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बलरामपुर में मोटरसाइकिल-साइकिल भिड़ंत में महिला की मौत:दो घायल, गैसड़ी में हुआ हादसा


गैसड़ी थाना कोतवाली क्षेत्र में बुधवार शाम करीब 5 बजे भाभर नाले के पास मोटरसाइकिल और साइकिल की भिड़ंत में एक महिला की मौत हो गई, जबकि दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गैसड़ी में भर्ती कराया गया है। मृतक महिला की पहचान सड़वा ग्राम पंचायत निवासी मालती चौहान (38) के रूप में हुई है। उनके पति बड़कऊ चौहान (40) भी इस दुर्घटना में घायल हुए हैं। दोनों पति-पत्नी पचपेड़वा विकासखंड के रामनगर ईंट भट्ठे पर काम करते थे और गैसड़ी से बाजार करके वापस लौट रहे थे। घायल बड़कऊ चौहान ने बताया कि भाभर नाले से पहले एक मोटरसाइकिल सवार ने पीछे से टक्कर मार दी। घटना की सूचना मिलते ही एंबुलेंस द्वारा तीनों घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गैसड़ी लाया गया। वहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अधीक्षक अरविंद कुमार ने मालती चौहान को मृत घोषित कर दिया। मोटरसाइकिल चालक की पहचान श्याम नारायण तिवारी के रूप में हुई है, जो स्वर्गीय शैलेश कुमार तिवारी के पुत्र और सकल्दा, थाना पचपेड़वा के निवासी हैं। वह गैसड़ी विकासखंड के भोजपुर थारू स्थित होम्योपैथिक अस्पताल में वार्ड बॉय के पद पर तैनात हैं। श्याम नारायण तिवारी अस्पताल बंद करके अपने घर सकल्दा लौट रहे थे, तभी यह दुर्घटना हुई। ग्राम प्रधान सकल्दा अरुण चतुर्वेदी ने बताया कि श्याम नारायण तिवारी करीब 10 वर्षों से भोजपुर थारू में तैनात थे और प्रतिदिन ड्यूटी के बाद अपने घर लौटते थे। दुर्घटना में घायल हुए दोनों लोगों का इलाज गैसड़ी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चल रहा है। मौके पर पहुंचे उपनिरीक्षक गुलाब शाही ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और घटना की जांच की जा रही है।

मदरसे के पास कूड़ा फेंके जाने से ग्रामीण परेशान:सिंदुरिया में दुर्गंध से सांस लेना मुश्किल, संक्रमण का खतरा


महराजगंज जनपद के सिंदुरिया ग्राम सभा में मदरसे के पास लगातार कूड़ा फेंके जाने से स्थानीय ग्रामीण और राहगीर परेशान हैं। गंदगी के कारण पूरे इलाके में दुर्गंध फैल गई है, जिससे लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है। स्थिति यह है कि आसपास का वातावरण पूरी तरह प्रदूषित हो चुका है। इससे संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ गया है, जिससे स्थानीय निवासियों में चिंता व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित विभाग को इस समस्या से अवगत कराया है। हालांकि, अब तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, और कूड़े का ढेर दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। गांव के निवासी दुर्गेश, विनय, रियाजुद्दीन और आत्मा सहित अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन के प्रति आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने जल्द से जल्द कूड़ा हटवाने और नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। फिलहाल, संबंधित विभाग की उदासीनता के कारण ग्रामीणों को गंदगी और बदबू के बीच जीवन यापन करना पड़ रहा है।

बस्ती में जिले में ईंधन का पर्याप्त स्टॉक मौजूद:एडीएम ने अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की


बस्ती में ईंधन की कमी की अफवाहों के बीच प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। गुरुवार दोपहर अपर जिलाधिकारी (एडीएम) प्रतिपाल सिंह चौहान और नायब तहसीलदार पूजा वर्मा ने वाल्टरगंज थाना क्षेत्र के भुजैनिया स्थित एक पेट्रोल पंप का औचक निरीक्षण किया। ईंधन खत्म होने की भ्रामक खबरों के कारण भुजैनिया पंप पर दोपहर में दोपहिया और चार पहिया वाहनों की भारी भीड़ जमा हो गई। लंबी कतारों से अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। एडीएम ने मौके पर भीड़ को शांत कराया और पंप संचालक को निर्देश दिए कि उपभोक्ताओं को कतारबद्ध तरीके से ही पेट्रोल-डीजल उपलब्ध कराया जाए, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। निरीक्षण के बाद एडीएम प्रतिपाल सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि जिले में डीजल और पेट्रोल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। उन्होंने जनता से किसी भी प्रकार की भ्रामक खबरों या अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की। एडीएम ने लोगों से अनावश्यक रूप से ‘पैनिक बुकिंग’ न करने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि प्रशासन आपूर्ति श्रृंखला की निरंतर निगरानी कर रहा है और कहीं भी ईंधन की किल्लत नहीं होने दी जाएगी। इस अवसर पर राजस्व निरीक्षक शक्ति शरण यादव और लेखपाल मोहित श्रीवास्तव सहित अन्य विभागीय कर्मचारी भी उपस्थित थे।
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कामदा एकादशी कब है? सुबह में भद्रा का साया, तो कैसे होगी पूजा, जानें तारीख, मुहूर्त, व्रत पारण का समय

News Desk

कामदा एकादशी का व्रत चैत्र माह​ के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है. यह चैत्र का अंतिम एकादशी व्रत है. इस बार की कामदा एकादशी पर भद्रा का साया है, इस भद्रा का वास धरती पर है, इसलिए इस समय में कोई शुभ कार्य न करें. कामदा एकादशी का व्रत रखकर भगवान पूजा की पूजा करने से पाप और दोष मिटते हैं, राक्षस योनि से मुक्ति मिलती है. आइए जानते हैं कि कामदा
एकादशी
कब है? कामदा एकादशी का मुहूर्त और पारण समय क्या है?

कामदा एकादशी 2026 तारीख
पंचांग के अनुसार, कामदा एकादशी के लिए चैत्र शुक्ल एकादशी तिथि का प्रारंभ 28 मार्च को सुबह 8 बजकर 45 मिनट से है. यह तिथि 29 मार्च को सुबह 7 बजकर 46 मिनट तक है. ऐसे में उदयातिथि के आधार पर कामदा एकादशी का व्रत 29 मार्च दिन रविवार को है.
कामदा एकादशी 2026 मुहूर्त
जो लोग कामदा एकादशी का व्रत रखेंगे, वे भगवान विष्णु की पूजा सुबह में 7 बजकर 48 मिनट से दोपहर 12 बजकर 26 मिनट के बीच कर सकते हैं. इस समय में लाभ-उन्नति मुहूर्त 09:20 ए एम से 10:53 ए एम तक है और उसके बाद अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त 10:53 ए एम से 12:26 पी एम तक रहेगा. उस दिन का ब्रह्म मुहूर्त 04:42 ए एम से 05:28 ए एम तक है, वहीं अभिजीत मुहूर्त दोपहर में 12:01 पी एम से 12:51 पी एम तक रहेगा.

कामदा एकादशी पर भद्रा का साया
इस साल कामदा एकादशी पर भद्रा का साया सुबह में 06:15 ए एम से है और इसका समापन सुबह 07:46 ए एम पर होगा.

कामदा एकादशी पर धृति योग
इस बार कामदा एकादशी के दिन धृति योग और अश्लेषा नक्षत्र है. धृति योग प्रात:काल से लेकर शाम 06:20 पी एम तक रहेगा, उसके बाद से शूल योग बनेगा. एकादशी पर अश्लेषा नक्षत्र प्रात:काल से लेकर दोपहर 02:38 पी एम तक है, उसके बाद से मघा नक्षत्र है.
कामदा एकादशी 2026 पारण समय
कामदा एकादशी व्रत का पारण 30 मार्च दिन सोमवार को किया जाएगा. व्रत पारण का समय सुबह में 6 बजकर 14 मिनट से सुबह 7 बजकर 9 मिनट के बीच है. पारण वाले दिन द्वादशी का समापन सुबह 07:09 ए एम पर होगा.

आखिर मऊ के इस कुंड में ऐसा क्या चमत्कार है? स्नान करते ही दूर होती है चर्म रोग की समस्या, अनोखी मान्यता

News Desk

उत्तर प्रदेश धार्मिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध माना जाता है और हर जिलों में विभिन्न प्रकार के मंदिर स्थापित हैं और हर मंदिरों का एक अलग ही विशेषता है. कहीं मंदिरों के देवी-देवताओं की विशेषता है, तो कहीं मंदिर के बाहर बने तालाब की अलग मान्यता है. उसी का उदाहरण है देवलास स्थित सूर्य मंदिर के बाहर बने सूर्य कुंड की कहानी. यहां इस सूर्यकुंड में जो स्नान करता है, उसकी हर प्रकार की बीमारियां दूर होती हैं.

श्री राम के उपासना से बना यह सूर्यकुंड
कि यह स्थान महर्षि देवल मुनि की तपोस्थली माना जाता है, जिसके कारण इसका नाम देवलास पड़ा. भगवान राम ने वनवास के दौरान पहले दिन इसी स्थान पर विश्राम किया और सूर्य की उपासना की. इसलिए इसे बालार्क सूर्य मंदिर भी कहा जाता है.
बाल्मीकि की ओर से रचित रामायण में भी इस बात का उल्लेख मिलता है कि भगवान राम ने तमसा नदी के किनारे अपने पहले पड़ाव के रूप में इसी स्थान को चुना था. सूर्यकुंड को औषधि और धार्मिक महत्व प्राप्त है. ऐसी मान्यता है कि इस कुंड में स्नान करने से विभिन्न बीमारियों से मुक्ति मिलती है. विशेषकर चर्म रोग विशेष रूप से दूर होता है.

छठ पर्व पर विशेष महत्व
छठ पर्व पर इस तालाब में हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं और इसी तालाब में अर्ध देकर पूजा पाठ करते हैं, क्योंकि छठ पर्व पर सूर्यदेव की पूजा की जाती है और सूर्य कुंड को विशेष महत्व दिया जाता है. मान्यता है कि इस सूर्यकुंड में स्नान कर यहां बने देवल मुनि के मंदिर में पूजा पाठ करने से चर्म रोग जैसी बीमारियां दूर होती हैं.

मान्यता है कि सच्चे मन से इस तालाब में यदि आप एक बार भी स्नान कर पूजा-पाठ करते हैं, तो चर्म रोग जैसी आपकी बीमारी दूर हो सकती है. हालांकि यह आपकी आस्था के ऊपर महत्व रखता है कि आप यहां कब तक स्नान कर अपनी बीमारी से निजात पा सकते हैं.
रविवार को स्नान करने से दूर होता है चर्म रोग
सूर्यकुंड नाम से प्रसिद्ध तालाब में रविवार को स्नान करने से चर्म रोग दूर होता है. इस तालाब के साथ-साथ यहां अगल-बगल लगे नलकूपों के भी पानी में एक खास बात देखी जाती है. यदि इस पानी को कुछ देर तक बाहर रख दिया जाए, तो पानी में पीलापन होने लगता है, क्योंकि इस पानी में एक अलग ही गुण पाया जाता है, जिसकी वजह से चर्म रोग ठीक होने में मदद मिलती है.
इस तालाब के बगल में बने सूर्य मंदिर और विक्रमादित्य की चौखट की भी काफी मान्यता है. यहां सच्चे मन से पूजा-पाठ करने से मन्नतें पूरी होती हैं. यही वजह है कि यहां सात दिवसीय मेले का भी आयोजन किया जाता है. डाला छठ पर मेले का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देश की कोने-कोने से लोग आएंगे.

कंजिया सम्मय माता मंदिर में नवरात्रि अष्टमी पर दर्शन:बहराइच के प्रसिद्ध मंदिर में उमड़ी भक्तों की भारी भीड़


बहराइच जिले के भग्गड़वा बाजार स्थित प्रसिद्ध कंजिया सम्मय माता मंदिर में नवरात्रि की अष्टमी पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन किए और पूजा-अर्चना कर मन्नतें मांगीं। यह मंदिर प्राचीन काल से ही एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल के रूप में विख्यात है। नवरात्रि के दौरान यहां विशेष मेले का आयोजन होता है, जिसमें बड़ी संख्या में भक्त शामिल होते हैं। नवरात्रि के नौ दिनों तक मंदिर में सुबह से लेकर शाम तक भक्तों का तांता लगा रहता है। श्रद्धालु धूप, दीप और पूजा-अर्चना कर माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। मान्यता है कि यहां मन्नत मांगने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। मन्नत पूरी होने पर भक्त कथा-भागवत का आयोजन भी करवाते हैं।

ट्रांसजेंडर: संसद से इतिहास के पन्नों तक, कहानी अनसुनी क्यों रही?

ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) अमेंडमेंट बिल, 2026 पास संसद के दोनों सदनों से से पारित हो गया है। अब इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा और उनके दस्तखत के बाद यह कानून बन जाएगा। नए विधेयक को लेकर विपक्ष के कई दलों ने ऐतराज जताया है। विपक्ष का कहना है कि बिना ट्रांसजेंडर समुदाय से बातचीत किए, सरकार विधेयक लेकर आई है, जो उनके अधिकारों को छीनती है।

ट्रांसजेंडर तबके का कहना है कि सरकार ने ट्रांसजेंडर की परिभाषा जैविक और शारीरिक संकेतकों के आधार पर कर दी है, जबकि एक व्यक्ति, स्त्री, पुरुष या थर्ड जेंडर, क्या महसूस करता है, यह उसकी निजी राय है। केंद्र सरकार का पक्ष है कि इससे, ट्रांसजेंडर समुदाय में होने वाली जबरिया घुसपैठ रुकेगी, उन्हें ज्यादा अधिकार मिलेंगे।

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री वीरेन्द्र कुमार ने इस विधेयक की तारीफ की है। उन्होंने कहा है कि विधेयक का मकसद, समुदाय को सुरक्षा और लाभ देना है। लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचे, इसलिए सटीक परिभाषा तय करनी जरूरी है। ट्रांस समुदाय को ऐतराज है कि व्यक्तिगत, लैंगिक पहचान में सरकारी घुसपैठ क्यों की गई है।

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किन दलों ने ऐतराज जताया है और क्यों?

प्रियंका गांधी, सांसद, कांग्रेस:-
मुझे सच में लगता है कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि वे इसे स्टैंडिंग कमिटी के पास नहीं भेज रहे हैं। समुदाय को लगता है कि यह बिल उनकी पहचान को मिटा देगा। यह बहुत-बहुत जरूरी था कि उनसे सलाह ली जाती। यह बिल, उचित सलाह-मशविरे के बाद ही लाया या पास किया जाता। मुझे लगता है कि यह बहुत ही अनुचित है कि पूरे समुदाय को ऐसा महसूस हो रहा है कि उनसे कोई सलाह नहीं ली गई है। उनके संदर्भ में इतना बड़ा फैसला लिया जा रहा है। काश सरकार ने उनकी बात सुनी होती और इसे स्टैंडिंग कमिटी के पास भेजा होता।

लोकसभा में ट्रांसजेंडर बिल के समर्थन में वोट करते NDA सांसद। Photo Credit: Sansad TV

कांग्रेस, द्रविड़ मुनेत्र कझगम, नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरद पवार), शिवसेना (UBT), आरजेडी, समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस ने विधेयक का विरोध किया है। विपक्ष का कहना है कि यह विधेयक, ज्यादा क्रूर और दमनकारी है। सु्प्रीम कोर्ट ने NALSA जजमेंट 2014 में जो कहा था, उस फैसले का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट ने लैंगिक पहचान को ‘स्व निर्धारण’ का अधिकार दिया था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का मतलब था कि आप तय करेंगे, आप ट्रांस, बाईसेक्सुअल, लेस्बियन, गे, क्वीर क्या अपने आपको को समझते हैं। किस लैंगिक खांचे में आप खुद को देखना चाहते हैं, यह अधिकार सिर्फ आपका होगा।’

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आनंद भदौरिया, सांसद, समाजवादी पार्टी:-
यह ट्रांसजेंडर समुदाय के साथ पूरी तरह से विश्वासघात है। वे इसका विरोध कर रहे थे। सदन के अंदर विपक्ष के सभी सदस्यों ने जोर देकर कहा कि इस बिल को स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजा जाए। यह बिल समाज के एक वर्ग के खिलाफ है। उनकी जो आशंकाएं हैं, वे आने वाले समय में कहीं न कहीं सच साबित होंगी। सरकार ने सदन में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया, इसलिए पूरे विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया।

कांग्रेस सांसद ज्योतिमणि ने आरोप लगाया कि बिल ट्रांसजेंडर समुदाय से बिना परामर्श के लाया गया है और इसमें मेडिकल बोर्ड के जरिए पहचान तय करना असंवैधानिक है।

विपक्ष क्या चाहता है?

विपक्ष ने मांग की है कि बिल को स्थायी समिति को भेजकर समुदाय से व्यापक परामर्श किया जाए। बिना ट्रांस समुदाय से बातचीत के इस विधेयक को पास करना, उन पर जबरन थोपने जैसा है। कानूनी तौर पर इसका दुरुपयोग और दोहन हो सकता है।

सरकार क्यों बचाव कर रही है?

हेमांग जोशी, सांसद, BJP:-
विपक्ष को हर बात का विरोध करने की बुरी आदत पड़ गई है, फिर चाहे मामला समाज के हित का ही क्यों न हो। यह एक ऐसा बिल था जिसका सभी को एकमत होकर समर्थन करना चाहिए था; विपक्ष ने अपनी बातें रखीं, लेकिन जब वोटिंग की बारी आई तो वे सदन से बाहर चले गए। आज यह बिल सर्वसम्मति से पास हो गया है।

सरकार और बीजेपी ने बिल का समर्थन करते हुए कहा कि स्व-निर्धारित पहचान से आरक्षण और अन्य लाभों का दुरुपयोग हो सकता है। विधेयक में कहा गया है कि यह कानून, अलग-अलग जेंडर पहचान, खुद से घोषित की गई लैंगिक पहचान को शामिल नहीं करता है। यह केवल, पांरपरिक रूप से भेदभाव का शिकार ट्रांस समुदाय के हितों की रक्षा कर रहा है। विधेयक में बच्चों पर होने वाले अपराधों के लिए गंभीरता के अनुसार दंड का प्रावधान भी किया गया है।

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नए विधेयक को ट्रांसजेंडर समुदाय अपने हितों के खिलाफ मानता है। Photo Credit: PTI

ट्रांसजेंडर समुदाय को एतराज क्या है?

‘पहचान पर खतरा है विधेयक’

ट्रांस समुदाय का कहना है कि नए विधेयक में सरकार ने लोगों से अपना जेंडर खुद चुनने का अधिकार छीन लिया है। विधेयक में स्त्री या पुरुष या तीसरे लिंग के तौर पर अपनी पहचान खुद चुनने वाले प्रावधान को हटा दिया गया है। नया विधेयक, ‘सेल्फ-परसीव्ड जेंडर आइडेंटिटी’ को ही हटा रहा है, जो गलत है। इस विधेयक के आने के बाद देशभर में ट्रांसजेंडर समुदाय में गुस्सा है।

NALSA का फैसले को पलटने पर ऐतराज

सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट विशाल अरुण मिश्र ने कहा, ‘साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने NALSA फैसले में कहा था कि ट्रांसजेंडर व्यक्ति अपनी लैंगिक पहचान खुद तय कर सकते हैं। स्त्री, पुरुष या थर्ड जेंडर, खुद को जिस भी रूप में वे देखते हैं, उन्हें यह तय करने का अधिकार है कि उनकी लैंगिक पहचान क्या होगा। उन्हें पुरुष, महिला या थर्ड जेंडर में से कोई भी चुनने की आजादी है। इसके लिए कोई सर्जरी या मेडिकल टेस्ट जरूरी नहीं है। 2026 का नया संशोधन विधेयक इस फैसले के खिलाफ जाता दिख रहा है।’

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Photo Credit: PTI

विशाल अरुण मिश्रा, एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड, सुप्रीम कोर्ट:-
ट्रांसजेंडर विधेयक में ट्रांसजेंडर व्यक्ति की परिभाषा बदल दी गई है। अब इसमें सिर्फ वे लोग शामिल होंगे जिनकी समस्या जन्मजात, सामाजिक और सांस्कृतिक कारणों से है। ट्रांसमेन, ट्रांसवुमेन और जेंडरक्वीर लोगों को बाहर कर दिया गया है।

जेंडरक्वीर कम्युनिटी क्या है?

जेंडरक्वीर उन लोगों को कहते हैं, जिनकी लैंगिक पहचान, पुरुष, महिला या किसी बाइनरी में फिट नहीं होती है। इस समुदाय के लोग, पुरुष, महिला, बाइसेक्सुअल, नॉन बाइनरी या जेंडर नॉन कन्फर्मिंग के तौर पर खुद को समझते हैं। समुदाय के लोग स्त्री, पुरुष, तीसरे लिंग से इतर अपनी पहचान मानते हैं।

‘अधिकारी तय करेंगे, आपका स्त्री, पुरुष या ट्रांस हैं’

नए ट्रांसजेंडर विधेयक में साफ-साफ कहा गया है कि अलग-अलग लैंगिक रुझान वाले, स्वघोषित ट्रांसजेंडर को ट्रांसजेंडर नहीं माना जाएगा। साल 2019 के कानून में जहां ट्रांसजेंडर समुदाय को यह अधिकार था कि वह तय करे कि उसकी लैंगिक पहचान क्या होगी, वह उसी आधार पर अपना लिंग चुनकर जिला मजिस्ट्रेट से प्रमाणपत्र ले सकता था। नए विधेयक में यह अधिकार खत्म हो गया है। अब जिला मजिस्ट्रेट मेडिकल बोर्ड की सलाह पर फैसला करेगा कि आपकी लैंगिक पहचान क्या होगी। आपकी जेंडर आइडेंटिटी, अब डॉक्टर और अधिकारी तय करेंगे, आप खुद नहीं तय कर सकते हैं।

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प्रदर्शन करते ट्रांसजेंडर समुदाय के लोग। Photo Credit: PTI

सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2025 में जेन कौशिक मामले में 2019 के कानून की आलोचना की थी। जेन कौशिक, पेशे से शिक्षक हैं। जब उन्होंने बताया कि वह ट्रांस समुदाय से हैं तो स्कूलो ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि लैंगिक पहचान के आधार पर किसी को उसकी नौकरी से नहीं निकाला जा सकता है। कोर्ट ने जुर्माना भी लगाया था।

सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि यह कागजी कानून बनकर रह गया है, सरकारें और संस्थान दोनों इसे नहीं मान रहे हैं। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने कहा था कि केंद्र और राज्य सरकारें ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) एक्ट, 2019 और 2020 के नियमों को ठीक से लागू करने में नाकाम रहीं हैं।

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ट्रांस समुदाय को पीड़ित बनाकर पेश कर रही सरकार

ट्रांसजेंडर विधेयक में सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि विधेयक में ट्रांसजेंडर समुदाय को पीड़ित बनाकर पेश कर रही है। ट्रांस समुदाय ने इस समुदाय का हिस्सा होने चुना है, उन्हें बराबरी का हक चाहिए, वे पीड़ित नहीं हैं। सरकार का कहना है कि इससे ट्रांसजेंडर समुदाय की सुरक्षा होगी। समुदाय का आरोप है कि विधेयक ट्रांसजेंडर लोगों को पीड़ित के रूप में पेश कर रहा है। इससे उनकी गरिमा और स्वतंत्रता दोनों पर असर पड़ेगा।

सरकार नया कानून क्यों लाई है?

सरकार का तर्क है कि पुराना कानून अस्पष्ट था। शादी, संपत्ति और परिवारिक कानून जैसे मुद्दों में अड़चनें आ रहीं थीं। आलोचकों का कहना है कि समस्या का जैसा हल निकाला गया है, वह ट्रांस समुदाय के हितों पर प्रहार है। लोकसभा में यह विधेयक 23 मार्च 2026 को पास हो गया है। अब राज्यसभा में जाने वाला है। ट्रांस समुदाय इस बिल कि विरोध में है। समुदाय के लोग इस बदलाव को अपनी पहचान पर हमला मान रहे हैं। उन्होंने इसका विरोध तेज कर दिया है। कई राज्यों में नए विधेयक को लेकर प्रदर्शन भी हुए है।

भारत में ट्रांसजेंडर मैरिज को वैध बनाने की मांग हो रही है। Photo Credit: PTI

एक नजर में पूरा विधेयक समझिए, जिस पर बवाल मचा

लोकसभा में 13 मार्च को ट्रांसजेंडर विधेयक पेश हुआ था। मंगलवार को इसे लोकसभा ने पास कर दिया। यह विधेयक, 2019 के ट्रांसजेंडर कानून में बदलाव लेकर आया है।

ट्रांसजेंडर की नई परिभाषा: ट्रांसजेंडर विधेयक में ट्रांसजेंडर की परिभाषा बदली गई है। ट्रांसमैन, ट्रांसवुमन और जेंडरक्वियर को ट्रांसजेंडर की परिभाषा से बाहर किया गया है। अब सिर्फ हिजड़ा, किन्नर, अरावानी, जोगता जैसी सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान वाले लोगों, जन्म से शारीरिक विशेषताओं वाले लोगों को ट्रांसजेंडर माना जाएगा।

  • शारीरिक आधार पर पहचान: जिन लोगों के जननांगों, हार्मोन और क्रोमोसोम की वजह से शारीरिक बदलाव दिख रहे हों, उन्हें इस समुदाय में रखा गया है। जिन लोगों को जबरन ट्रांसजेंडर बनाया गया है, प्राइवेट पार्ट काटा गया है, हार्मोन थेरेपी या सर्जरी की गई है, उन्हें ट्रांसजेंडर कहा जाएगा।
  • जेंडर के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट: यह विधेयक साफ कहता है कि सेक्सुअल ओरिएंटेशन या अपनी धारणा के आधार पर कोई व्यक्ति ट्रांसजेंडर नहीं माना जाएगा। पहचान प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार अब सिर्फ जिला मजिस्ट्रेट के पास के पास नहीं रहेगा। पहले चीफ मेडिकल ऑफिसर की अध्यक्षता में मेडिकल बोर्ड की सिफारिश जरूरी होगी।
  • सर्जरी के लिए भी बदल गए नियम: बोर्ड जांच के बाद ही प्रमाणपत्र जारी होगा। इस प्रमाणपत्र के आधार पर जन्म प्रमाणपत्र और अन्य सरकारी दस्तावेजों में पहला नाम बदला जा सकेगा। अगर कोई व्यक्ति सर्जरी कर जेंडर बदलता है तो उसे नया प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य होगा। अस्पताल को सर्जरी की जानकारी जिला मजिस्ट्रेट को देनी होगी।
  • जबरन ट्रांसजेंडर बनाना अपराध: बिल में जबरन ट्रांसजेंडर बनाने के खिलाफ नई और कड़ी धाराएं जोड़ी गई हैं। जबरन ट्रांसजेंडर बनाने के लिए अपहरण करने या गंभीर चोट पहुंचाने पर गड़ी सजाएं तय की गईं हैं। अगर यह काम कोई वयस्क पीड़ित के साथ होता है तो दोषी को 10 साल से आजीवन कारावास और कम से कम 2 लाख जुर्माना देना होगा। अगर पीड़ित बच्चा तो है जबरन ट्रांस बनाने वाले समुदाय को आजीवन कारावास की सजा होगी, कम से कम 5 लाख जुर्माना लगेगा।
  • भीख मंगवाना, बंधुआ मजदूरी अपराध: अगर कोई जबरन भीख मंगवाता है या बंधुआ मजदूरी कराता है तो भी कड़ी सजा मिलेगी। अगर पीड़ित वयस्क है तो 5 से 10 साल की सजा, कम से कम 10 लाख का जुर्माना देना होगा। अगर पीड़ित बच्चा है तो 10 से 14 साल की सजा मिल सकती है, कम से कम 3 लाख रुपये का जुर्माना लग सकता है।
Photo Credit: PTI

LGBTQIA+ समुदाय है क्या?

  • लेस्बियन: महिला जब, महिलाओं के प्रति आकर्षित हो।
  • गे: पुरुष, जब पुरुष के प्रति आकर्षित हो।
  • बाइसेक्सुअल: महिला और पुरुष, दोनों में रुचि हो।
  • ट्रंसजेंडर: ऐसे लोग, जिनकी लैंगिक पहचान, जन्म के पहचान से अलग हो।
  • क्वीर: स्त्री, पुरुष, तीसरे लिंग की बाइनरी से अलग जो अपना अस्तित्व देखते हों।
  • इंटरसेक्स: शारीरिक वजहों से स्त्री और पुरुष किसी एक दायरे में फिट न होना।
  • एसेक्शुअल: ऐसे लोग, जिन्हें सेक्स में कोई दिलचस्पी नहीं होती है।

ट्रांसजेंडर शब्द का इतिहास क्या है?

जब से मानव सभ्यता है, तब से ट्रांसजेंडर अस्तित्व में हैं। भारतीय धर्म ग्रंथों में यह समुदाय, वैदिक काल से है। रामायण और महाभारत की कहानियों में इनका जिक्र आता है। इक्ष्वाकु, शाक्य, चंद्रवंशी, मौर्य वंश, गुप्त वंश, मुगल, चोल, चालु और मराठा जैसे साम्राज्यों के दौरान भी यह समुदाय रहा है। मिस्र जैसे देशों में 1200 ईसा पूर्व तक, इनका विवरण मिलता है।

किट हेयम अपनी किताब, ‘बिफोर वी वर ट्रांस: ए न्यू हिस्ट्री ऑफ जेंडर’ में लिखते हैं, ‘ट्रांस समुदाय, तब भी था, जब प्राचीन मेसोपोटामिया की सभ्यता अपने चरम पर थी। तब मेसोपोटामिया में गाला पुजारी होते थे, जो होते तो पुरुष थे लेकिन महिलाओं के वेष में रहते थे। बेबीलोनियन ग्रंथ बताते हैं कि देवता एन्की ने देवी इनन्ना के लिए गीत रचे थे। भारतीय महाद्वीप में हजारों साल से ‘किन्नर समुदाय’ रहता है। उत्तरी अमेरिका में लोग लोग इस समुदाय को ‘टू-स्पिरिट’ के नाम से जानते थे। हवाई में यह समुदाय माहू कहलाता था, प्राचीन ग्रीस में ‘हेर्माफ्रोडाइटस’ भी इसी समुदाय का हिस्सा थे।

किट हेयम, ट्रांस इतिहासकार:-
जेंडर डायवर्सिटी मानव इतिहास का अभिन्न हिस्सा है। अफ्रीका के कुछ समुदायों में जेंडर फ्लुइडिटी सामान्य थी, लेकिन यूरोपीय उपनिवेशवाद ने इसे दबाया और अपराध बता दिया। ब्रिटिश कानूनों ने भारत में हिजड़ों को हाशिए पर धकेला। एक तरफ पश्चिमी बाइनरी थोपी गई लेकिन दूसरी तरफ डिजिटल प्लेटफॉर्म के उदय से पुरानी विविधताएं वापसी कर रहीं हैं।

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ट्रांस सर्जरी की शुरुआत कैसे हुई?

‘बिफोर वी वर ट्रांस: ए न्यू हिस्ट्री ऑफ जेंडर’ में किट हेयम लिखते हैं, ’19वीं से 20वीं सदी में पश्चिमी चिकित्सा ने ट्रांस पहचान को मानसिक रोग बताया था। जब दुनिया इस दकियानूसी सोच में जकड़ी थी, तब डॉ. मैग्नस हिर्शफेल्ड ने जर्मनी में और डॉ. हैरी बेंजामिन ने अमेरिका में हार्मोन थेरेपी और सर्जरी की राह खोली।

साल 2019 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जेंडर को लेकर होने वाली दुविधा को मानसिक बीमारी की सूची से हटाया था। ट्रांस पेंटर और आंदोलनकारी लिली एल्बे ने 1930 के दशक में, पहली बार जेंडर कन्फर्मेशन सर्जरी कराई थी। सर्जरी से पहले वह पुरुष थीं और उन्होंने गेर्डा गॉटलीब से शादी की थी।

डॉ. मैग्नस हिर्शफेल्ड पहले सर्जन बने, जिन्होंने यह कारनामा किया। वह वैजिनोप्लास्टी कराने वाली शुरुआती महिलाओं में से एक रहीं हैं। एल्बे पूरी तरह से महिला होना चाहती थीं, 1931 में उन्होंने अपनी चौथी गर्भाशय प्रत्यारोपण सर्जरी और वेजाइनल कैनाल बनवाने के लिए सर्जरी कराई। 13 सितंबर 1931 को जर्मनी के ड्रेसडेन में हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई। तब से लेकर अब तक, जेंडर चेंज के बाद पुरुषों के मां बनने से जुड़े शोध तो हो रहे हैं लेकिन सफलता नहीं मिली है।

ट्रांस कम्युनिटी। Photo Credit: PTI

कैसे ट्रांजेंडर समुदाय को मिली पहचान?

क्रिस्टीन जोग्रेनसेन उन शुरुआती लोगों में से एक थीं, जिन्होंने ट्रांस समुदाय के हक के लिए आवाज उठाई। वह अमेरिका में सेक्स रीअसाइनमेंट सर्जरी के लिए जानी जाती हैं। 1944 तक, वह पुरुष थीं, जोर्गेनसेन, अमेरिकी सेना में शामिल थीं। पुरुष के तौर पर उन्होंने सेक्स चेंज सर्जरी पर शोध किया, वह 1950 के दशक में मशहूर हो गईं थीं। उनकी आत्मकथा, ‘क्रिस्टीन जोर्गेनसेन, अ पर्सनल ऑटोबायोग्राफी’ आज भी लोग पढ़ते हैं।

साल 1969 तक मार्शा पी जॉनसन और सिल्विया रिवेरा की अगुवाई में स्ट्रीट ट्रांसवेस्टाइट एक्शन रेवोल्यूशनरीज (STAR) की नींव पड़ी। धीरे-धीरे अमेरिका और यूरोप से निकलकर ट्रांस आंदोलन, पूरी दुनिया में फैल गया। अब यह समुदाय, अपने अधिकारों को लेकर मुखर हो रहा है।

साल 1969 में न्यूयॉर्क के स्टोनवाल पर पुलिस ने ट्रांस लोगोंको पकड़ने के लिए छापेमारी की। लोग पुलिसिया उत्पीड़न पर भड़क गए और समाज के लोग आगे आए। 6 दिनों तक विरोध प्रदर्शन हुए, दंगे हुए। एक साल बाद, 28 जून 1970 को पहली प्राइड परेड, क्रिस्टोफर स्ट्रीट लिबरेशन डे मार्च निकाली गई। यह मार्च, LGBTQ समुदाय के अधिकारों और गर्व का प्रतीक है। जून को प्राइड मंथ कहा जाता है।

ट्रांस समुदाय, सरकार के नए कानूनों से नाराज है। Photo Credit: PTI

ट्रांस समुदाय को कैसे देखती रही है दुनिया?

ट्रांस समुदाय, समाजिक उपेक्षा का शिकार सैकड़ों साल तक रहा। किसी समाज में इन्हें अपराधी माना गया,कहीं इन्हें नगर के सबसे कोने में बसाया गया। समुदाय का एक बड़ा हिस्सा देह व्यापार और भिक्षावृत्ति में शामिल रहा। आज भी सामजिक तौर पर यह समुदाय हाशिए पर है।

सामाजिक भेदभाव, यौन उत्पीड़न की खबरें आती हैं, दब जाती हैं। इसे ऐसे आप समझ सकते हैं कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो 2022-23 के आंकड़े बातते हैं कि ‘ट्रांसजेंडर पर्सन (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) एक्ट से जुड़ा सिर्फ एक केस दर्ज हुआ था। 2022 में हत्या के सिर्फ 9 केस दर्ज हुए, अपहरण के 1 केस दर्ज हुए हैं। अखबारों की हेडलाइन, अलग आंकड़े देते हैं।

क्या चाहता है ट्रांस समुदाय?

  • विवाह का अधिकार: साल 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने ‘सेम सेक्स मैरिज’ को कानूनी मान्यता देने से इनकार कर दिया था।
  • बच्चा गोद लेने का अधिकार: मौजूदा कानूनों के हिसाब से सेंट्रल एडॉप्टेशन रिसोर्स अथॉरिटी, ट्रांसजेंडर जोड़ों को कानूनी रूप से बच्चा गोद लेने का अधिकार नहीं देता है।
  • जेंडर तय करने का अधिकार: साल 2026 में जो विधेयक सरकार लेकर आई है, उसमें अब ट्रांस व्यक्ति, खुद को ट्रांस मान ही नहीं सकता है। इसके लिए उसे मेडिकल बोर्ड की मंजूरी लेनी होगी।
  • आरक्षण का अधिकार: NALSA फैसले में सुप्रीम कोर्ट के सुझाव के बावजूद, शिक्षा और सरकारी नौकरियों में अभी तक ट्रांसजेंडर समुदाय को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष आरक्षण नहीं मिलता है।
  • उत्पीड़न के विरुद्ध अधिकार: ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के खिलाफ होने वाले यौन अपराधों के लिए सजा अधिकतम 2 से 3 साल है। महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों की तुलना में यह बेहद कम है।
  • संपत्ति और विरासत का अधिकार: उत्तराधिकार कानूनों में ‘बेटा’ और ‘बेटी’ का संपत्ति पर अधिकार होता है। ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए अलग से कोई प्रावधान नहीं है। अगर उन्हें संपत्ति चाहिए तो बेटा या बेटी के तौर पर ही मिल सकता है, उनकी स्वतंत्र पहचान के आधार पर नहीं।
सेल्फ आइडेंटिफिकेशन पर सरकार के रुख से नाराज हैं ट्रांस समुदाय। Photo Credit: PTI

वे देश, जहां ट्रांसजेंडरों को मिला है उनका अधिकार

‘LGBT इक्वेलिटी इंडेक्स’ में आइसलैंड, नॉर्वे, उरुग्वे, स्पेन, डेनमार्क, माल्टा, चिली, जर्मनी, एंडोरा और क्यूबा जैसे देश, टॉप 10 उदार देशों में शुमार हैं, जहां ट्रांस सहजता से रहते हैं।

शादी का अधिकार किन देशों में है?

नीदरलैंड ने सबसे पहले समलैंगिक विवाहों को मंजूरी दी। स्पेन, बेल्जियम, नॉर्वे, स्वीडन, आइसलैंड, पुर्तगाल, डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, फिनलैंड, माल्टा, ऑस्ट्रिया, स्विट्जरलैंड, एस्टोनिया जैसे देशो में समलैंगिक विवाह को वैध माना जाता है। अमेरिका, कनाडा, संयुक्त राज्य अमेरिका, अर्जेंटीना, ब्राजील, उरुग्वे, कोलंबिया, इक्वाडोर, कोस्टा रिका, चिली, मैक्सिको और क्यूबा में भी समलैंगिक विवाह वैध माने जाते हैं। एशिया में थाइलैंड और ताइवान जैसे देशों में समलैंगिक विवाद वैध हैं। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड का भी रुख उदार है।

भारत का हाल क्या है?

सुप्रीम कोर्ट की वकील रुपाली पंवार बताती हैं, ‘भारत में समलैंगिक या ट्रांसजेंडर शादियों को कानूनी इजाजत नहीं है। अवैध भी नहीं हैं। दो वयस्क लोग एक साथ रह सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने शादी की इजाजत से जुड़ी एक याचिका पर कहा था कि इससे विरासत और संपत्ति से जुड़े कई नियम उलझ जाएंगे। कोर्ट ने समलैंगिक विवाहों पर अंतिम निर्णय सरकार पर छोड़ दिया है। भारत में अभी सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर चलने वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। बीजेपी, नैतिक रूप से समलैंगिकता का विरोध करती है। फिलहाल भारत में ट्रांस अधिकारों के लिए बड़े बदलावों की जरूरत है।’

फंस गया पेच, चाहकर भी अमेरिका के साथ समझौता क्यों नहीं कर सकता ईरान?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान के साथ अच्छी बातचीत चल रही है, जबकि ईरान किसी भी बातचीत से इनकार कर रहा है। उसका कहना है कि मित्र देश बातचीत की जमीन तैयार करने में जुटे हैं, लेकिन अभी तक कोई वार्ता नहीं हो रही है। कुछ विश्लेषकों का भी मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच अभी तक कोई प्रत्यक्ष बातचीत नहीं हुई है। मिस्र और पाकिस्तान के जरिये कुछ शुरुआती संदेश और 15 सूत्रीय युद्धविराम प्लान ही भेजा गया है।

अब सवाल उठता है कि ट्रंप की तमाम कोशिशों के बावजूद ईरान बातचीत करने को क्यों राजी नहीं हो रहा है, उसे क्या डर सता रहा है। डोनाल्ड ट्रंप का ट्रैक रिकॉर्ड कैसा है, जिससे ईरान का मौजूदा प्रशासन सतर्क है और क्यों कहा जा रहा है कि चाहकर भी अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता होने की उम्मीद न के बराबर है।

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कितनी गहरी है अविश्वास की खाई?

  • युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिका और ईरान के बीच ओमान की मध्यस्थता में वार्ता हो रही थी। ट्रंप प्रशासन ने भी बताया कि बातचीत अच्छी चल रही है। ओमान के विदेश मंत्री ने भी प्रगति का उल्लेख किया। अमेरिका ने ईरान को 12 दिनों का समय दिया। 2 मार्च को वियना में अमेरिका और ईरान के बीच तकनीकी वार्ता प्रस्तावित थी। मगर दो दिन पहले 28 फरवरी को इजरायल के साथ मिलकर अमेरिका ने बमबारी शुरू कर दी। बाद में ईरान ने कहा कि अमेरिका ने बातचीत को युद्ध की तैयारी के लिए बहाने की तरह इस्तेमाल किया।

  • अमेरिका और ईरान के बीच साल 2015 में परमाणु समझौता हुआ था। 2018 में ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में अमेरिका को एकतरफा तौर पर समझौते से अलग कर लिया। ईरान पर यूरेनियम संवर्धित करने और समझौते का पालन न करने का आरोप लगाया। तेहरान पर दबाव बनाने की रणनीति के तहत कड़े प्रतिबंधों का ऐलान कर दिया।

  • परमाणु समझौता खत्म करने के दो साल बाद डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी सेना ने बगदाद के नजदीक एक ड्रोन हमले में आईआरजीसी के मुखिया कासिम सुलेमानी की हत्या कर दी। जवाब में ईरान ने बगदाद स्थित अमेरिकी दूतावास पर मिसाइल से हमला किया और सुलेमानी की हत्या का बदला लेने की बात कही।

  • ओमान की राजधानी मस्कट में अप्रैल 2025 में ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत का नया दौर शुरू हुआ। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के बीच 13 जून तक कई दौर की बातचीत हुई। इसी रात को इजरायल ने ईरान के तीन परमाणु प्लांटों पर बमबारी शुरू कर दी। बाद में अमेरिकी सेना ने भी हमला किया। जवाब में ईरान ने कतर स्थित अमेरिकी बेस को निशाना बनाया। इजरायल और ईरान के बीच 12 दिनों तक जंग चली।

  • हमले के करीब आठ महीने बाद फरवरी 2026 में अमेरिका ने ईरान के साथ एक और दौर की बातचीत शुरू की। ओमान की मध्यस्थता में वार्ता अच्छी चल रही थी। 26 फरवरी को आखिरी बैठक हुई। 2 मार्च को जिनेवा में तकनीकी बैठक होनी थी। अमेरिका ने ईरान से परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने, बैलेस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को समाप्त करने और इजरायल को मान्यता देने की मांग रखी थी। मगर ईरान ने सभी मांगों को खारिज कर दिया था। हालांकि बातचीत अच्छी दिशा में चल रही थी। 2 मार्च को बैठक से दो दिन पहले 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल ने हमला कर दिया।
  • एक साल के भीतर दो बार मिले धोखे से ईरानी प्रशासन सतर्क है। वह फूंक फूंकर पांव रख रहा है। ईरान में बातचीत में विश्वास रखने वालों लोगों को भी अमेरिकी हमले के बाद झटका लगा है। युद्ध के माहौल में वह भी बातचीत की पहल नहीं कर सकते हैं, क्योंकि एक साल में दो बार अमेरिका उनकी सोच के विपरीत जाकर ईरान पर हमला कर चुका है।

  • अमेरिका और ईरान के बीच दुश्मनी करीब चार दशक पुरानी है। ईरान में लोगों को यह विश्वास नहीं हो रहा है कि ट्रंप की पहल पर इतनी पुरानी दुश्मनी कैसे कुछ ही घंटों में समाप्त हो जाएगी। ईरान को अमेरिका के दावों पर भरोसा नहीं है। ट्रंप की रणनीति उनके शब्दों से ठीक उलट होती है। वे अक्सर बातचीत को सैन्य तैयारी करने के लिए टूल की तरह इस्तेमाल करते हैं। यही कारण है कि ईरान को लग रहा है कि ट्रंप बातचीत की इस पहल के पीछे भी कोई सैन्य रणनीति तो नहीं बना रहे हैं।

कहां-कहां फंस रहा पेच?

ईरान का कहना है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। मगर उसका परमाणु कार्यक्रम नागरिक उद्देश्य की खातिर है। अमेरिका चाहता है कि ईरान पूरी तरह से यूरेनियम का संवर्धन रोक दे, लेकिन ईरान को यह शर्त मंजूर नहीं है। उसका कहना है कि यूरेनियम संवर्धन करना उसका अधिकार है। ट्रंप ईरान के बैलेस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को पूरी तरह से रोकना चाहते हैं। ईरान को यह भी स्वीकार नहीं है। ट्रंप का दावा है कि ईरान युद्ध हार चुका है। वे चाहते हैं कि ईरान सरकार उनके सामने आत्मसमर्पण करे, लेकिन यह भी तेहरान को मंजूर नहीं है। ईरान का कहना है कि युद्ध अब उसकी मर्जी से खत्म होगा।

डोनाल्ड ट्रंप के 15 सूत्रीय प्रस्ताव के जवाब में ईरान ने पांच मांगें अमेरिका को भेजी हैं। उसकी मांग है कि ईरान पर हमला और सियासी हत्याओं पर रोक लगे। ईरान पर दोबारा हमला न हो, इसके खातिर एक तंत्र बनाया जाए। युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई हो। लेबनान में हिजबुल्लाह, गाजा में हमास और यमन में हूती के खिलाफ युद्ध रोका जाए। होर्मुज की खाड़ी पर ईरान के अधिकार को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिले। जैसे ईरान को अमेरिका की मांगें मंजूर नहीं, वैसे अमेरिका भी चाहकर ईरान की मांगों को नहीं मान सकता है।

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19 मार्च को सऊदी अरब की राजधानी रियाद में पाकिस्तान, मिस्र, तुर्की और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों ने बैठक की। इसमें युद्ध को खत्म करने के कूटनीतिक रास्तों पर बातचीत हुई। दो दिन पहले ही इजरायल ने हमले में ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी को मार दिया। ऐसे में रियाद में बैठक करने वाले देशों के सामने यह संकट खड़ा हो गया कि वह अब ईरान में बातचीत किससे करें, क्योंकि अमेरिका के साथ बातचीत में लारीजानी भूमिका अहम थी।

अमेरिकी हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के पिता के अलावा कई करीबियों की जान जा चुकी है। ऐसे हालात में उनका अमेरिका के साथ बातचीत के टेबल पर आना बेहद मुश्किल है। आईआरजीसी जैसे धार्मिक सैन्य संगठन में इसका गलत संदेश जाएगा। ईरान में कट्टरपंथियों में नाराजगी बढ़ सकती है और मोजतबा की पकड़ कमजोर होगी। उन्हें अपनी पकड़ मजबूत बनाने की खातिर अपने पिता की तरह ही प्रतिशोध की आवाज को बुलंदी से उठाना पड़ेगा। इन तथ्यों के आधार पर विश्लेषकों को लगता है कि अमेरिका के साथ ईरान का हाल फिरहाल कोई समझौता होता नहीं दिख रहा है।

रामनवमी पर मां सिद्धिदात्री की कृपा से किसकी किस्मत बदलेगी?

27 मार्च 2026, शुक्रवार का दिन चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के प्रभाव में रहेगा, जिसे ‘राम नवमी’ के पावन पर्व के रूप में मनाया जाएगा। आज का मूलांक 9 है, जिसके स्वामी मंगल देव हैं, जो अदम्य साहस, ऊर्जा और अनुशासन का प्रतीक माने जाते हैं। ग्रहों की चाल पर दृष्टि डालें तो चंद्रमा आज बुध की राशि मिथुन में गोचर करेंगे, जिससे बौद्धिक संवाद और तर्कशक्ति में प्रखरता आएगी। सूर्य और बुध का मीन राशि में होना और शुक्र का अपनी अनुकूल स्थिति में होना आज के दिन को भक्ति, प्रेम और आध्यात्मिक विजय की ऊर्जा से ओतप्रोत बना रहा है।

आज की समग्र ऊर्जा अत्यंत शुभ और संकल्पों को सिद्ध करने वाली है। शुक्रवार और मूलांक 9 का संयोग भौतिक सुखों के साथ-साथ कठिन कार्यों को पूरा करने का बल प्रदान करेगा। राम नवमी का अवसर होने के कारण आज मर्यादा और आदर्शों पर चलने की प्रेरणा मिलेगी, जो व्यक्तिगत संबंधों को सुधारने में सहायक होगी। मिथुन राशि का चंद्रमा आज नेटवर्किंग, लेखन और मीडिया से जुड़े जातकों के लिए सफलता के नए द्वार खोलेगा। यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए प्रगतिशील है जो समाज सेवा, राजनीति या रक्षा क्षेत्र से जुड़े हैं। आइए जानते हैं मेष से लेकर मीन तक सभी 12 राशियों के लिए आज का दिन कैसा रहने वाला है।

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मेष

आज आप नई ऊर्जा और उत्साह का अनुभव करेंगे। कार्यक्षेत्र में आपकी योजनाओं को वरिष्ठों का समर्थन मिलेगा। व्यापार में नए अनुबंधों से भविष्य में लाभ होगा। धन लाभ के प्रबल योग हैं, निवेश के लिए दिन बहुत शुभ है। परिवार में मांगलिक उत्सव का माहौल रहेगा। जीवनसाथी के साथ संबंधों में मधुरता आएगी। सेहत अच्छी रहेगी, लेकिन जोश में आकर शारीरिक क्षमता से अधिक कार्य न करें।
आज क्या करें: श्री राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करें।
आज क्या न करें: किसी भी व्यक्ति पर अनावश्यक क्रोध न करें।

वृषभ

आज आपका ध्यान संचय और पारिवारिक सुखों पर केंद्रित रहेगा। व्यापार में स्थिरता बनी रहेगी। नौकरीपेशा लोगों को आज काम के सिलसिले में छोटी यात्रा करनी पड़ सकती है। धन का आगमन होगा लेकिन विलासिता की वस्तुओं पर खर्च बढ़ सकता है। रिश्तेदारों से कोई शुभ समाचार मिल सकता है। वाणी में कोमलता बनाए रखें। गले या दांतों से जुड़ी हल्की समस्या हो सकती है।
आज क्या करें: कन्याओं को खीर का प्रसाद बांटें।
आज क्या न करें: आज किसी को उधार देने से बचें।

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मिथुन

चंद्रमा आपकी ही राशि में होने से आज आप काफी सक्रिय और प्रभावशाली रहेंगे। संचार कौशल से आप बड़े सौदे हासिल कर सकते हैं। कार्यस्थल पर आपकी रचनात्मकता की सराहना होगी। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, नए निवेश के अवसर मिलेंगे। प्रेम संबंधों के लिए दिन अनुकूल है। मित्रों के साथ शाम सुखद बीतेगी। मानसिक शांति के लिए योग करें, त्वचा का ध्यान रखें।
आज क्या करें: गणेश जी को दूर्वा अर्पित करें।
आज क्या न करें: किसी के साथ झूठा वादा न करें।

कर्क

आज का दिन मिश्रित फलदायी रहने वाला है। कार्यक्षेत्र में काम का दबाव अधिक रहेगा। व्यापार में कोई भी निर्णय जल्दबाजी में न लें। खर्चों की अधिकता मन को चिंतित कर सकती है। बजट का पालन करना अनिवार्य है। परिवार के बड़ों की सलाह को नजरअंदाज न करें। पार्टनर के साथ गलतफहमी हो सकती है। आंखों में थकान या अनिद्रा की समस्या हो सकती है।
आज क्या करें: शिवलिंग पर जल अर्पित करें।
आज क्या न करें: देर रात तक जागने और ठंडे खान-पान से बचें।

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सिंह

आज आपकी इच्छाओं की पूर्ति का दिन है। कार्यक्षेत्र में आपकी नेतृत्व क्षमता चमकेगी। व्यापारियों को आज बड़ा मुनाफा होने की उम्मीद है। आर्थिक स्थिति: आय के नए स्रोत बनेंगे। पुराने अटके हुए पैसे वापस मिल सकते हैं। प्रेम और परिवार: सामाजिक दायरे में आपकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी। अविवाहितों के लिए विवाह के प्रस्ताव आ सकते हैं। स्वास्थ्य: आप खुद को ऊर्जावान और स्वस्थ महसूस करेंगे।

आज क्या करें: उगते सूर्य को जल चढ़ाएं और ‘राम’ नाम का जप करें।

आज क्या न करें: अहंकार में आकर किसी को सलाह न दें।

कन्या

आज आपका पूरा फोकस अपने करियर और सामाजिक छवि पर रहेगा। नौकरी में पदोन्नति या नई जिम्मेदारी मिल सकती है। व्यापार में तकनीकी बदलाव लाभकारी रहेंगे। धन की स्थिति मजबूत रहेगी। संपत्ति में निवेश की योजना बन सकती है। पिता के साथ संबंध बेहतर होंगे। दांपत्य जीवन में खुशहाली रहेगी। पैरों में दर्द या थकान महसूस हो सकती है, मालिश करवाएं।
आज क्या करें: गाय को हरा चारा या गुड़ खिलाएं।
आज क्या न करें: महत्वपूर्ण कार्यों में लापरवाही न बरतें।

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तुला

आज भाग्य की मदद से आपके रुके हुए काम गति पकड़ेंगे। उच्च शिक्षा से जुड़े लोगों को सफलता मिलेगी। व्यापार में लंबी दूरी की यात्राएं लाभदायक रहेंगी। भाग्यवश धन लाभ होगा। धार्मिक कार्यों में धन खर्च हो सकता है। परिवार के साथ किसी तीर्थ यात्रा की योजना बन सकती है। रिश्तों में प्रगाढ़ता आएगी। सेहत अच्छी रहेगी, पुरानी किसी बीमारी से राहत मिल सकती है।
आज क्या करें: मंदिर में पीले रंग की मिठाई का दान करें।
आज क्या न करें: आज किसी की बुराई न करें।

वृश्चिक

आज का दिन थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है, धैर्य बनाए रखें। कार्यस्थल पर विरोधियों से सावधान रहें। व्यापारिक निर्णयों में किसी विशेषज्ञ की सलाह लें। धन के लेन-देन में सावधानी बरतें। अचानक कोई खर्च सामने आ सकता है। अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें, छोटे भाई-बहनों से अनबन हो सकती है। स्वास्थ्य: वाहन चलाते समय विशेष सतर्क रहें, चोट की आशंका है।
आज क्या करें: हनुमान चालीसा का पाठ करें।
आज क्या न करें: आज कोई नया काम शुरू न करें।

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धनु

साझेदारी और वैवाहिक जीवन के लिए आज का दिन श्रेष्ठ है। नए बिजनेस पार्टनर मिल सकते हैं। टीम वर्क से कठिन कार्य भी आसानी से पूरे होंगे। आय स्थिर रहेगी, भविष्य की बचत के लिए निवेश कर सकते हैं।जीवनसाथी के साथ भावनात्मक जुड़ाव बढ़ेगा। घर का माहौल सुखद रहेगा। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा, लेकिन जोड़ों के दर्द का ध्यान रखें।
आज क्या करें: श्री राम दरबार की आरती करें।
आज क्या न करें: पार्टनर पर शक करने से बचें।

मकर

आज आप अपनी मेहनत और अनुशासन से सफलता प्राप्त करेंगे। कार्यस्थल पर काम की अधिकता रहेगी, लेकिन आप उसे समय पर पूरा कर लेंगे। कानूनी मामलों में पक्ष मजबूत होगा। धन की स्थिति सामान्य रहेगी। अनावश्यक खरीदारी से बचें। ननिहाल पक्ष से कोई शुभ समाचार मिल सकता है। बच्चों की प्रगति से प्रसन्नता होगी। पाचन तंत्र का ख्याल रखें, बाहर का खाना न खाएं।
आज क्या करें: असहाय लोगों को भोजन कराएं।
आज क्या न करें: आलस्य को अपने ऊपर हावी न होने दें।

कुंभ

आज का दिन आपकी रचनात्मकता और बुद्धिमत्ता को प्रदर्शित करने का है। नए प्रोजेक्ट्स शुरू करने के लिए दिन अच्छा है। शेयर मार्केट और सट्टेबाजी से बचें। आर्थिक लाभ के अवसर मिलेंगे। नया वाहन खरीदने का मन बना सकते हैं। प्रेम संबंधों में नयापन आएगा। मित्रों का पूरा सहयोग प्राप्त होगा। मानसिक रूप से फ्रेश रहने के लिए भरपूर पानी पिएं।
आज क्या करें: शनि चालीसा का पाठ करें।
आज क्या न करें: घर के बड़ों की सलाह को अनसुना न करें।

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मीन

आज आप घरेलू सुख-शांति और माता-पिता की सेवा में समय बिताएंगे। कार्यस्थल पर किसी से बहस न करें। व्यापार में कागजी कार्रवाई को लेकर सतर्क रहें। सुख-सुविधाओं पर धन खर्च होगा। निवेश के लिए विशेषज्ञ की राय लें। घर में शांति बनी रहेगी। पुरानी यादें ताजा हो सकती हैं। छाती में जकड़न या सर्दी-जुकाम की संभावना है, सावधानी बरतें।
आज क्या करें: ‘ॐ राम रामाय नमः’ का जप करें।
आज क्या न करें: भ्रम की स्थिति में कोई बड़ा निवेश न करें।

डिस्क्लेमर: यह राशिफल सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। व्यक्तिगत जानकारी के लिए ज्योतिषी से संपर्क करें।

पेट्रोल-डीजल की कमी की अफवाह:जमुनहा में पंपों पर लंबी कतारें, जरीकेन में बिक्री पर लगी रोक


श्रावस्ती जिले के जमुनहा ब्लॉक क्षेत्र में गुरुवार सुबह पेट्रोल पंपों पर अचानक भारी भीड़ उमड़ पड़ी। पेट्रोल-डीजल की कमी की अफवाह फैलने के बाद लोग घबराकर अपने वाहनों में ईंधन भरवाने के लिए पहुंचने लगे, जिससे लंबी कतारें लग गईं। स्थानीय लोगों के अनुसार, सोशल मीडिया पर पेट्रोल और डीजल खत्म होने की खबर तेजी से फैली। इसके बाद मोटरसाइकिल, कार और अन्य वाहनों की भीड़ पेट्रोल पंपों पर जुट गई, जिससे कई स्थानों पर अव्यवस्था की स्थिति बन गई। एक पेट्रोल पंप संचालक विनोद गुप्ता ने बताया कि अचानक अत्यधिक भीड़ उमड़ने के कारण पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति सुचारु रूप से नहीं हो पा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईंधन की कोई कमी नहीं है, लेकिन एक साथ ज्यादा लोगों के पहुंचने से परेशानी हो रही है। वहीं, जिला पूर्ति अधिकारी दीपक ने सभी पेट्रोल पंप संचालकों को निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को जरीकेन, बोतल या अन्य डिब्बों में पेट्रोल-डीजल देने की अनुमति नहीं है। आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधित पेट्रोल पंप संचालक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और अनावश्यक रूप से पेट्रोल पंपों पर भीड़ न लगाएं। प्रशासन ने स्थिति सामान्य होने का आश्वासन दिया है।

सिद्धार्थनगर में सड़क हादसे में दो युवक घायल:डुमरियागंज में बोलेरो से बाइक की टक्कर, बस्ती रेफर


सिद्धार्थनगर जिले के डुमरियागंज क्षेत्र में गुरुवार को एक सड़क हादसे में दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद बस्ती अस्पताल रेफर किया गया है। घायलों की पहचान इटवा थाना क्षेत्र के बिड़रा गांव निवासी मोहम्मद नफीस (20 वर्ष), पुत्र तज्जार हुसैन, और मोहम्मद एजाज (21 वर्ष) के रूप में हुई है। दोनों युवक अपनी बाइक में पेट्रोल डलवाने के लिए डुमरियागंज जा रहे थे। यह हादसा डुमरियागंज स्थित अग्रहरि मैरिज हॉल के पास हुआ। बताया जा रहा है कि सामने से आ रही एक बोलेरो गाड़ी से उनकी बाइक की आमने-सामने जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों युवक सड़क पर गिरकर बुरी तरह घायल हो गए। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोग तुरंत सहायता के लिए पहुंचे। घायलों को तत्काल बेदोला स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए बस्ती अस्पताल रेफर कर दिया।

पेट्रोल-डीजल किल्लत की अफवाह: पंपों पर उमड़ी भीड़:प्रशासन ने कहा- आपूर्ति सामान्य, अफवाहों पर ध्यान न दें


श्रीदत्तगंज क्षेत्र में पेट्रोल और डीजल की किल्लत की आशंका के चलते बुधवार को पेट्रोल पंपों पर वाहनों की लंबी कतारें देखी गईं। महदेइया बाजार और शुक्लागंज बाजार सहित आसपास के पंपों पर सुबह से ही ईंधन भरवाने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ा। इस स्थिति से आवागमन और दैनिक कार्य प्रभावित हुए। स्थानीय लोगों ने समय पर ईंधन न मिलने से दिनचर्या बाधित होने की शिकायत की। गेहूं की फसल की कटाई और मड़ाई का समय नजदीक होने के कारण किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। किल्लत की आशंका के चलते लोग अपने वाहनों की टंकियां फुल कराने के साथ-साथ गैलन और डिब्बों में भी डीजल का भंडारण करने लगे, जिससे पंपों पर भीड़ और बढ़ गई। पेट्रोल पंप संचालकों के अनुसार, अफवाहों के कारण सामान्य से अधिक मात्रा में ईंधन की मांग हो रही है, जिससे आपूर्ति बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो रहा है। प्रशासन ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा है कि जनपद में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है। जिला पूर्ति अधिकारी के अनुसार, आईओसीएल, बीपीसीएल, एचपीसीएल और रिलायंस सहित सभी तेल कंपनियों के सेल्स अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, सभी पेट्रोल पंपों पर ईंधन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है और आपूर्ति सुचारू रूप से जारी है। प्रशासन ने बताया कि अफवाहों के कारण कुछ लोग अनावश्यक रूप से गैलन और डिब्बों में पेट्रोल-डीजल लेने के लिए पंपों पर पहुंच रहे हैं, जिससे अस्थायी रूप से भीड़ हो रही है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सभी 88 पेट्रोल पंप संचालकों को गैलन या डिब्बों में ईंधन बिक्री न करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, बिना हेलमेट दोपहिया चालकों को पेट्रोल न देने के भी निर्देश जारी किए गए हैं। प्रशासन ने जनसामान्य से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और आवश्यकता के अनुसार ही अपने वाहनों में ईंधन भरवाएं, ताकि सभी को सुचारू रूप से सुविधा मिल सके।

सोनबरसा प्राथमिक विद्यालय के पास कूड़े का ढेर:सफाई न होने से ग्रामीण नाराज, संक्रामक बीमारियों का खतरा


महराजगंज जनपद के ग्राम सभा सोनबरसा में प्राथमिक विद्यालय के पास कूड़े का ढेर लगा हुआ है। इससे स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है और बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। विद्यालय के आसपास फैली गंदगी और दुर्गंध के कारण छात्रों को परेशानी हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यहां से गुजरने वाले लोगों को भी बदबू के कारण सांस लेने में दिक्कत होती है। गांव के लोगों के अनुसार, इस स्थान पर लंबे समय से कूड़ा फेंका जा रहा है। संबंधित विभाग इस समस्या को लेकर उदासीन बना हुआ है। गंदगी के कारण मच्छरों और मक्खियों की संख्या बढ़ गई है, जिससे संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है। ग्राम सभा निवासी जगतार, सतन, धर्मेंद्र और इजहार सहित अन्य ग्रामीणों ने इस स्थिति पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने प्रशासन से जल्द से जल्द कूड़े का निस्तारण कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे। फिलहाल, जिम्मेदार विभाग की अनदेखी के चलते ग्रामीणों को गंदगी के बीच जीवन यापन करना पड़ रहा है।

ABVP ने मुंडेरवा में लगाया निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर:200 से अधिक लोगों ने उठाया लाभ, विशेषज्ञ डॉक्टरों ने दी सेवा


बस्ती के मुंडेरवा में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की नगर इकाई ने एक निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया। महर्षि वशिष्ठ स्वशासी राज्य महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज) के सहयोग से आयोजित इस शिविर में 200 से अधिक लोगों ने स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया। इसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करना और उन्हें स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना था। शिविर में गोरक्ष प्रांत मेडिविजन के प्रांत प्रमुख डॉ. आनंद बिहारी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उनके मार्गदर्शन में कार्यक्रम का संचालन सुव्यवस्थित ढंग से किया गया। इस दौरान विशेषज्ञ चिकित्सकों की एक टीम ने मरीजों का निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यक परामर्श प्रदान किया। शिविर में डॉ. राजेश पांडेय (कान, नाक, गला रोग विशेषज्ञ), डॉ. रोहित शाही (नेत्र रोग विशेषज्ञ), डॉ. अखिलेश त्रिपाठी (समुदाय चिकित्सा विशेषज्ञ), डॉ. आनंद बिहारी (समुदाय चिकित्सा विशेषज्ञ) और डॉ. के. विवेकानंद (जैव रसायन विशेषज्ञ) ने अपनी सेवाएं दीं। इन चिकित्सकों ने मरीजों की जांच कर उन्हें उचित उपचार और सलाह प्रदान की। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोगों ने इस शिविर में भाग लिया। विशेष रूप से नेत्र, ईएनटी (कान, नाक, गला) और सामान्य स्वास्थ्य जांच को लेकर लोगों में उत्साह देखा गया। कई मरीजों को पहली बार विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श मिला, जिससे उन्हें अपनी स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान में मदद मिली। इस अवसर पर डॉ. आनंद बिहारी ने कहा कि “स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है।” उन्होंने जोर दिया कि विद्यार्थी परिषद केवल छात्र हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में परिषद के कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वयंसेवकों ने पंजीकरण, व्यवस्था और मरीजों के मार्गदर्शन का कार्य अनुशासित तरीके से संभाला। ABVP बस्ती ने इस आयोजन के माध्यम से समाज सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है और भविष्य में भी ऐसे जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के आयोजन का संकल्प व्यक्त किया है।
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बहराइच में प्रभारी मंत्री ने विकास पुस्तिका का विमोचन किया:प्रदेश सरकार की 9 वर्ष की उपलब्धियों की जानकारी दी


बहराइच में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के नवनिर्माण के 9 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह के अंतिम दिन, जिले के प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने ‘प्रदेश सरकार की 9 वर्ष की उपलब्धियों’ पर आधारित पुस्तिका का विमोचन किया। यह कार्यक्रम कलेक्ट्रेट सभागार में संपन्न हुआ। इस अवसर पर विधायक सुभाष त्रिपाठी, अनुपमा जायसवाल, राम निवास वर्मा, एमएलसी डॉ. प्रज्ञा त्रिपाठी, पूर्व सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष बृजेश पाण्डेय, अपना दल के जिलाध्यक्ष गिरीश पटेल, विधायक बलहा सरोज सोनकर के प्रतिनिधि आलोक जिंदल सहित अन्य जनप्रतिनिधि, पार्टी पदाधिकारी, जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी, पुलिस अधीक्षक राम नयन सिंह और मुख्य विकास अधिकारी मुकेश चन्द्र मौजूद रहे। प्रदेशवासियों का आभार व्यक्त इस दौरान, मंत्री शाही ने उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता की सेवा के संकल्प के 9 वर्ष पूरे होने पर प्रदेशवासियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के साथ सुरक्षा, सुशासन और विकास की नई यात्रा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व ने उत्तर प्रदेश को नए भारत के नए उत्तर प्रदेश के रूप में देश के सामने एक मॉडल के तौर पर उभारा है। शाही ने बताया कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था में गुणात्मक वृद्धि हुई है और प्रदेशवासियों की आय में तीन गुना बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2029-30 तक उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। राज्य बनने की ऐतिहासिक यात्रा प्रभारी मंत्री ने आगे कहा कि बीते 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश ने अराजकता से व्यवस्था, निराशा से विश्वास और बीमारू राज्य से विकासशील राज्य बनने की ऐतिहासिक यात्रा तय की है। उन्होंने जोर दिया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्णायक, पारदर्शी और परिणामोन्मुखी नेतृत्व के कारण आज पूरा देश उत्तर प्रदेश को देख रहा है, सीख रहा है और प्रेरणा ले रहा है। कानून का राज, पारदर्शी नीति और प्रशासन, तथा अंतिम व्यक्ति तक लाभ की गारंटी के कारण उत्तर प्रदेश अब केवल घोषणाओं का नहीं, बल्कि परिणामों का प्रदेश बन गया है।