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बिजली संकट पर कर्मचारियों का हल्ला बोल, निजीकरण के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी

  • उत्पीड़न के दम पर पटरी से उतरी बिजली व्यवस्था नहीं चलाई जा सकती

लखनऊ। प्रदेश की चरमराती बिजली व्यवस्था को लेकर आज कानपुर में केस्को मुख्यालय पर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के बैनर तले बिजली कर्मियों की एक विशाल और जोरदार सभा आयोजित की गई। सभा में केस्को डिस्कॉम से आए कर्मचारियों और अभियंताओं ने पावर कॉरपोरेशन के शीर्ष प्रबंधन के खिलाफ तीखा आक्रोश व्यक्त करते हुए साफ कहा कि यदि प्रबंधन बिजली व्यवस्था संभालने में अक्षम है, तो नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल पद छोड़ दे।

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संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने एलान किया कि  यदि पनकी और जवाहरपुर ताप बिजली घरों के परिचालन और अनुरक्षण कार्य को आउटसोर्स करने का  एकतरफा टेंडर किया गया तो उसी समय बिना और कोई नोटिस दिए प्रदेश के सभी ऊर्जा निगमों के  तमाम बिजली कर्मी प्रांत व्यापी आंदोलन शुरू कर देंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।

संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि बिजली व्यवस्था सुधारने में पूरी तरह विफल प्रबंधन अब अपनी नाकामी छिपाने के लिए बिजली कर्मियों का उत्पीड़न कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह दमनकारी नीति न केवल कर्मचारियों का मनोबल तोड़ रही है, बल्कि प्रदेश की बिजली व्यवस्था को भी पूरी तरह पटरी से उतारने की साजिश है, जिसे किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने दिया जाएगा।

सभा को संबोधित करते हुए संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि पावर कॉरपोरेशन में वर्टिकल व्यवस्था लागू करना, संविदा कर्मियों को बाहर करना, नियमित पदों में कटौती करना और अव्यवहारिक प्रयोग करना-ये सब प्रबंधन की गलत नीतियों के उदाहरण हैं, जिनके कारण आज राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश के अधिकांश जनपदों में बिजली व्यवस्था चरमरा गई है और जनता त्राहि-त्राहि कर रही है।

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि “बिजली व्यवस्था सुधारने का एकमात्र रास्ता है कि अनुभवी और योग्य अभियंताओं को पावर कॉरपोरेशन व ऊर्जा निगमों का नेतृत्व सौंपा जाए, जो कर्मचारियों को विश्वास में लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित कर सकें।”

संघर्ष समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन के बावजूद बिजली कर्मी उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसे सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहे हैं। हर शिकायत का त्वरित समाधान किया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद प्रबंधन द्वारा कर्मचारियों का मनमाने तरीके से उत्पीड़न किया जा रहा है, जो पूरी तरह अस्वीकार्य है।

शैलेन्द्र दुबे ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि “यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक निजीकरण का फैसला पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता और बिजली कर्मियों पर की गई हर उत्पीड़नात्मक कार्रवाई को निरस्त नहीं किया जाता।” केस्को मुख्यालय पर आयोजित इस सभा को शैलेन्द्र दुबे,जितेन्द्र सिंह गुर्जर, महेन्द्र राय, पी.एस. बाजपेई, विजय त्रिपाठी, गौरव दीक्षित, रफीक अहमद, आर.एस. मिश्रा सहित कई प्रमुख पदाधिकारियों ने संबोधित किया। इसके साथ ही आज कानपुर क्षेत्र के गोविंद नगर मुख्यालय और पनकी ताप विद्युत गृह में भी विरोध सभाएं आयोजित कर प्रबंधन के खिलाफ जोरदार आवाज बुलंद की गई।

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