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रूस और ईरान से तेल नहीं खरीद पाएगा भारत, ट्रंप ने दिया बड़ा झटका

अमेरिका ने भारत को 30 दिनों तक रूसी तेल खरीदने की छूट दी थी। मगर बुधवार को अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ऐलान किया है कि भारत को मिलने वाली छूट की समय सीमा नहीं बढ़ाई जाएगी। अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील के बाद भारत न केवल रूस बल्कि ईरान से भी तेल खरीदने लगा था। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा, ‘हम रूसी तेल और ईरानी तेल के लिए सामान्य लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं करेंगे। यह वह तेल था जो 11 मार्च से पहले जहाजों पर लोड था। इसलिए इसका पूरा उपयोग हो चुका है।’

युद्ध शुरू होने के 14 दिनों बाद 12 मार्च को अमेरिकी वित्त विभाग ने भारत को 30 दिनों की अस्थायी छूट दी थी। इसके तहत भारतीय रिफाइनर पहले से ही जहाजों पर लोड प्रतिबंधित रूसी और ईरानी तेल खरीद सकते थे। हालांकि 11 अप्रैल को रूसी तेल पर मिली छूट खत्म हो गई। वहीं 19 अप्रैल को ईरानी तेल पर मिली छूट खत्म होगी। इस बीच अमेरिकी वित्त मंत्री ने साफ कर दिया है कि छूट की समय सीमा को और नहीं बढ़ाया जाएगा।

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अमेरिका ने क्यों दी थी छूट?

अमेरिका ने भारत को यह छूट इसलिए दी थी, ताकि वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों को नियंत्रित किया जा सके। दरअसल, 28 फरवरी को ईरान पहले के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद हो गया। इसका सीधा असर तेल आपूर्ति पड़ा। नतीजा यह हुआ कि कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के अधिक हो गई। रूसी और ईरानी तेल खरीदने पर मिली छूट की अमेरिका में जमकर आलोचना हुई। इसमें कहा गया कि छूट के कारण रूस और ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंध ढीले साबित होंगे। विपक्षी दबाव के बाद ट्रंप प्रशासन ने छूट की अवधि को आगे न बढ़ाने का फैसला किया है।

क्या बढ़ जाएंगी तेल की कीमतें?

ईरान युद्ध के कारण भारत ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान का सामना कर रहा है। ऐसे में अमेरिका का यह फैसला मुश्किलें बढ़ा सकता है। भारत ने 2022 में यूक्रेन युद्ध के बाद रूस से अधिक तेल खरीदना शुरू किया। हालांकि जनवरी 2025 में अमेरिकी सत्ता में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी ने भारत की परेशानी बढ़ा दी। ट्रंप प्रशासन ने रूस से तेल खरीदने पर भारत पर 25 फीसद टैरिफ का ऐलान किया। वहीं दो रूसी कंपनियों को प्रतिबंधित भी कर दिया।

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रिपोर्ट के मुताबिक छूट के बाद भारत ने लगभग 60 मिलियन बैरल तेल खरीदा। वहीं 2019 के बाद पहली बार ईरान से करीब 40 लाख बैरल तेल भारत पहुंचा। भारत सरकार अलग-अलग देशों से तेल खरीदने में जुटी है, ताकि ईंधन की आपूर्ति को सुनिश्चित किया जा सके। इसी बीच अमेरिका यह कदम मुश्किलें बढ़ा सकता है। तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं।

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