Homeजिला / लोकल (Local News)अमेरिकी टैरिफ प्रस्ताव पर भारत करेगा कड़ा विरोध, यूएसटीआर में रखेगा अपना...

अमेरिकी टैरिफ प्रस्ताव पर भारत करेगा कड़ा विरोध, यूएसटीआर में रखेगा अपना पक्ष


वाशिंगटन/नई दिल्ली। भारत अगले सप्ताह अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) की सेक्शन-301 समिति के समक्ष प्रस्तावित 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ के खिलाफ मजबूत पक्ष रखेगा। भारत का कहना है कि जबरन श्रम (फोर्स्ड लेबर) से जुड़े अमेरिकी निष्कर्ष पर्याप्त साक्ष्यों पर आधारित नहीं हैं और इनका कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है। 8 जुलाई को होने वाली सुनवाई में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधिकारियों के साथ उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि भी भारत का पक्ष रखेंगे। सरकार का तर्क है कि देश में जबरन श्रम रोकने के लिए संविधान, श्रम कानूनों और नियामकीय ढांचे के तहत प्रभावी व्यवस्था पहले से लागू है। ऐसे में अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव अनुचित और व्यापारिक संबंधों के प्रतिकूल है।
कन्फेडरेशन आॅफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) ने कहा कि भारत का श्रम कानून ढांचा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है। संगठन ने संविधान के अनुच्छेद-23, बंधुआ मजदूरी उन्मूलन कानून, बाल श्रम निषेध कानून तथा नए श्रम संहिताओं का हवाला देते हुए दावा किया कि भारत ने मजबूर श्रम के खिलाफ मजबूत कानूनी सुरक्षा विकसित की है।
फेडरेशन आॅफ इंडियन चैंबर्स आॅफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एफआईसीसीआई) ने भी प्रस्तावित शुल्क का विरोध करते हुए कहा कि भारतीय निर्यातक पहले से ट्रेसबिलिटी, स्वतंत्र आॅडिट और जिम्मेदार सोर्सिंग जैसे सख्त अनुपालन मानकों का पालन करते हैं। अतिरिक्त टैरिफ से अमेरिकी कंपनियों और उपभोक्ताओं की लागत बढ़ेगी तथा दोनों देशों की आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होगी।
ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (एसीएमए) और एपीईडीए भी अलग-अलग क्षेत्रों का पक्ष रखेंगे। उनका कहना है कि भारतीय ऑटो कंपोनेंट और कृषि निर्यात संगठित एवं नियमों के अनुरूप संचालित होते हैं, इसलिए इन्हें अतिरिक्त शुल्क से छूट मिलनी चाहिए। भारत का मानना है कि दंडात्मक टैरिफ लगाने के बजाय दोनों देशों को व्यापार नीति मंच के माध्यम से सहयोग और अनुपालन आधारित समाधान तलाशना चाहिए, जिससे भारत-अमेरिका की बढ़ती रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को नुकसान न पहुंचे।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments