किंशासा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा है कि डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में इबोला का प्रकोप अभी भी अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (पीएचईआईसी) बना हुआ है, क्योंकि इस महामारी पीड़ितों की संख्या 5,000 से ज्यादा हो गई है, नए इलाकों में पैर पसार रहा है और अधिकारियों को प्रायोगिक वैक्सीन और इलाज अपनाने के लिए मजबूर कर रही है।
डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने एक आपातकालीन समिति की बैठक में कहा कि यह प्रकोप अब तक का दूसरा सबसे बड़ा इबोला प्रकोप है और यह पहले के सभी प्रकोपों की तुलना में तेजी से फैल रहा है।
डब्ल्यूएचओ के ताजा आंकड़ों के अनुसार, रविवार तक छह प्रांतों के 55 हेल्थ जोन में 5,021 लोगों के इबोला होने की पुष्टि हुई और 2,378 की मौत हो गई। यहां मृत्यु दर 47.4 प्रतिशत रहा।
बंडिबुग्यो इबोला वायरस के कारण फैली यह महामारी पूर्वी डीआरसी में 2018-2020 के इबोला प्रकोप से भी आगे निकल गई है, जो पहले देश का सबसे घातक प्रकोप था। अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (अफ्रीका सीडीसी) ने सोमवार को कहा कि मौजूदा प्रकोप में हर 30 मिनट में लगभग एक व्यक्ति की मौत हो रही है और अगर इसके फैलने की रफ्तार को तुरंत नहीं रोका गया, तो इसके दुनिया भर में अब तक का सबसे घातक इबोला प्रकोप बनने का खतरा है।
टेड्रोस ने कहा, “हमें साफ तौर पर कहना होगा: महामारी हमारे नियंत्रण से अभी बहुत दूर है। इसे बहुत बढ़त मिल गई थी, और हम अभी भी इसके पीछे भाग रहे हैं।” सिंहुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, डब्ल्यूएचओ की एक स्टेट्स रिपोर्ट में बताया गया है कि रिपोर्टिंग के पहले 95 दिनों के दौरान, सात-दिन का मूविंग एवरेज बढ़कर प्रति दिन 90 से ज्यादा हो गया है, जो 2014-2016 की पश्चिम अफ्रीका महामारी और DRC के 2018-2020 के प्रकोप के इसी चरण की तुलना में काफी ज्यादा है।












