भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों मणिपुर और मिजोरम से लगभग 250 लोगों का एक ग्रुप हाल ही में इजरायल पहुंचा है। यह ग्रुप ‘बनी मनाशे’ (Bnei Menashe) समुदाय का पहला बैच है, जो इजरायल में बसने आया है। आने वाले हफ्तों और महीनों में और भी कई लोग वहां पहुंचने वाले हैं।
बनी मनाशे समुदाय को ‘खोए हुए यहूदी कबीले’ में से एक माना जाता है। ये लोग कहते हैं कि उनके पूर्वज 2800 साल पहले मेनाशे कबीले से थे, जो प्राचीन काल में मध्य पूर्व से निकलकर एशिया की ओर चले आए थे। सदियों तक ये लोग फारस, अफगानिस्तान, तिब्बत और चीन होते हुए भारत के उत्तर-पूर्व में बस गए।
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यहां रहते हुए उन्होंने यहूदी रीति-रिवाजों को बचाए रखा, हालांकि बाद में मिशनरियों ने कई लोगों को ईसाई बना दिया। अब इज़रायल जाने पर उन्हें फिर से यहूदी धर्म में वापस आना होगा, जिसके बाद वे इजरायल के नागरिक बन सकेंगे।
‘ऑपरेशन विंग्स ऑफ डॉन’ क्या है?
नवंबर 2025 में इजरायल सरकार ने ‘ऑपरेशन विंग्स ऑफ डॉन’ शुरू करने की घोषणा की थी। इसका मकसद बनी मनाशे समुदाय के बाकी बचे सदस्यों को इजरायल लाना है। इस ऑपरेशन के तहत इस साल के अंत तक करीब 1200 और लोग इजरायल पहुंच सकते हैं। कुल मिलाकर 2030 तक पूरे समुदाय को वहां लाने की योजना है।
इजरायल सरकार ने इस काम के लिए करीब 30 मिलियन डॉलर (लगभग 250 करोड़ रुपये) का खर्च तय किया है। इसमें हवाई यात्रा, धर्मांतरण की क्लासेस, घर, हिब्रू भाषा सीखना और अन्य सुविधाएं शामिल हैं।
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि यह एक महत्वपूर्ण ‘जियोनिस्ट’ फैसला है, जो इजरायल के उत्तरी इलाकों को मजबूत करेगा।
लोग क्यों जाना चाहते हैं इजरायल?
इस समुदाय के सदस्यों का कहना है कि भारत में वे पूरी तरह यहूदी रीति-रिवाज नहीं निभा पाते। मणिपुर के बेंजामिन हाओकिप ने कहा, ‘हम यहूदी धर्म का पालन करते हैं, लेकिन यहां हम सभी रीति-रिवाज नहीं मना सकते। हम इजरायल जाना चाहते हैं ताकि अपनी पूरी धार्मिक आजादी से जी सकें।’
समुदाय के एक सदस्य शिमोन एनगमथेनलाल ने कहा, ‘इजरायल सरकार पर हमारा पूरा भरोसा है। उन्होंने वादा किया है कि 2030 तक सभी बनी मनाशे इजरायल पहुंच जाएंगे।’
स्वागत कैसे हुआ?
23 अप्रैल 2026 को तेल अवीव के बेन गुरियन एयरपोर्ट पर इन नए सदस्यों का भव्य स्वागत किया गया। पहले से इजरायल में रह रहे समुदाय के लोग उन्हें चीयर कर रहे थे। नए लोग पारंपरिक कपड़े पहने लाल कार्पेट पर चले।
इजरायल के अलीयेह और इंटीग्रेशन मंत्री ओफिर सोफर ने कहा, ‘हम इतिहास रच रहे हैं। हम पूरे बनी मनाशे समुदाय को इजरायल ला रहे हैं। राज्य के 78वें स्वतंत्रता दिवस के ठीक बाद इन नए ‘ओलिम’ (नए आप्रवासी) का स्वागत करना बहुत भावुक करने वाला पल है। स्वागत है घर आकर!’ ‘अलीयेह’ शब्द का मतलब है यहूदियों का इजरायल में बसना, और नए आने वाले लोगों को ‘ओलिम’ कहते हैं।
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आधे लोग जा चुके इजरायल
1990 के दशक से अब तक बनी मनाशे समुदाय के लगभग आधे लोग इजरायल जा चुके हैं। भारत में अभी भी करीब 6000 लोग बाकी हैं, जो इजरायल जाने का इंतजार कर रहे हैं। उत्तर-पूर्व भारत में करीब 10000 लोग इस समुदाय से जुड़े बताए जाते हैं।
यह पहली उड़ान थी। अगले दो हफ्तों में दो और उड़ानें आने वाली हैं। इस तरह धीरे-धीरे पूरा समुदाय इजरायल पहुंच जाएगा।












