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बस्ती जिले के कप्तानगंज ब्लॉक की ग्राम पंचायत पोखरा में स्थित एक प्राचीन कुएं को स्थानीय ग्रामीणों ने जनसहयोग से साफ किया है। भगवान भोलेनाथ मंदिर और द्योहारे बाबा के बीच स्थित इस कुएं को वर्षों की उपेक्षा के बाद पुनः अविरल बनाया गया। हालांकि, इस सफाई अभियान में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई, जिससे जान का जोखिम बना रहा। कुएं की पूरी सफाई महज एक रस्सी और सब्जी रखने वाले साधारण कैरेट के सहारे की गई। ग्रामीणों ने बिना किसी सुरक्षा उपकरण, हार्नेस, ऑक्सीजन मास्क या प्रशिक्षित टीम के सीधे गहरे कुएं में उतरकर गंदगी साफ की। यह नजारा देखने वालों के लिए बेहद जोखिम भरा और चिंताजनक था। विशेषज्ञों के अनुसार, वर्षों से बंद पड़े पुराने कुओं में कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य जहरीली गैसें जमा हो जाती हैं। ऐसे में बिना सुरक्षा उपकरण के कुएं में उतरने से व्यक्ति कुछ ही पलों में बेहोश होकर गिर सकता है। इसके अतिरिक्त, कुएं की नम और काई भरी दीवारों से फिसलने का खतरा भी हमेशा बना रहता है, जिससे गंभीर दुर्घटना हो सकती है। सौभाग्य से, इस पूरे अभियान के दौरान कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ और कुआं सफलतापूर्वक साफ हो गया। यह कुआं धार्मिक और ऐतिहासिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पवित्र स्थलों के बीच स्थित है। ग्रामीणों का यह सामूहिक प्रयास और हौसला निश्चित रूप से सराहनीय है। हालांकि, यह घटना भविष्य के लिए एक बड़ी चेतावनी भी है कि ऐसे कार्यों में उचित सुरक्षा इंतजामों को प्राथमिकता दी जाए, ताकि जनसहयोग की यह भावना किसी अप्रिय घटना का कारण न बने।
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कप्तानगंज में ग्रामीणों ने रस्सी-कैरेट से साफ किया प्राचीन कुआं:बिना सुरक्षा उपकरण जान जोखिम में डालकर हुई सफाई
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