श्रावस्ती जनपद के नासिरगंज कस्बे में चौथी मोहर्रम के अवसर पर शिया समुदाय द्वारा घरों और अज़ाखानों में मजलिसों का आयोजन किया जा रहा है। इन मजलिसों में अज़ादार हज़रत इमाम हुसैन और शोहदाए-कर्बला की याद में शामिल हो रहे हैं। एक मजलिस में मौलाना शेख रईस आबाद साहब ने हज़रत हबीब इब्ने मज़ाहिर के मसाएब (कष्टों और बलिदानों) का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि हज़रत हबीब इब्ने मज़ाहिर इमाम हुसैन के बचपन के वफ़ादार साथी थे। मौलाना ने आगे कहा कि कर्बला की खबर मिलने पर वे सभी बाधाओं को पार कर इमाम हुसैन के पास पहुँचे और अंतिम साँस तक उनका साथ दिया। कर्बला के मैदान में उन्होंने बहादुरी से लड़ते हुए शहादत प्राप्त की और वफ़ादारी की एक मिसाल पेश की। मजलिस के समापन के बाद नौहाख्वानी (शोकगीत) और मातम किया गया। अज़ादारों ने हज़रत हबीब इब्ने मज़ाहिर और शोहदाए-कर्बला के बलिदानों को याद किया। नासिरगंज में चौथी मोहर्रम के अवसर पर देर रात तक घरों में मजलिसों का आयोजन जारी है, जिसमें इमाम हुसैन के प्रति शोक व्यक्त किया जा रहा है।
श्रावस्ती में चौथी मोहर्रम पर घरों में मजलिसें जारी:शिया समुदाय ने हज़रत हबीब इब्ने मज़ाहिर के मसाएब बयान किए
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