लखनऊ। आउटसोर्स कर्मचारियों की दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने में पावर कारपोरेशन प्रबंधन अब पूरी तरह विफल हो चुका है। ये बातें देवेन्द्र कुमार पाण्डेय,प्रदेश महामंत्री ने कही। रविवार को उन्होंने पत्र के माध्यम से बताया संगठन द्वारा अपने पत्र 29 मई के माध्यम से प्रबन्ध निदेशक पावर कारपोरेशन लिमिटेड शक्ति भवन को अवगत कराया गया था,कि पावर कारपोरेशन प्रबन्धन द्वारा अनुभव आउटसोर्स कर्मचारियों की नियम विरुद्ध छटनी करने के कारण कर्मचारियों के भारी कमी है। जिसके कारण आउटसोर्स कर्मचारियों पर कार्य का अधिक भार पड़ने,अकुशल कर्मचारियों से लाइन का कार्य कराने तथा एक गैंग ( 01 लाइनमैन + 01 पेट्रोल मैन / कुशल श्रमिक +2 अकुशल श्रमिक ) के स्थान पर एक कर्मचारी को तैनात करने के कारण पिछले जहां उपभोक्ताओं को बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं पिछले 37 दिनों में 36 आउटसोर्स कर्मचारियों की दुर्घटनाएं हुई जिसमें 22 की मृत्यु हो गई तथा 14 गंभीर रूप से घायल हो गए।संगठन द्वारा निवेदन किया गया था कि उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति करने एवं दुर्घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए हटाए गए अनुभव आउटसोर्स कर्मचारियों को कार्य पर वापस लिया जाए। संगठन द्वारा मांग की गई थी,पावर कारपोरेशन के आदेश 15 मई 2017 एवं उपभोक्ताओं के दिन प्रतिदिन बढ़ती संख्या को ध्यान में रखकर कर्मचारियों की तैनाती किया जाए तथा दुर्घटनाओं की जांच कराकर दोषी के खिलाफ उचित कार्रवाई किया जाए,लेकिन पावर कारपोरेशन प्रबंधन द्वारा संगठन के बातों पर ध्यान नहीं दिया गया। जिसके कारण पिछले 49 दिनों में 56 आउटसोर्स कर्मचारियों कि दुर्घटनाएं हो गई जिसमें से 30 कर्मचारियों की मृत्यु हो गई तथा 26 गंभीर रूप से घायल हो गए। जिसका उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन निविदा /संविदा कर्मचारी संघ लखनऊ घोर निंदा करता है।
नियम विरुद्ध छटनी करने के कारण कर्मचारियों के भारी कमी
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