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बस्ती में विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर शनिवार को बहादुपुर विकास खंड स्थित महुआ डाबर संग्रहालय में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने संग्रहालय में संरक्षित ऐतिहासिक धरोहरों का अवलोकन कर अपने गौरवशाली इतिहास को जाना। महुआ डाबर संग्रहालय के महानिदेशक डॉ. शाह आलम राणा ने आगंतुकों को विभिन्न ऐतिहासिक-सांस्कृतिक दस्तावेजों, पुराने औजारों, दुर्लभ सिक्कों और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी वस्तुओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह संग्रहालय वर्ष 1999 से आजादी की लड़ाई से संबंधित विरासत के संरक्षण और जन-जागरूकता के लिए सक्रिय रूप से कार्यरत है। डॉ. राणा ने इस अवसर पर कहा, “विश्व धरोहर दिवस हमें अपनी साझा सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और उसे अगली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने की सामूहिक जिम्मेदारी की याद दिलाता है।” कार्यक्रम के दौरान 1857 के महुआ डाबर एक्शन से जुड़े ऐतिहासिक और प्रामाणिक दस्तावेज प्रदर्शित किए गए। खंडहर हो चुके अवशेषों के महत्व को भी समझाया गया। इसके अतिरिक्त, स्थानीय बुजुर्गों ने आजादी के आंदोलन से संबंधित अपने संस्मरण साझा किए। उल्लेखनीय है कि 10 जून 1857 को महुआ डाबर में महानायक जफर अली ने अपने साथियों के साथ मिलकर छह ब्रिटिश अधिकारियों को मार गिराया था। इस घटना के बाद अंग्रेजों ने लगभग पांच हजार की आबादी वाले महुआ डाबर को ‘गैरचिरागी’ (निर्जन) घोषित कर दिया था।
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महुआ डाबर संग्रहालय में विश्व धरोहर दिवस पर उमड़ी भीड़:लोगों ने जाना क्षेत्र का गौरवशाली इतिहास, स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी वस्तुओं की विस्तृत जानकारी मिली
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