आज देशभर में महाशिवरात्रि का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष का महत्व होता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की शादी हुई थी। साल भर में 12 शिवरात्रियां आती हैं लेकिन महाशिवरात्रि को सबसे ज्यादा विशेष माना जाता है। शिवरात्रि के दिन भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए लोग उपवास करते हैं। कुछ लोग फलाहार करते हैं तो कुछ निर्जला भी इस व्रत को करते हैं। शिवरात्रि के दिन सुबह से ही शिवालयों में भक्तों की भीड़ लग जाती हैं।
इस दिन सुबह-सुबह भगवान शिव की पूजा की जाती है। अगर आप सुबह के समय में पूजा नहीं कर पाएं हैं तो शाम के समय में भी पूजा कर सकते हैं। भगवान शिव की पूजा शाम के समय में भी होता है। आइए जानते हैं शाम के समय में भगवान शिव की पूजा कैसे करनी है?
सूरज डूबने से पहले स्नान कर लेना चाहिए। इसके बाद शरीर के ऊपर थोड़ा सा गंगाजल छिड़क लें और फिर भगवान शिव पर जल अभिषेक करें। इसके बाद चंदन का लेप लगाएं, बेलपत्र अर्पित करें, सफेद फूल और धतूरा चढ़ाएं। इसके बाद भगवान शिव की चलीसा पढ़ें और आरती करें। भगवान शिव को खीर, फल और मिठाई का भोग लगाएं। उसके बाद प्रसाद को अपने आसपास के लोगों में बांट दें।
शिवरात्रि का महत्व खास क्यों है?
हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इस दिन लोग सुबह-सुबह उठकर मंदिर जाते हैं। भगवान को शिवलिंग पर जल, दूध, घी, बेलपत्र, धतूरा, भांग, फल- फूल और मिठाई अर्पित किया जाता है। भगवान शिव का ऊं नम शिवाय का जाप करते हैं, चलीसा पढ़ते हैं और आरती करते हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरानी हमलों से अमेरिका बेहद परेशान हैं। खाड़ी के कई देशों ने तेल उत्पादन रोक दिया है। वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही न होने से दुनियाभर में ऊर्जा संकट खड़ा गया है। कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति डॉलर के ऊपर पहुंच चुकी है। अमेरिका अब ईरान पर हर तरह का दबाव डाल रहा है, ताकि स्ट्रेट को खुलवाया जा सके।
वहीं ईरान इसे बंद करके अमेरिका पर युद्ध रोकने का दबाव बना रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अब चीन, जापान और ब्रिटेन जैसे देशों से उम्मीद है। उनका मानना है कि यह देश अपने जहाजों को भेजेंगे, ताकि स्ट्रेट को खुला रखा जा सके।
डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को अपने ट्रुथ सोशल पर लिखा, ‘कई वह देश जो ईरान के होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने करने के प्रयास से प्रभावित हैं, वह अमेरिका के साथ स्ट्रेट को खुला और सुरक्षित रखने के लिए युद्धपोत भेजेंगे।’
ट्रंप ने आगे दावा किया, ‘हमने ईरान की 100 फीसद सैन्य क्षमता को पहले ही नष्ट कर दिया है। मगर एक-दो ड्रोन भेजना, कोई माइन गिराना या इस जलमार्ग के आस-पास और इसके अंदर कहीं भी कम दूरी की मिसाइल दागना आसान उनके लिए आसान हैं, भले ही वे कितनी भी बुरी तरह हार चुके हों।’ ट्रंप का यह बयान साबित करता है कि होर्मुज स्ट्रेट में ईरान अब भी बड़ी ताकत है। वह चाहे तो स्ट्रेट के यातायात को प्रभावित कर सकता है।
ट्रंप ने अपनी पोस्ट में उम्मीद जताई कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, यूनाइटेड किंगडम समेत अन्य देश इस इलाके में अपने जहाज भेजेंगे, ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य अब उस देश का कोई खतरा न रहे, जिसकी सैन्य शक्ति पूरी तरह से खत्म हो चुकी है। ट्रंप ने आगे धमकी दी अमेरिका ईरान के तट पर बमबारी करता रहेगा। ईरानी नावों और जहाजों को पानी में तबाह किया जाएगा। किसी भी तरह हम जल्द ही होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला, सुरक्षित और आजाद करवा लेंगे।
सुनहरे भविष्य और बेहतर कमाई की तलाश में खाड़ी देशों का रुख करने वाले हजारों भारतीयों के लिए परदेस की राह आसान साबित नहीं हो रही है। विदेश मंत्रालय द्वारा संसद में पेश किए गए चौंकाने वाले आंकड़ों के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र के विभिन्न देशों में इस समय कुल 5,548 भारतीय सलाखों के पीछे हैं। इनमें विचाराधीन कैदी और सजा काट रहे अपराधी दोनों शामिल हैं। यह स्थिति उन युवाओं के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो बिना पूरी जानकारी और कानूनी समझ के विदेश चले जाते हैं।
दरअसल, यह आंकड़े तब सामने आए जब कैराना लोकसभा क्षेत्र से सांसद इकरा चौधरी ने विदेश मंत्रालय से उन युवाओं के बारे में सवाल पूछे जो उत्तर प्रदेश से खाड़ी देशों में काम करने गए थे। विशेष रूप से उन्होंने उत्तर प्रदेश के उन युवाओं के संबंध में सवाल उठाए जो इस समय खाड़ी देशों की जेलों में फंसे हुए हैं।
इन सवालों का जवाब 13 मार्च को दिया गया। हालांकि, अपने जवाब में मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश के कैदियों के बारे में विशेष रूप से जानकारी देने के बजाय भारतीय कैदियों के आंकड़े पेश किए।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार खाड़ी देशों में भारतीय कैदियों की सबसे ज्यादा संख्या सऊदी अरब में दर्ज की गई है। यहां 2,478 भारतीय जेलों में बंद हैं। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात में 1,419, कतर में 870, कुवैत में 379, बहरीन में 303 और ओमान में 99 भारतीय कैदी दर्ज किए गए हैं। ये आंकड़े 31 दिसंबर 2025 तक के आधिकारिक रिकॉर्ड पर आधारित हैं।
क्या हैं इनके अपराध?
दस्तावेज में यह नहीं बताया गया कि ये कैदी किस-किस अपराध के कारण जेल में हैं। इसमें सिर्फ यह कहा गया है कि ये विचारणाधीन और दोषसिद्ध दोनों तरह के कैदी हैं। कुछ मामलों में भर्ती एजेंटों की धोखाधड़ी और मादक पदार्थ से जुड़े आरोप का जिक्र उदाहरण के तौर पर किया गया है। हालांकि, ऐसे कई अपराध हैं जिनके बारे में इन भारतीय कैदियों के संदर्भ में अक्सर सुनने को मिलता है।
खाड़ी देशों में भारतीयों के जेल जाने के पीछे कई कारण सामने आते हैं। इनमें सबसे आम वजह वीजा और रेजिडेंसी नियमों का उल्लंघन है। कई लोग टूरिस्ट वीजा पर जाकर वहीं नौकरी तलाशने लगते हैं या वीजा खत्म होने के बाद भी देश में रह जाते हैं, जो वहां गंभीर अपराध माना जाता है।
इसके अलावा ड्रग्स और शराब से जुड़े अपराध भी बड़ी वजह हैं। खासकर सऊदी अरब में शराब का सेवन, निर्माण या बिक्री सख्त रूप से प्रतिबंधित है और नशीले पदार्थों के मामलों में बेहद कड़ी सजा का प्रावधान है।
इसके अलावा, कई लोग ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने, बिना परमिट के सामान बेचने या कर्ज न चुका पाने जैसे अपराधों के कारण जेल पहुंच जाते हैं। वहीं दूसरी ओर, कई भारतीय जो फर्जी एजेंटों की चाल में फंसकर विदेश जाते हैं, बाद में वे कानूनी पचड़ों में उलझ जाते हैं और अंततः उन्हें जेल की सजा काटनी पड़ती है।
हमारे खराब लाइफस्टाइल और खानपान का असर हमारे बालों पर भी दिखता है। इस वजह से बाल रुखे और बेजान नजर आते हैं। बालों को स्वस्थ और फ्रीज फ्री रखने के लिए एसेंशियल ऑयल की मदद लें सकते हैं। एसेंशियल ऑयल से बालों को पोषण मिलता है। साथ ही ग्रोथ को बढ़ाने का काम करता है। आपने अक्सर सुना होगा कि बालों के लिए रोजमेरी ऑयल और टी ट्री ऑयल अच्छा होता है। ये दोनों तेल बालों की ग्रोथ और डैंड्रफ से छुटकारा पाने में मदद करते हैं। आइए जानते हैं इन दोनों तेलों में से कौन सा बालों के लिए ज्यादा फायदेमंद होता है।
बालों की ग्रोथ ब्लड फलो, हार्मोन, कैसा खानपान है और हमारे जीन्स कैसे हैं? इन सभी बातों पर निर्भर करता है। रोजमेरी या टी ट्री ऑयल आपके बालों को रातोंरात नहीं उगाता है। ये दोनों चीजें आपके स्कैल्प से जुड़ी समस्याओं को ठीक करती हैं ताकि बालों की ग्रोथ अच्छी हो सकें।
रोजमेरी का तेल बालों के लिए बहुत अच्छा होता है। यह बालों के अच्छा होता है। यह तेल आपके स्कैल्प में ब्लड फ्लो को बढ़ाने का काम करता है ताकि ऑक्सीजन और पोषण जड़ों तक पहुंचता है। पतले बाल और बाल झड़ने की समस्या को कम करने में मदद करता है। कुछ अध्ययनों में कहा गया कि रोजमेरी मिनोक्सिडिल की तरह काम करता है। बालों की ग्रोथ बढ़ती है। बाल झड़ने और टूटने की समस्या को रोकता है। जो लोग पहले से गंजेपन की समस्या से गुजर रहे हैं। उनकी समस्या को ठीक नहीं हो सकती है।
टी ट्री ऑयल
टी ट्री ऑयल बैक्टीरिया और फंगस की समस्या को खत्म करने का काम करता है। यह डैंड्रफ और स्कैल्प में संक्रमण के खतरे को कम करता है। साफ स्कैल्प बालों को बेहतर तरीके से उगने में मदद करता है। इसके अलावा जिनको खुजली की समस्या रहती है उन्हें टी ट्री ऑयल का इस्तेमाल करना चाहिए।
रोजमेरी और टी ट्री में क्या अंतर है?
रोजमेरी ऑयल बालों की ग्रोथ में मदद करता है। वहीं, टी ट्री ऑयल बालों के स्कैल्प को साफ रखता है। दोनों के अपने-अपने काम है।
इन तेलों को इस्तेमाल कैसे करना है
आपको सीधा इन तेलों को बाल में नहीं लगाना है। आपको सबसे पहले 2 चम्मच नारियल तेल या बादाम का तेल लेना है। उसमें 4 से 5 बूंदें रोजेमरी और 3 से 4 बूंदे टी ट्री ऑयल के डालने है। अपने स्कैल्प में लगाकर मसाज करें। तेल लगाने के बाद एक या दो घंटे को छोड़ दें। इसके बाद शैंपू लगाकर बाल धो लें।
ज्योतिषीय दृष्टि से आज का दिन यानी 16 फरवरी(सोमवार) काफी गहरा और प्रभावशाली है। फाल्गुन मास की चतुर्दशी तिथि के साथ चंद्रमा का मकर राशि में होना यह संकेत देता है कि आज का पूरा दिन अनुशासन, जिम्मेदारी और अपनी इच्छाओं को पूरा करने पर केंद्रित रहेगा। वहीं आज का मूलांक 7 है, जिसका स्वामी केतु को माना जाता है।
केतु का प्रभाव व्यक्ति को गहराई से सोचने के लिए मजबूर करता है। ऐसे में आज उन लोगों को विशेष फायदा मिलेगा जो रिसर्च, योग या किसी भी तरह के मानसिक और आंतरिक विकास के कामों से जुड़े हैं। आइए जानते हैं आपकी राशि के सितारों का आज क्या हाल है-
आज आप ऊर्जा से लबरेज रहेंगे। ऑफिस में नई जिम्मेदारी मिल सकती है।
क्या करें: बस ध्यान रखें कि कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले घर के बड़ों की सलाह जरूर लें। क्या न करें: गुस्सा और जल्दबाजी में निवेश करने से बचें।
वृषभ
पैसों के मामले में आज दिन बढ़िया है। बिजनेस में कुछ अच्छे बदलाव देख सकते हैं।
क्या करें: पुराने निवेश को एक बार चेक करें, फायदा मिल सकता है। क्या न करें: फालतू की बहस और खर्चों से दूरी बनाकर रखें।
मिथुन
अगर आप पढ़ाई या नौकरी के लिए कोशिश कर रहे हैं, तो आज अच्छी खबर मिल सकती है। क्या करें: अपनी स्किल्स बढ़ाने पर ध्यान दें। क्या न करें: गपशप में समय बर्बाद न करें और सफर के दौरान सतर्क रहें।
कर्क
आज घर-परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा। सेहत में भी सुधार दिखेगा। क्या करें: खान-पान पर थोड़ा कंट्रोल रखें। क्या न करें: भावनाओं में बहकर कोई निर्णय न लें।
सिंह
आपकी लीडरशिप क्वालिटी की आज तारीफ होगी। नए प्रोजेक्ट्स शुरू करने के लिए दिन अच्छा है। क्या करें: अपनी सेहत का नियमित चेकअप कराते रहें। क्या न करें: अपने भीतर अहंकार न आने दें।
कन्या
आज आपकी सोचने-समझने की क्षमता आपको बड़ा फायदा दिलाएगी। नौकरी में प्रमोशन की संभावना है। क्या करें: अपनी बचत और रूटीन को सुधारने पर काम करें। क्या न करें: फिजूल की चिंता न करें।
तुला
रिश्तों और व्यापार के लिए आज का दिन संतुलन भरा रहेगा। क्या करें: पार्टनरशिप में काम करना फायदेमंद होगा। क्या न करें: ज्यादा मीठा खाने से बचें और किसी भी काम को टालें नहीं।
वृश्चिक
आज आपको रिसर्च या गुप्त ज्ञान से लाभ मिल सकता है। क्या करें: निवेश के लिए समय अच्छा है। क्या न करें: मन में शक न पालें और जोखिम भरे कामों या खेलों से खुद को दूर रखें।
धनु
यात्रा के शौकीन लोगों के लिए आज प्रोग्रेस का दिन है।
क्या करें: आपके सोचे हुए लक्ष्य पूरे होंगे।
क्या न करें: अति-उत्साह में आकर कोई कानूनी गलती न करें, इसका ध्यान रखें।
चंद्रमा की उपस्थिति आपकी ही राशि में है, जिससे मेहनत का फल जरूर मिलेगा। करियर में तरक्की के योग हैं।
क्या करें: थकान महसूस हो तो आराम करें।
क्या न करें: नकारात्मकता को हावी न होने दें।
कुंभ
आज आपके पास नए और अनोखे आइडियाज होंगे। समाज में आपकी पहचान बढ़ेगी। क्या करें: सबके साथ मिलकर काम करेंगे तो ज्यादा सफल होंगे। क्या न करें: लोगों से कटे-कटे न रहें।
मीन
आज आपकी कल्पना शक्ति आपको सफलता दिलाएगी। मानसिक शांति के लिए थोड़ा समय ध्यान और प्रार्थना में बिताएं। क्या करें: पानी के आसपास सावधानी बरतें। क्या न करें: हकीकत से दूर सपनों की दुनिया में न खोएं।
डिस्क्लेमर: यह राशिफल सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। व्यक्तिगत जानकारी के लिए ज्योतिषि से संपर्क करें।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शनिवार को एक बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने सरकारी कंपनियों (स्टेट-ओन्ड एंटरप्राइजेज) और सरकारी संरक्षण वाली स्वायत्त संस्थाओं के कर्मचारियों की सैलरी में 5 से 30 प्रतिशत तक कटौती को मंजूरी दे दी है। यह फैसला देश में चल रहे ईंधन संकट और आर्थिक मुश्किलों से निपटने के लिए लिया गया है।
यह बैठक प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई, जहां पहले घोषित बचत और खर्चों को कम करने के उपायों की समीक्षा की गई। मध्य-पूर्व में अमेरिका-इज़राइल-ईरान संघर्ष के कारण ईंधन की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं। पाकिस्तान में पिछले हफ्ते पेट्रोल की कीमत में 55 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी। इससे अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है।
प्रधानमंत्री कार्यालय के बयान के अनुसार, बैठक में तय किया गया कि सरकारी कर्मचारियों की तरह अब सरकारी कंपनियों और संस्थाओं के कर्मचारियों की सैलरी में भी 5 से 30 फीसदी कटौती होगी। यह बचत की गई रकम जनकल्याण के कामों में लगाई जाएगी।
अन्य महत्वपूर्ण फैसले-
सरकारी गाड़ियों के लिए ईंधन की मात्रा में 50 प्रतिशत कटौती अगले दो महीनों के लिए जारी रहेगी।
सरकारी विभागों की 60 प्रतिशत गाड़ियां अगले दो महीनों में सड़कों से हटा दी जाएंगी।
सरकारी कंपनियों के बोर्ड में सरकारी प्रतिनिधियों को अब कोई मीटिंग फीस नहीं मिलेगी। यह भी बचत में जुड़ेगा।
नई गाड़ियां खरीदने पर पूरी तरह रोक है।
सरकारी खरीद पर भी रोक लगाई गई है।
कैबिनेट सदस्यों, मंत्रियों, सलाहकारों और विशेष सहायकों की अगले दो महीनों की सैलरी जनकल्याण के लिए बचत के रूप में इस्तेमाल होगी।
सरकारी अधिकारियों, मंत्रियों और अन्य की विदेश यात्राओं पर पूरी रोक बनी रहेगी।
सरकार पहले से ही कई कदम उठा चुकी है, जैसे सरकारी दफ्तरों में चार दिन का वर्किंग वीक, आधे कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम और स्कूलों की छुट्टियां। ये सब उपाय ईंधन की बचत और खर्च कम करने के लिए हैं।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा है कि यह मुश्किल वक्त है लेकिन सबको मिलकर देश की मदद करनी होगी। बचत की रकम गरीबों और आम लोगों की भलाई में लगेगी।
दुनिया सैन्य तौर पर ईरान को बहुत एडवांस नहीं मानती थी। मगर 15 दिन के युद्ध ने यह भ्रम तोड़ दिया है। इजरायल से ओमान तक ईरानी मिसाइल और ड्रोन ने न केवल खाड़ी देशों बल्कि अमेरिका को भी परेशान कर रखा है। सऊदी अरब से इराक तक उसके दूतावास और ठिकानों पर ईरान की सेना ड्रोन बरसा रही है। कई एयर डिफेंस सिस्टम तबाह हो चुके हैं।
दुबई, अबूधाबी, मनामा के अलावा कुवैत और कतर में ईरानी ड्रोनों से मची तबाही को सभी ने देखा है। हालत इस कदम तक बिगड़ चुके हैं कि खाड़ी देशों के पास मिसाइल और ड्रोन इंटरसेप्टरों की भारी कमी है। अपने सहयोगी अमेरिका से मांग की है। मगर वह भी इनकी पूर्ति करने में असमर्थ है।
ईरान की रणनीति: अमेरिका और इजरायल जैसे शक्तिशाली प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ ईरान ने सस्ते ड्रोन वाली रणनीति अपनाई। वह अपने पड़ोसी खाड़ी देशों पर इन ड्रोन से लगातार हमला कर रहा है। डर और दहशत के माहौल के इतर आर्थिक चोट भी दे रहा है। तेल ठिकानों पर हमले और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नाकाबंदी के बाद खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था चरमराने लगी है। दुबई जैसे दुनिया के सबसे अहम आर्थिक केंद्र की इमेज को ईरान ने सिर्फ हजार डॉलर के ड्रोन से बदल कर रख दिया।
अनुमान के मुताबिक ईरान के एक शाहेद-136 ड्रोन की कीमत 20,000 से 50,000 डॉलर है। अमेरिका एक ड्रोन को मारने में पैट्रियट एयर डिफेंस जैसा डिफेंस सिस्टम इस्तेमाल करता है। इसकी एक मिसाइल की कीमत ही 30 लाख डॉलर (27.6 करोड़ रुपये) से अधिक है, जबकि शाहेद-136 ड्रोन भारतीय रुपये में सिर्फ 41.5 लाख रुपये का है।
ईरान एक साथ इन सस्ते ड्रोन को बड़ी संख्या में दाग सकता है। मगर पैट्रियट एयर डिफेंस इतनी बड़ी संख्या में इन्हें रोक नहीं सकता है। अगर हर ड्रोन पर 27 करोड़ की मिसाइल दागी गई तो यह आर्थिक तौर पर भी बहुत महंगा है। वहीं पैट्रियट जैसी मिसाइलों का उत्पादन करना बेहद जटिल और समय लगने वाली प्रक्रिया है। अगर युद्ध अधिक तीनों तक चला तो मिसाइलों की कमी आ सकती है। बाद में ईरान इन्हीं सस्ते ड्रोनों से और तबाही मचा सकती है। अब सवाल यह है कि इसका विकल्प क्या है?
सस्ते ड्रोन का इलाज क्या: दुनियाभर को लेजर के रूप में सस्ते ड्रोन का विकल्प दिख रहा है। मिसाइल की तुलना में इसका खर्च बेहद कम होगा। अगर एक ड्रोन को मिसाइल से मार गिराया गया तो उसकी लागत 27.6 करोड़ रुपये होगी। वहीं लेजर से यही ड्रोन महज 3.50 डॉलर यानी 325 रुपये में गिराया जा सकता है। यही कारण है कि दुनियाभर के देश लेजर तकनीक पर निवेश करने में जुटे हैं। अगर डोनाल्ड ट्रंप की माने तों अमेरिका भी जल्द अपना लेजर हथियार उतारने वाला है। दशकों से कई देश लेजर तकनीक को विकसित करने में जुटे हैं। मगर इसके रास्ते में अभी तक कई बाधाए हैं।
बचपन में आपने कभी न कभी आवर्धक लेंस का इस्तेमाल कागज को जलाने में किया होगा। लेजर हथियार भी इसी तरह से काम करता है। वह प्रकाश की एक बेहद शक्तिशाली किरण को एक जगह फोकस करके ड्रोन को निष्क्रिय कर देता है। सबसे जरूरी यह है कि प्रकाश की किरण का कई सेकंड तक लक्ष्य पर एक ही जगह में टिका होना जरूरी है।
अगर आसमान साफ नहीं है। बादल छाए हुए हैं तो एक ड्रोन को मार गिराने में लेजर को अधिक समय लग सकता है। कोहरा और मौसम में अधिक नमी होने पर भी यही समस्या का सामना करना पड़ेगा। धूल भरी आंधी से भी नुकसान पहुंच सकता है।
सस्ते ड्रोन दुनिया की हर बड़ी जंग में सबसे अहम भूमिका निभाएंगे। ड्रोन को रोकना मिसाइलों से ज्यादा जटिल होगा। छोटे ड्रोन बड़ी तबाही मचा सकते हैं। यह हम यूक्रेन और अब ईरान युद्ध में देख चुके हैं। भारत को न केवल सस्ते ड्रोन बनाने होंगे, बल्कि इन ड्रोन से कैसे निपटा जाए, इस पर भी फोकस करना होगा। सस्ते ड्रोन से हम दुश्मन को बड़ी चोट पहुंचा सकते हैं, लेकिन अगर दुश्मन भी ऐसे ही ड्रोन इस्तेमाल करने लगे तो उनसे निपटने की तकनीक भी हमारे पास होनी चाहिए।
आजकल सीने में हल्की जलन या भारीपन होते ही हम तुरंत गैस की दवा खा लेते हैं। यह दवा उस समय तो आराम दे देती है लेकिन लंबे समय तक इसका ज्यादा उपयोग सही नहीं है। हमारे पेट में एक जरूरी एसिड बनता है, जो खाने को पचाने में मदद करता है। बार-बार दवा लेने से यह जरूरी एसिड कम हो सकता है और पाचन पर असर पड़ सकता है। अगर बिना डॉक्टर की सलाह के इन दवाओं को लंबे समय तक लिया जाए, तो शरीर को अंदर से नुकसान हो सकता है। हाल ही में ब्राजील की फेडरल यूनिवर्सिटी ऑफ साओ पाउलो के वैज्ञानिकों की एक स्टडी में भी बताया गया है कि इन दवाओं का लगातार इस्तेमाल शरीर में जरूरी पोषक तत्वों का संतुलन बिगाड़ सकता है।
अगर आपको सामान्य भाषा में समझना तो यह जान लीजिए कि जब आप रोजाना इन दवाओं का सेवन करते हैं तो पेट का pH लेवल बदल जाता है। रिसर्च बताते हैं कि पेट में एसिड की कमी होने से भोजन से मिलने वाले माइक्रोन्यूट्रिएंट्स खून में सही तरह से नहीं मिल पाते। इसका सीधा असर आपकी हड्डियों की मजबूती, मेंटल हेल्थ और एनर्जी के स्तर पर पड़ता है।
ये दवाएं पेट में एसिड बनाने वाले एंजाइम को रोक देती हैं। वैसे तो एसिड जलन पैदा करता है लेकिन यही एसिड हमारे खाने से आयरन और जिंक जैसे न्यूट्रिएंट्स को सोखने में शरीर की मदद भी करता है। जब पेट में एसिड बहुत कम हो जाता है तो शरीर खाने से जरूरी पोषण नहीं ले पाता।
रिसर्च के अनुसार, मिनरल्स में कमी का सीधा असर हमारी इम्यून सिस्टम पर पड़ता है। शरीर की कोशिकाएं कमजोर होने लगती हैं जिससे बीमारियों से लड़ने की ताकत घट सकती है।
पेट का एसिड भोजन से B12 को अलग करने में मदद करता है। एसिड कम होने से इसकी कमी हो जाती है, जिससे थकान और नसों में कमजोरी महसूस हो सकती है। अगर आपके शरीर में कैल्शियम को पूरी तरह से काम करना है तो इसके लिए एसिडिक जरिए की जरूरत होती है।
लंबे समय तक एसिड की दवा लेने से ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। खून में मैग्नीशियम की कमी से मांसपेशियों में ऐंठन और रेगुलर हर्ट रेट में समस्याएं हो सकती हैं।
भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में भारतीय सभ्यता के प्रमाण मिलते हैं। खासकर पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में कई प्राचीन हिंदू मंदिर आज भी मौजूद हैं। ये मंदिर हजारों साल पुराने हैं और लोगों की आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बने हुए हैं। ऐसा ही एक प्रसिद्ध मंदिर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित कटास राज मंदिर है। यह मंदिर अपनी प्राचीन वास्तुकला और धार्मिक महत्व के कारण पूरी दुनिया में जाना जाता है। इस मंदिर परिसर में कई अन्य प्राचीन मंदिर भी शामिल हैं, जो हजारों साल पुराने बताए जाते हैं।
कटास राज मंदिर पाकिस्तान के चकवाल जिले में स्थित है। लगभग 2000 साल पुराने इस मंदिर समूह को किला कटास भी कहा जाता है। माना जाता है कि इसका निर्माण हिंदू शाही काल में हुआ था। इसकी बनावट, गुंबद और स्थापत्य शैली आज भी उस समय की भव्यता और ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं।
इस्लामाबाद से दो घंटे की दूरी पर है पोथोहर पठार, जहां कटास राज मंदिर की स्थापना की गई। यहां की सबसे खास बात यहां मौजूद पवित्र तालाब (कुंड) है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान शिव अपनी पत्नी सती के वियोग में विलाप कर रहे थे, तब उनके आंसुओं से दो तालाब बने थे, जिनमें से एक यहां कटास राज में स्थित है।
वहीं, एक अन्य मान्यता यह भी है कि महाभारत काल में पांडवों ने अपने वनवास के 12 साल यहीं बिताए थे और ‘सतघरा’ मंदिरों का निर्माण किया था। साथ ही यह भी कहा जाता है कि यहीं युधिष्ठिर ने यक्ष के कठिन सवालों के उत्तर दिए थे।मंदिर जिसे किला कटास के नाम से भी जाना जाता है, कई हिंदू मंदिरों का एक कॉम्प्लेक्स है जो एक-दूसरे से वॉकवे से जुड़े हुए हैं।
पंजाब क्षेत्र में ज्वालामुखी के बाद इसे हिंदुओं का दूसरा सबसे पवित्र स्थान माना जाता है। यहां की ऐतिहासिक बनावट और धार्मिक जुड़ाव को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने साल 2006 और 2017 में इसके मरम्मत का काम भी करवाया था। आज भी महाशिवरात्रि जैसे बड़े त्योहारों पर भारत से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
इतिहासकारों के लिए इस परिसर का सही समय बताना मुश्किल रहा है लेकिन अनुमान है कि ये मंदिर 7वीं शताब्दी के आसपास के हो सकते हैं। बंटवारे के बाद इस ऐतिहासिक धरोहर ने काफी उपेक्षा झेली। औद्योगिक गतिविधियों और सीमेंट फैक्ट्रियों की वजह से यहां की पवित्र झील सूखने लगी थी।
हालांकि, 2017 में पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय ने इस पर कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने न केवल फैक्ट्रियों पर जुर्माना लगाया बल्कि झील को दोबारा भरने और मंदिर के मरम्मत के सख्त निर्देश भी दिए।
राजनयिक उतार-चढ़ाव के बावजूद, पाकिस्तान अब भारतीय तीर्थयात्रियों को यहां आने की अनुमति दे रहा है। साल 2024 में भी महाशिवरात्रि के लिए 112 भारतीय नागरिकों को वीजा जारी किया गया था जो पिछले साल की तुलना में दोगुनी थी।
नोट: इस खबर में लिखी गई बातें धार्मिक और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।
दिल्ली में पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता से अभी मौसम सुहावना बना रहेगा। 18 मार्च के बाद एक बार फिर से मौसम करवट लेने जा रहा है। मौसम विभाग ने इस सप्ताह चार दिन गरज चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश की चेतावनी दी है। मौसम विभाग का अनुमान है कि बृहस्पतिवार, शुक्रवार, रविवार और सोमवार को अलग-अलग इलाकों में तेज हवा के साथ बारिश हो सकती है। इससे तापमान में गिरावट आएगी।
मौसम विभाग के अनुसार, 28 मार्च को छोड़कर 26, 27, 29 और 30 मार्च को हवा की गति 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा रहने का अनुमान है। वहीं, मौसम विभाग की ओर से साझा किए गए ताजा अपडेट के अनुसार, इस सप्ताह 30 मार्च तक मौसम में उतार चढ़ाव देखा जाएगा। मौसम ज्यादातर गीला रहने से तापमान में भी किसी बड़े उछाल की संभावना नहीं है।
बुधवार को दिनभर तेज धूप के चलते लोगों को गर्मी का अहसास हुआ। हालांकि, हवा चलने से मौसम खुशनुमा रहा। लेकिन, सुबह से ही निकल रही धूप ने लोगों को खासा परेशान किया हुआ है। इस दौरान अधिकतम तापमान 33.5 और न्यूनतम तापमान 16.4 डिग्री दर्ज हुआ। दिल्ली में अधिकतम आर्द्रता 94 प्रतिशत और न्यूनतम आर्द्रता 33 प्रतिशत रही।
मौसम विभाग के अनुसार, रिज में 34, आया नगर में 33.7, लोधी रोड में 33.8 और पालम में 31.9 अधिकतम पारा दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अधिकारियों ने पहले ही ऐसी संभावना जताई थी, क्योंकि पहाड़ों पर लगातार बर्फबारी हो रही है। मौसम में आए इस बदलाव की वजह पश्चिमी विक्षोभ को बताया जा रहा है।
ईरान युद्ध ने दुनियाभर में ऊर्जा संकट खड़ा कर दिया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में वाणिज्यिक जहाजों का यातायात सामान्य नहीं है। ईरान के हमलों के कारण खाड़ी के कई देशों ने ईंधन का उत्पादन बंद कर दिया है। असर यह है कि मांग और पूर्ति में भारी अंतर पैदा हो गया है। अमेरिका लगातार ईरान को धमकी देने में जुटा है, ताकि होर्मुज को खुलवाया जा सके। मगर ईरान झुकने को तैयार नहीं है। वहां से गुजरने वाले जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया जा रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से तेल और गैस के अलावा एक और संकट खड़ा होने वाला है। शायद दुनिया की निगाह इस पर बहुत ही कम गई है।
मध्य पूर्व के समुद्री मार्ग पर आई रुकावट से दुनियाभर में सल्फर (गंधक) का बड़ा खतरा पैदा होने की आशंका है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बीच ड्रोन और मिसाइल के बारिश के कारण कोई भी जहाज कंपनी वहां से गुजरने का जोखिम नहीं उठा रही है। यहां से दुनियाभर में करीब 20 फीसद तेल और 20 फीसद ही प्राकृतिक गैस का निर्यात होता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते ही दुनिया को सल्फर का एक बड़ा हिस्सा मिलता है। जहाज का आवागमन ठप होने से दुनिया के सामने सल्फर का संकट खड़ा हो सकता है।
एक आंकड़े के मुताबिक दुनियाभर का करीब 41 फीसद सल्फर का व्यापार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते होता है। ईरान युद्ध के बाद इसकी कीमतों में लगभग 25 फीसद का इजाफा हो चुका है। मध्य पूर्व में दुनिया का 24 फीसद सल्फर का उत्पादन होता है। दुनियाभर में सल्फर से ही सल्फ्यूरिक एसिड का निर्माण किया जाता है। अमेरिका अपनी जरूरत का सल्फर खुद ही उत्पादित करता है। वह अपने 90 फीसद सल्फर का इस्तेमाल सल्फ्यूरिक एसिड बनाने में करता है। मगर कई देश अन्य देशों पर से आने वाले सल्फर पर निर्भर हैं। सल्फर संकट से इन देशों के औद्योगिक विकास को बड़ा झटका लगेगा, क्योंकि कोई देश औद्योगिक तौर पर कितना प्रगतिशील है, इसका अनुमान उसके सल्फ्यूरिक एसिड बनाने की क्षमता से लगता है।
ताबा संकट: बिना सल्फ्यूरिक एसिड के शुद्ध तांबा नहीं बन सकता है। खाना से निकला अयस्क अपने साथ कई अशुद्धियां समेटे होता है। सल्फ्यूरिक एसिड का इस्तेमाल करके शुद्ध तांबे को अलग किया जाता है। बाद में इसी तांबे का इस्तेमाल पावरग्रिड, ट्रांसफार्मर और मोटारों में किया जाता है। अगर सल्फर की सप्लाई चेन में रुकावट आई तो दुनिया भर में तांबा संकट पैदा होगा और बाद में यह बिजली व्यवस्था में व्यवधान के तौर पर बदल सकता है, जिससे दुनियाभर में गैस और तेल के बाद बिजली संकट भी पैदा हो सकता है।
तांबे का इस्तेमाल संचार हार्डवेयर, सैन्य अड्डों और रक्षा कारखानों को चलाने में भी खूब होता है। पायने इंस्टीट्यूट के विश्लेषण के मुताबिक बहरीन और कतर में दो प्रमुख अमेरिकी रडार नष्ट हुए हैं। इन्हें बदलने के लिए 30 हजार किलोग्राम से ज्यादा तांबे लगेगा। अगर जॉर्डन, कुवैत, सऊदी अरब और यूएई में नष्ट हुए अन्य अमेरिकी संचार उपकरणों, सेंसरों और रडारों की मरम्मत की जाए तो हजारों किलो और तांबे की जरूरत होगी।
कोबाल्ट संकट: सल्फ्यूरिक एसिड के बिना शुद्ध कोबाल्ट को नहीं निकाला जा सकता है। खनन से निकले कोबाल्ट के अयस्क को सल्फ्यूरिक एसिड में खोला जाता है। इससे शुद्ध कोबाल्ट अलग हो जाता है। बाद में इसी कोबाल्ट का लिथियम-आयन बैटरी में इस्तेमाल होता है। लैपटॉप, मोबाइल फोन और इलेक्ट्रिक गाड़ियों में लिथियम-आयन बैटरी का उपयोग होता है। सल्फर आपूर्ति रुकने से कोबाल्ट से लिथियम आयन बैटरी और बाद में फोन, लैपटॉप और इलेक्ट्रिक गाड़ियों के प्रोडक्शन पर इसका असर पड़ेगा।
कोबाल्ट से विशेष मिश्रधातु का निर्माण होता है। यह धातुएं न केवल मजबूत होती हैं, बल्कि गर्मी प्रतिरोधी होती है। इन विशेष धातुओं का गैस टरबाइन, ड्रोन और जेट इंजन में किया जाता है। इसके अलावा शक्तिशाली चुंबक, पेंट, कांच और सिरेमिक व कैंसर के इलाज में काम आने वाली रेडियोथेरेपी में कोबाल्ट का इस्तेमाल होता है।
सेमीकंडक्टर: सल्फर संकट का असर सेमीकंडक्टर क्षेत्र में पड़ेगा। सिलिकॉन वेफर्स से माइक्रोचिप्स का निर्माण होता है। इन वेफर्स की सफाई और नक्काशी में बेहद शुद्ध सल्फ्यूरिक एसिड की जरूरत होती है। यही कारण है कि सल्फर की आपूर्ति में आने वाले बाधा सेमीकंडक्टर के अलावा ऑटो मोबाइल, मिसाइल, एयर डिफेंस सिस्टम और फाइटर जेट के उत्पादन को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि एवियोनिक्स से कंप्यूटिंग संरचना में इसका खूब इस्तेमाल होता है।
मध्य पूर्व में सल्फर का उत्पादन
मध्य पूर्व दुनियाभर का करीब 24 फीसद सल्फर का उत्पादन करता है। यानी हर चार किलो सल्फर में एक किलो यही से आता है। आंकड़ों के मुताबिक साल 2024 में मध्य पूर्व में करीब 21 से 28 मिलियन टन सल्फर का उत्पादन हुआ।
सऊदी अरब
संयुक्त अरब अमीरात
कतर
इराक
दुनिया के 10 सबसे बड़े सल्फर उत्पादक
दुनियाभर में सल्फर का उत्पादन खदानों से बेहद कम होता है। 90 फीसद तक सल्फर का उत्पादन तेल और गैस रिफाइनिंग से बाय-प्रोडक्ट के तौर पर होता है। चीन दुनिया में सबसे अधिक सल्फर बनाता है।
दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान में 15 मार्च को अचानक मौसम बदल गया, जिससे अधिकतम और न्यूनतम दोनों तापमान में भारी गिरावट देखने को मिली। जहां लोग मान चुके थे कि गर्मियां आ चुकी हैं और सूरज अपनी गर्मी का अहसास भी करवाने लगा था, ऐसे में रविवार को हुई बारिश ने मौसम में एक बार फिर से ठंडक ला दी।
उत्तर प्रदेश में रविवार सुबह नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, अयोध्या समेत 15 शहरों में तेज हवाओं के साथ हल्की बारिश हुई। लखनऊ में बूंदाबांदी के साथ धूलभरी आंधी चली। आसमान में काले बादल छा गए। यही सिलसिला सोमवार को भी जारी रहा और कई शहरों और जिलों में तेज हवाएं चल रही हैं।
दिल्ली-एनसीआर में पश्चिमी विक्षोभ की वजह से आज भी सुबह से ही मौसम सुहावना है। सौमवार को भी 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने बताया है कि दिल्ली-एनसीआर में 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चली हैं। यही नहीं बारिश की वजह से अधिकतम तापमान में 6 डिग्री सेल्सियस गिरावट दर्ज की गई है, जबकि न्यूनतम तापमान में भी 3-4 डिग्री सेल्सियस गिरावट हुई है।
मौसम विभाग ने 21 मार्च तक के मौसम का पूर्वानुमान जारी किया है, जिसमें मौसम में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। इसमें बताया गया है कि 21 मार्च तक दिल्ली-एनसीआर में ठंडक बनी रहेगी और लोगों को अभी फिलहाल गर्मी से राहत मिलेगी।
मौसम विभाग ने सोमवार को अपने ताजा बुलेटिन में जानकारी देते हुए बताया कि पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, सिक्किम, असम और मेघालय, त्रिपुरा में रात का न्यूनतम तामपान 14-18 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। इसका साफ मलतब है कि इन राज्यों में रात का मौसम सुहावना हो रहा है। गर्मी को अभी थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा।
सर्दियों के मौसम में गर्म पानी से नहाना बहुत सुकून देता है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपके गीजर के अंदर क्या चल रहा है? लंबे समय तक सफाई न होने के कारण गीजर के टैंक में कैल्शियम, मैग्नीशियम और जंग की एक मोटी परत जमा हो जाती है। यह जमा हुआ पानी गीजर की क्वालिटी को खराब कर देता है जिससे नहाते समय आपकी स्किन सीधे हानिकारक तत्वों के संपर्क में आती है।
जब गीजर के अंदर का पानी महीनों तक जमा रहता है और टैंक की सफाई नहीं होती तो इस वजह से वह बैक्टीरिया जैसे लेजियोनेला के पनपने का ठिकाना बन जाता है। गीजर का गंदा पानी स्किन के नेचुरल ऑयल को सोख लेता है जिससे स्किन बैरियर कमजोर हो जाता है। नतीजा यह होता है कि नहाने के बाद आपको स्किन में खिंचाव, सूखापन और रैशेज महसूस होने लगते हैं।
हर सीजन की शुरुआत में प्रोफेशनल मैकेनिक से गीजर के टैंक की सफाई जरूर करवाएं।
मैग्नीशियम एनोड रॉड बदलें: यह रॉड टैंक को जंग से बचाती है। इसे हर 1-2 साल में बदलना चाहिए।
तापमान पर नियंत्रण: पानी को बहुत ज्यादा गर्म न करें, क्योंकि इससे स्केलिंग तेजी से होती है। गीजर का तापमान कम से कम 60°C पर सेट करें ताकि बैक्टीरिया पनपे ना।
यदि पानी का रंग पीला या मटमैला दिख रहा हो, तो तुरंत सफाई करवाएं।
अयोध्या के राम मंदिर परिसर में अब राम मंदिर आंदोलन के दौरान बलिदान देने वाले कार सेवकों के लिए स्मारक और पुराने राम मंदिर से जुड़े स्मारक को विकसित करने का काम किया जा रहा है। कारसेवकों के लिए बने स्मारक का काम मार्च तक पूरा हो जाएगा, अप्रैल तक, उस जगह, जहां रामलला ‘विराजमान’ हुए थे, उसे बना लिया जाएगा। श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने बताया है कि अभी सिर्फ दो स्थलों का निर्माण चल रहा है।
कारसेवकों के स्मारक और पुराने मंदिर, दोनों को स्मारक के तौर पर संरक्षित किया जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई है कि दोनों काम जल्द ही पूरे होने वाले हैं। नृपेंद्र मिश्रा ने कहा है कि उम्मीद है कि 31 मार्च या 30 अप्रैल तक ये काम खत्म हो जाएंगे। कारसेवकों का स्मारक करीब 11 मीटर ऊंचा है। अस्थाई मंदिर को वंशी पहाड़पुर के लाल पत्थरों से विकसित किया जाएगा। करीब 70 फीसदी तक काम पूरा हो चुका है।
मंदिर परिसर में म्यूजियम भी बन रहा है, जिसमें कुल 20 गैलरी होंगी। इनमें राम जन्मभूमि आंदोलन और भगवान राम से जुड़ी कहानियां दिखाई जाएंगी। अभी इन गैलरियों के लिए विषय चुना जा रहा है। म्यूजियम में आम श्रद्धालुओं को सितंबर के बाद सीमित संख्या में जाने की अनुमति दी जा सकती है।
नृपेंद्र मिश्रा,राम जन्मभूमि मंदिर कंस्ट्रक्शन समिति, अध्यक्ष:- अभी हम जिस मुख्य निर्माण की देखरेख कर रहे हैं, वह खास तौर पर स्मारक और पुराना मंदिर है, जहां भगवान विराजमान थे। उसे एक स्मारक के तौर पर रखा जाएगा। ये दोनों अभी बन रहे हैं। हमें पूरी उम्मीद है कि यह 31 मार्च या 31 अप्रैल तक पूरा हो जाएगा।
रामलला दरबार, राम मंदिर। Photo Credit: Ram Janmbhoomi
कब सभी जगह दर्शन कर सकेंगे श्रद्धालु?
नृपेंद्र मिश्रा,राम जन्मभूमि मंदिर कंस्ट्रक्शन समिति, अध्यक्ष:-
अभी, म्यूजियम की 20 गैलरी में दिखाए जाने वाले कंटेंट के लिए एक स्क्रिप्ट लिखी जा रही है। मैं रिक्वेस्ट करूँगा कि सितंबर के बाद आम विज़िटर्स को लिमिटेड बेसिस पर म्यूज़ियम आने दिया जाए… यह तय किया गया है कि 19 मार्च को प्रेसिडेंट के दौरे के बाद, भक्तों को शुरू में पास सिस्टम के ज़रिए सभी जगहों पर जाने दिया जाएगा।
नृपेंद्र मिश्रा ने कहा, ‘संग्रहालयों में जाने के लिए सामान्य रूप से कोई पास नहीं बनाया जाएगा। सबको मौका मिलेगा। कुछ जगहों के लिए पास बनाया जा सकता है। जैसे हनुमान जी की गैलरी है। अगर कोई वहां जाएगा तो 12 मिनट की पूरी कहानी दिखाई जाएगी। उसके बैठने की व्यवस्था की जाएगी। जितनी सीटें होंगी, उतने ही लोग जा सकेंगें।’
हनुमान गैलरी में क्या होगा खास?
राम मंदिर परिसर में ही हनुमान पर केंद्रित एक गैलरी है। उसे IIT चेन्नई की ओर से तैयार किया जा रहा है। 30 सितंबर तक इसका काम पूरा हो जाएगा। तब लोग जा सकेंगे।
कब पूरा मंदिर घूम सकेंगे श्रद्धालु?
नृपेंद्र मिश्रा ने बताया है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 19 मार्च को अयोध्या आने वाली हैं। उनके दौरे के बाद पहले पास सिस्टम से श्रद्धालुओं को सभी जगहों पर जाने की इजाजत मिलेगी। श्रद्धालु ‘रामलला’ के साथ-साथ अब म्यूजियम और अन्य स्थलों का भी दौरा कर सकेंगे। उन्होंने कहा है कि मार्च-अप्रैल तक कुछ अहम फैसले लिए जाएंगे, जिसके बाद म्यूजियम और अन्य सुविधाएं धीरे-धीरे आम श्रद्धालुओं के लिए खुल जाएंगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अगुवाई में अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी 2026 को ईरान पर बड़ा हमला शुरू किया, जिसे ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ नाम दिया गया। इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई समेत कई बड़े नेता मारे गए। अमेरिका और इजरायल का मानना था कि इससे ईरान की सरकार कमजोर हो जाएगी और कोई अमेरिका के इशारों पर नाचने वाला नेता आ जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
हमले के बाद ईरान ने और ज्यादा आक्रामक रुख अपनाया। ईरान ने नए सुप्रीम लीडर के रूप में अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को चुना। वह अपने पिता से कहीं ज्यादा कट्टर और सख्त हैं। ईरान ने मिसाइल और ड्रोन से मध्य पूर्व में कई जगहों पर हमले किए। अमेरिका के ज्यादातर सैन्य बेस या तो तबाह हो चुके हैं, या उन्हें बड़ा नुकसान पहुंचा है। तेल टैंकरों पर ईरान भीषण हमले कर रहा है, आरामको जैसे तेल प्लांट तक प्रभावित हो चुके हैं।
ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल टैंकर और व्यापारिक जहाजों को अब गुजरने नहीं दे रहा है। पूरी दुनिया, अब ईरान की रहम पर निर्भर है। होर्मुज से दुनिया का 20 फीसदी तेल गुजरता है, वहां अब ईरान का पूरा नियंत्रण है। दुनिया में तेल की कीमतें बहुत बढ़ गईं है। भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश जैसे देशों में गैस संकट पैदा हो रहा है।
2 दिन में ईरान का सरेंडर चाहते थे ट्रंप, खुद सरेंडर मोड में
अमेरिका को उम्मीद थी कि यह युद्ध कुछ हफ्तों में खत्म हो जाएगा, लेकिन अब यह खुला युद्ध बन गया है। अमेरिकी सेना को ज्यादा नुकसान हुआ है। 13 सैनिक मारे गए और 140 घायल हुए हैं। अमेरिका में जनता युद्ध के खिलाफ है और गैस की कीमतें बढ़ने से ट्रंप की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने मोजतबा खामेनेई और उनके सहयोगियों की जानकारी देने पर 1 करोड़ डॉलर का इनाम घोषित किया है लेकिन वह बुरी तरह फंस गए हैं। अमेरिका, इस जंग का मकसद ही साबित नहीं कर पाएगा। अब वह फ्रांस और जापान जैसे देशों से मदद के लिए गिड़गिड़ा रहे हैं।
ईरान में मोजतबा खामेनेई की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। Photo Credit: PTI
डोनाल्ड ट्रंप, राष्ट्रपति, अमेरिका:- कई देश, खासकर वे जो ईरान के होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने से प्रभावित हैं, अमेरिका के साथ मिलकर, इस स्ट्रेट को खुला और सुरक्षित रखने के लिए अपने युद्धपोत भेजेंगे। हमने ईरान की 100 फीसदी सैन्य क्षमता को पहले ही नष्ट कर दिया है। उनके लिए एक-दो ड्रोन भेजना, कोई माइन गिराना या इस स्ट्रेट के आस-पास या इसके अंदर कहीं भी कम दूरी की मिसाइल दागना आसान है, भले ही वे कितनी भी बुरी तरह से हार गए हों। उम्मीद है कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य देश, जो इस परेशानी से जूझ रहे हैं, इस क्षेत्र में अपने जहाज भेजेंगे, जिससे होर्मुज में अब उस देश की ओर से कोई खतरा न रहे, जिसकी सैन्य शक्ति पूरी तरह से खत्म हो चुकी है।
अमेरिका में ही डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को लेकर आलोचना झेल रहे हैं। Photo Credit: PTI
ईरान को कम आंक गए बेंजामिन नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रंप
ट्रंप प्रशासन ने खुफिया जानकारी के आधार पर जल्दी हमला किया, जिससे ईरान के सभी बड़े नेता एक साथ मारे जाएं। लेकिन हमले इतने बड़े थे कि जिन लोगों को अमेरिका ईरान का नया लीडर बनाने की उम्मीद कर रहा था, वे भी मारे गए। डोनाल्ड ट्रंप ने खुद माना कि जिन्हें हम चाहते थे, वे मर गए। अब नए लीडर मोजतबा खामेनेई हैं, जो बदला लेने की बात कर रहे हैं। वह खून का बदला खून से ही चाहते हैं।
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य बंद कर दिया। अमेरिका दावा करता रहा कि आप लोग रिस्क पर अपने जहाज को ले जाइए, अमेरिकी जहाज रेस्क्यू करेंगे। सच यह है कि अमेरिका खुद जहाज उतरने से डर रहा हैं। अमेरिका के कई जहाज ईरान ने मार गिराए हैं। दुनिया का 20 फीसदी तेल जहां से गुजरता है, वहीं ईरान अपने सबसे हिंसक रूप में है।
ईरान ने तेल टैंकरों पर हमले किए, कई टैंकर जले। अमेरिका ने भी जोर आजमाइश की। तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गईं। अमेरिका में पेट्रोल 3.63 डॉलर प्रति गैलन हो गया।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का पूरा कंट्रोल ईरान के पास है। Photo Credit: PTI
अमेरिका ने खार्ग द्वीप पर बमबारी की, जो ईरान का मुख्य तेल निर्यात केंद्र है। अमेरिका के हमलों से ईरान और सख्त हो गया है। अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का खुलना मुश्किल है। नौसेना से जहाजों की सुरक्षा की बात चल रही है, लेकिन अमेरिका फारस की खाड़ी में फिसड्डी साबित हुआ है।
बेंजामिन नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ दुनियाभर में प्रदर्शन हो रहे हैं। Photo Credit: PTI
ईरान नहीं, अमेरिका करेगा सरेंडर?
डोनाल्ड ट्रंप हारकर भी अपनी जीत की दावेदारी पेश कर रहे हैं। उनका कहना है कि जंग जल्द खत्म हो जाएगी, लेकिन उनके मंत्री यह बात मानने को तैयार नहीं है। मार्को रुबियो और पीट हेगसेथ ने बार-बार कहा है कि जंग खत्म होने में 4-6 हफ्ते लग सकते हैं।
अमेरिकी कांग्रेस में डेमोक्रेट्स पहले से नाराज हैं। डोनाल्ड ट्रंप के समर्थक सांसद भी नाराज हैं क्योंकि कोई साफ योजना नहीं दिख रही है। अमेरिका के पास ईरान की ऐसी दुविधापूर्ण नीति, पहले की किसी भी सरकार में नहीं रही। अमेरिका के सहयोगी देश जैसे जर्मनी और कतर चिंतित हैं। क्षेत्र में अमेरिकी नागरिकों को निकालने की नौबत आ गई है। ईरान ने पड़ोसी देशों पर लगातार हमले किए हैं।
डोनाल्ड ट्रंप, राष्ट्रपति, अमेरिका:- अमेरिका समुद्र तट पर जोरदार बमबारी करेगा। लगातार ईरानी नावों और जहाजों को पानी में ही तबाह करता रहेगा। किसी भी तरह से, हम जल्द ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला, सुरक्षित और मुक्त करवा लेंगे।
अमेरिका, ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल, नौसेना और न्यूक्लियर प्रोग्राम को खत्म करना चाहता है। ईरान मजबूती से टिका हुआ है। युद्ध लंबा खिंच सकता है। दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है। डोनाल्ड ट्रंप के पास ईरान के लिए कोई साफ नीति नहीं है। वह खुद कह रहे हैं कि जब तक मुझे लगेगा, जंग जारी रहेगा। उनके इस रवैये से पड़ोसी और सहयोगी देश फंसे हैं। डोनाल्ड ट्रंप की वजह से पश्चिम एशिया जल रहा है और आग की लपटें में खुद अमेरिका जल रहा है।