सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को एक रोचक मामला देखने को मिला। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) ने एक वकील की याचिका खारिज करते हुए कहा कि आपको एक किस्सा सुनाता हूं, जिसके बाद आप खुशी-खुशी घर जाएंगी। न्यायिक अधिकारी बनने की एक अभ्यर्थी ने पुनर्मूल्यांकन के लिए कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। उनकी याचिका खारिज करते हुए CJI सूर्यकांत ने अपनी पढ़ाई के दिनों का किस्सा सुनाया और कहा कि याचिकाकर्ता को कहा कि वह पुनर्मूल्यांकन में उलझने के बजाय भविष्य की ओर देखें।
CJI सूर्यकांत ने यह किस्सा जुडिशियल सर्विस की एक अभ्यर्थी का हौसला बढ़ाने के लिए सुनाया जिसने एक कॉपी फिर से चेक कराने का अनुरोध किया था। CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने प्रेरणा गुप्ता की याचिका खारिज कर दी लेकिन वह अदालत से मुस्कुराते हुए बाहर निकलीं।
CJI ने सुनाई कहानी
जब याचिकाकर्ता प्रेरणा गुप्ता ने अपनी दलीलें पेश कीं तो CJI ने हस्तक्षेप करते हुए कहा, ‘मैं अपनी एक निजी कहानी शेयर करना चाहता हूं और मुझे उम्मीद है कि इसे सुनकर आप खुशी-खुशी यहां से जाएंगी क्योंकि हम आपकी याचिका स्वीकार नहीं कर सकते। उन्होंने कानून के छात्र के रूप में अपने अंतिम वर्ष का किस्सा सुनाया जब वह भी न्यायिक अधिकारी बनना चाहते थे। उन्होंने लिखित परीक्षा पास कर ली थी और उन्हें इंटरव्यू के लिए जाना था। उन्होंने कहा, ‘जब मैं अंतिम वर्ष में था, तब मैंने न्यायिक सेवा के लिए आवेदन किया था। उस समय अंतिम वर्ष के छात्र आवेदन कर सकते थे। जब तक रिजल्ट आए, प्रक्रिया बदल चुकी थी। पहले लोक सेवा आयोग चयन प्रक्रिया आयोजित करता था। फिर सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला आया, जिसके अनुसार हाई कोर्ट के जजों को विषय विशेषज्ञ के रूप में काम करना था और उनकी राय आयोग पर बाध्यकारी होती।’
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CJI सूर्यकांत ने कहा कि उसी दौरान वह पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट चले गए थे और उन्होंने वहां वकालत शुरू कर दी थी। उन्होंने बताया कि उनके इंटरव्यू बोर्ड में सबसे सीनियर जज वही थे, जिनके समक्ष उन्होंने कुछ ही दिन पहले दो महत्वपूर्ण मामलों में दलील पेश की थीं। सूर्यकांत ने कहा, ‘इंटरव्यू बोर्ड के लिए नामित सबसे सीनियर जज मुझे पहले से जानते थे क्योंकि मैंने उनके समक्ष दो मामलों में बहस की थी। इनमें से एक मामला सुनीता रानी बनाम बलदेव राज था, जिसमें उन्होंने वैवाहिक विवाद में मेरी अपील स्वीकार की थी और सिजोफ्रेनिया के आधार पर तलाक के जिला जज के फैसले को रद्द कर दिया था।’
‘एक सलाह ने बदल दी जिंदगी’
उन्होंने आगे कहा, ‘एक दिन उन्होंने मुझे अपने कक्ष में बुलाया और पूछा- ‘क्या आप न्यायिक अधिकारी बनना चाहते हैं?’ मैंने कहा, ‘हां’, उन्होंने तुरंत कहा, ‘मेरे कमरे से बाहर निकल जाओ।’ CJI ने कहा, ‘मैं कांपता हुआ बाहर आया। मेरे सारे सपने टूट गए थे। मुझे लगा कि उन्होंने मुझे झिड़क दिया है और मेरा करियर खत्म हो गया है।’ हालांकि, अगले दिन इस कहानी ने एक और मोड़ लिया, जब जज ने उन्हें फिर बुलाया और इस बार उन्होंने ऐसी सलाह दी, जिसने उनके जीवन की दिशा बदल दी।
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जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, ‘उन्होंने मुझसे कहा कि अगर आप जज बनना चाहते हैं तो आपका स्वागत है लेकिन मेरी सलाह है कि न्यायिक अधिकारी मत बनिए। विधिज्ञ परिषद (बार) आपका इंतजार कर रही है।’ CJI ने कहा कि इसके बाद उन्होंने इंटरव्यू में शामिल नहीं होने का फैसला किया और शुरुआत में अपने माता-पिता को भी यह बात नहीं बताई क्योंकि उन्हें डर था कि वे निराश होंगे। उन्होंने खुद को वकालत के लिए समर्पित कर दिया।
CJI ने याचिकाकर्ता वकील से पूछा, ‘अब बताइए, मैंने सही फैसला किया था या गलत?’ उन्होंने याचिकाकर्ता को सलाह दी कि वह एक प्रश्नपत्र के पुनर्मूल्यांकन में उलझने के बजाय भविष्य की ओर देखें। उन्होंने कहा, ‘अगली बार उच्चतर न्यायिक सेवा के लिए आवेदन कीजिए। विधिज्ञ परिषद के पास देने को बहुत कुछ है।’ प्रेरणा गुप्ता अदालत में कानूनी राहत की उम्मीद लेकर आई थीं लेकिन याचिका खारिज होने के बावजूद मुस्कुराते हुए बाहर निकलीं।












