HomeHealth & Fitnessअवकाश पर ड्यूटी कराना अनुचित, उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियाँ वापस ली जाएँ: संघर्ष समिति

अवकाश पर ड्यूटी कराना अनुचित, उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियाँ वापस ली जाएँ: संघर्ष समिति

लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन द्वारा अवकाश, साप्ताहिक अवकाश तथा त्योहारों के दिनों में भी बिजली कर्मचारियों एवं इंजीनियरों को नियमित रूप से ड्यूटी पर बुलाए जाने की व्यवस्था पर कड़ी आपत्ति व्यक्त की है। संघर्ष समिति ने कहा है कि यह व्यवस्था कर्मचारियों पर अनावश्यक मानसिक एवं शारीरिक दबाव डालने वाली है तथा इसे तत्काल समाप्त किया जाना चाहिए।

संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि विद्युत व्यवस्था को सामान्य बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर हटाए गए संविदा कर्मियों को तत्काल कार्य पर वापस लिया जाए। साथ ही मार्च 2023 के आंदोलन के फलस्वरूप नियमित कर्मचारियों एवं इंजीनियरों पर की गई सभी उत्पीड़नात्मक एवं दंडात्मक कार्यवाहियाँ वापस ली जाएँ, जिससे ऊर्जा निगमों में स्वस्थ एवं सकारात्मक कार्य वातावरण स्थापित हो सके।

संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि आपातकालीन परिस्थितियों में विद्युत व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए कर्मचारियों को बुलाया जाना स्वाभाविक एवं आवश्यक हो सकता है, किंतु इसे नियमित परंपरा का रूप देना पूरी तरह अनुचित है। वर्तमान में अक्सर यह देखा जा रहा है कि जिस दिन सार्वजनिक अवकाश या त्योहार घोषित किया जाता है, उसी दिन कार्यालय खुले रखने तथा कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के आदेश जारी कर दिए जाते हैं।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2000 में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद के विघटन के समय प्रदेश में लगभग 60 लाख उपभोक्ता थे तथा लगभग 1 लाख 20 हजार नियमित कर्मचारी कार्यरत थे। इसके विपरीत वर्तमान में उपभोक्ताओं की संख्या बढ़कर लगभग 3 करोड़ 73 लाख हो गई है, जबकि नियमित कर्मचारियों की संख्या घटकर मात्र लगभग 30 हजार रह गई है। उपभोक्ताओं में कई गुना वृद्धि तथा कर्मचारियों की संख्या में भारी कमी के बावजूद विद्युत व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने का दायित्व कर्मचारियों और इंजीनियरों पर ही है, जिससे उन पर अत्यधिक कार्यभार बढ़ गया है।

संघर्ष समिति ने कहा कि ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस, उपभोक्ता सेवा, राजस्व वसूली, मीटरिंग तथा कमर्शियल गतिविधियों के बढ़ते दायित्वों के कारण अवकाश के दिनों में कर्मचारियों को बुलाना एक प्रकार की “फायर-फाइटिंग व्यवस्था” बन गई है। यह किसी भी दृष्टि से स्थायी समाधान नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि सभी स्तरों पर रिक्त पदों को तत्काल भरा जाए तथा बढ़ती उपभोक्ता संख्या के अनुरूप नए पदों का सृजन किया जाए।

संघर्ष समिति ने कहा कि प्रबंधन की वर्तमान नीति से बिजली कर्मियों में व्यापक असंतोष व्याप्त है। बिजली कर्मचारियों के भी परिवार हैं और अवकाश एवं साप्ताहिक छुट्टियाँ ही उनके लिए पारिवारिक एवं सामाजिक दायित्वों के निर्वहन का अवसर होती हैं। त्योहारों पर अन्य नागरिकों की तरह बिजली कर्मियों की भी यह स्वाभाविक अपेक्षा होती है कि वे अपने परिवारजनों के साथ समय व्यतीत कर सकें।

संघर्ष समिति ने मांग की है कि यदि किसी अपरिहार्य परिस्थिति में कर्मचारियों को साप्ताहिक अवकाश, सार्वजनिक अवकाश अथवा त्योहार के दिन ड्यूटी पर बुलाया जाता है, तो उन्हें नियमानुसार प्रतिकर अवकाश (Compensatory Off) अथवा दुगना वेतन प्रदान किया जाए।

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