अमेरिका और इजरायल से युद्ध के बाद ईरान के सामने ऊर्जा संकट खड़ा हो गया है। राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन को खुद ही जनता से कम बिजली खपत करने की अपील करनी पड़ी है। ईरानी की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी मेहर ने राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन का बयान जारी किया। इसमें देश की जनता से बिजली की कम खपत करने का अनुरोध किया गया।
ईरानी राष्ट्रपति ने कहा, ‘दुश्मन हमारे बुनियादी ढांचे पर हमला कर रहे हैं और हमें घेर रहे हैं, ताकि लोग असंतुष्ट हो जाएं और मौजूदा संतुष्टि असंतुष्टि में बदल जाए। लोगों को असंतुष्टि के पनपने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। हमें खपत पर काबू पाने की जरूरत है। घर में 10 बत्तियों के बजाय दो बत्तियां ही जलनी चाहिए, इसमें क्या समस्या है।’ मसूद पेजेश्कियन का बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार ईरान के पावर प्लांट और पुलों को निशाना बनाने की धमकी दे चुके हैं।
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ईरान में सत्ता परिवर्तन ही अमेरिका हमले का सबसे बड़ा लक्ष्य था। सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के मौत के बाद भी अमेरिका यह हासिल नहीं कर पाया है। इस बीच खबर आ रही है कि ईरान में जंग के बीच खाने-पीने के सामान की आपूर्ति बाधित हुई है।
सरकार ने आटे से सब्सिडी हटाई
तेहरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक देश में आटे की कमी है। लोगों की लंबी-लंबी कतारें लगी हैं। राजधानी तेहरान में भी आटे की कमी से रोटी का संकट खड़ा हो गया है। ईरान की बरबरी रोटी 250,000 रियाल और संगक रोटी 350,000 रियाल में मिल रही है, जबकि दोनों रोटी के लिए क्रमाश 55,000 रियाल और 76,000 रियाल का रेट तय है। सरकार ने भी आटे में मिलने वाली सब्सिडी को हटा दिया है।
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गेहूं आयात पर निर्भर है ईरान
ईरान के खान-पान में गेहूं का अहम स्थान है। यही कारण है कि वहां खपत अधिक और पैदावर कम है। फरवरी 2026 तक ईरान ने 10 महीनों में करीब 2.75 मिलियन टन गेहूं आयात किया था। ईरानी सरकार की कोशिश है कि वह गेहूं के मामले में आत्मनिर्भर बन सके। मगर अभी यह सपना दूर दिखता है। 22 साल पहले 2005 में ईरान ने गेहूं में आत्मनिर्भरता हासिल की थी। हालांकि बाद में वह लय बरकरार नहीं रख सका। ईरान के लिए गेहूं कितना अहम है, इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि हर साल 20 अप्रैल को राष्ट्रीय गेहूं और रोटी दिवस मनाया जाता है।












