर अपराध के मामले दर्ज किए गए।
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इसके बाद राजस्थान (174), दिल्ली (151), उत्तर प्रदेश (137) और केरल (92) का स्थान रहा। इन पांच राज्यों में कुल मिलाकर देश में दर्ज ऐसे सभी मामलों का 66.4 प्रतिशत हिस्सा था। क्राई में कार्यक्रम निदेशक सोहा मोइत्रा ने कहा, ‘एनसीआरबी की ओर से जारीहालिया साइबर अपराध प्रवृत्तियां एक बार फिर इस बात को रेखांकित करती हैं कि ऑनलाइन स्पेस में बच्चों की सुरक्षा एक राष्ट्रीय प्राथमिकता क्यों बनी रहनी चाहिए।’












