लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने कहा है कि लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर अग्निकांड की निष्पक्ष जांच कराने के बजाय विद्युत सुरक्षा निदेशालय लगातार अपने अधिकारियों की गंभीर लापरवाहियों पर पर्दा डालने का प्रयास कर रहा है।बिना किसी ठोस आधार के कभी यह कहा जा रहा है कि संबंधित परिसर की एनओसी का कोई अभिलेख उपलब्ध नहीं है और कभी उसी एनओसी को फर्जी बताया जा रहा है। इस प्रकार के परस्पर विरोधी बयान स्वयं विद्युत सुरक्षा निदेशालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करते हैं।संघर्ष समिति ने बताया कि उप्राविप अभियंता संघ के महासचिव जितेन्द्र सिंह गुर्जर द्वारा जारी किये गए दस्तावेज से स्पष्ट हो जाता है कि संबंधित उपभोक्ता द्वारा 23 जून 2016 को 20 किलोवाट के कमर्शियल विद्युत संयोजन के लिए विद्युत सुरक्षा निरीक्षण शुल्क रु 1150 भारतीय स्टेट बैंक के चालान के माध्यम से ट्रेजरी में जमा कराया गया था। संघर्ष समिति ने कहा कि शासन के नियमों के अनुसार यदि निरीक्षण शुल्क जमा होने के सात दिनों के भीतर विद्युत सुरक्षा निदेशालय द्वारा एनओसी जारी नहीं की जाती है, तो पॉवर कारपोरेशन के अभियंता विद्युत संयोजन को ऊर्जीकृत करने के लिए सक्षम होते हैं। इसलिए विद्युत सुरक्षा निदेशालय अपनी वैधानिक जिम्मेदारियों से बच नहीं सकता।
लापरवाह अधिकारियों को बचाने में जुटा विद्युत सुरक्षा निदेशालय
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