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‘सारे पोस्ट हटाएं…’, एपस्टीन केस में HC ने हरदीप पुरी की बेटी को दी राहत


दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बेटी हिमायनी पुरी को बड़ी राहत दी है। राहत देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को सख्त निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने गूगल, यूट्यूब, मेटा (फेसबुक और इंस्टाग्राम), एक्स और लिंक्डइन को आदेश दिया है कि वे हिमायनी पुरी को अमेरिकी क्रिमिनल जेफरी एपस्टीन से जोड़ने वाले सभी अपमानजनक और गुमराह करने वाले कंटेंट को तुरंत हटा दें या ब्लॉक कर दें।

 

कोर्ट का यह फैसला हिमायनी पुरी के 10 करोड़ रुपये के मानहानि केस की सुनवाई के दौरान आया। जस्टिस मिनी पुष्कर्णा की अगुवाई वाली बेंच ने माना कि कंटेंट पहली नजर में मानहानि करने वाला है और इससे केस करने वाले की छवि को नुकसान हो रहा है। हिमायनी पुरी ने आरोप लगाया कि 22 फरवरी 2026 से सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ एक सिस्टमैटिक कैंपेन चलाया जा रहा है, जिसमें उन्हें एपस्टीन के नेटवर्क और क्रिमिनल एक्टिविटीज से गलत तरीके से जोड़ा जा रहा है।

 

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अदालत में हिमायनी पुरी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल को केवल इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वह एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री की बेटी हैं। उन्होंने इसे राजनीतिक द्वेष और निजी खुन्नस का मेल बताते हुए कहा कि यह सब किसी की कोरी कल्पना की उपज है। दलील दी गई कि पूर्व में भी राजनीतिक कारणों से मंत्री के परिवार के अन्य सदस्यों जैसे उनकी पत्नी को भी झूठे आरोपों में घसीटने की कोशिश की गई थी।

भारत में ब्लॉक होंगे पोस्ट

अदालत ने अपने आदेश में साफ किया है कि फिलहाल यह निर्देश भारतीय डोमेन के लिए प्रभावी होगा। इसका अर्थ यह है कि भारत के भीतर मौजूद आईपी एड्रेस से अपलोड किए गए वीडियो और पोस्ट को पूरी तरह हटाना होगा। वहीं, जो कंटेंट विदेश से अपलोड किया गया है उसे सोशल मीडिया कंपनियों को भारत में ब्लॉक करना होगा ताकि उसे यहां न देखा जा सके। हालांकि, याचिकाकर्ता ने पूरी दुनिया से कंटेंट हटाने की मांग की थी लेकिन कोर्ट ने कहा कि यह मामला अभी डिवीजन बेंच के पास लंबित है। इसलिए अभी इसे भारत तक सीमित रखा गया है।

 

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सुनवाई के दौरान मेटा के वकील ने कहा कि वे तकनीकी रूप से किसी कंटेंट को भारत में ब्लॉक करने में सक्षम हैं लेकिन वैश्विक स्तर पर हटाना उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर का मुद्दा है। दूसरी ओर हिमायनी पुरी के वकील का कहना है कि अगर कोई कंटेंट भारत में बैठकर अपलोड किया गया है तो उसे वैश्विक स्तर पर हटाने का आदेश दिया जा सकता है। अदालत ने अब इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 7 अगस्त 2026 की तारीख तय की है। तब तक सभी सोशल मीडिया कंपनियों को आदेश का पालन कर रिपोर्ट पेश करनी होगी।

डेस्क जॉब वाले हो जाएं सावधान, घंटों एक जगह बैठने से फैटी लिवर का खतरा बढ़ा

हमारे खान पान और लाइफस्टाइल का प्रभाव सेहत पर पड़ता है। खासतौर से जो लोग डेस्क वर्क करते हैं उनमें फैटी लिवर का खतरा बढ़ गया है। पहले यह बीमारी उम्र दराज और अधिक शराब पीने वाले लोगों को होती थी। अब 20, 30 और 40 साल की उम्र के लोगों में नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) की समस्या बढ़ रही है। इस स्थिति में व्यक्ति शराब नहीं पीता है, फिर भी लिवर में फैट जमा होता है। इसे अक्सर मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड फैटी लिवर डिजीज (MASLD) भी कहा जाता है। यह बदलाव हमारे खान-पान और काम की वजह से हुआ है।

 

ऑफिस में लोग अक्सर घंटों एक जगह पर बैठे रहते हैं। काम की वजह से अधिक तनाव होता है और खाना नहीं खाते हैं। वे खाने की बजाय शुगर वाली ड्रिंक्स और प्रोसेस्ड चिप्स का सेवन करते हैं। इस आदत की वजह से लिवर के आसपास धीरे-धीरे फैट जमा होने लगता है। ऐसे में जो लोग शराब का सेवन नहीं कर रहे हैं उनमें भी फैटी लिवर की समस्या सामान्य होता जा रहा है। कई स्टडी में इस बात की पुष्टि हुई है।

 

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ऑफिस वर्कर में सामान्य हो रहा है फैटी लिवर

Scientific Reports के मुताबिक घंटों एक ही जगह पर बैठे रहने की वजह से MASLD का खतरा बढ़ गया है। शोध में खुलासा हुआ कि 84% लोग में फैटी लिवर की समस्या देखी गई। इसके अलावा इन लोगों में मोटापा, बेड कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ा हुआ है और नींद की कमी देखी गई। Clinical And Molecular Hepatology की शोध के मुताबिक दुनियाभर में NAFLD लगभग 3 में से 1 व्यक्ति को प्रभावित करता है और सेडेंटरी लाइफस्टाइल और मोटापे की वजह से यह समस्या लगातार बढ़ती ही जा रही है।

डेस्क वर्क में क्यों होती है दिक्कत?

घंटों बैठना- ऑफिस में व्यक्ति हर दिन 7 से 9 घंटे तक लगातार डेस्क पर बैठा रहता है। घंटों एक ही जगह बैठे रहने की वजह से मेटाबॉलिज्म धीमा होता है,  जिससे फैट जमा होता है और इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है। 

 

अनियमित खाना-  ज्यादातर लोग बिजी शेड्यूल की वजह से ब्रेकफास्ट नहीं करते हैं। डाइट में चीनी और कार्बोहाइड्रेट वाली चीजों का अधिक सेवन करते हैं। 

 

पर्याप्त नींद नहीं लेना- ऑफिस में कई बार काम बढ़ने की वजह से ज्यादा समय तक काम करना पड़ता है उसकी वजह से नींद पूरी नहीं होती है। ये चीजें आपके मेटाबॉलिज्म बैलेंस को बाधित कर सकते हैं और शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ाने का काम करता है। 

 

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फैटी लिवर के शुरुआती लक्षण

डॉक्टरों के मुताबिक फैटी लिवर एक साइलेंट किलर है जिसके शुरुआती लक्षण समझ में नहीं आते हैं। शुरुआत में थकान, खाने के बाद भारीपन महसूस होना, पेट में दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। शुरुआत में हम इन लक्षणों को इग्रोर कर देते हैं और बाद में सूजन, फाइब्रोसिस और लिवर संबंधी बीमारी हो सकती है। फैटी लिवर के कारण टाइप 2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज और किडनी संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

फैटी लिवर के जोखिम को कैसे करें कम?

  • काम से बीच-बीच में  5 से 10 मिनट के लिए वॉक पर जाएं।
  • संतुलित आहार का सेवन करें।
  • ब्लड शुगर टेस्ट और लिवर फंक्शन टेस्ट जरूर करवाएं।
  • तनाव को कम करने के लिए व्यायाम और योग करें।

रामनवमी पर बन रहा अद्भुत संयोग! इस पत्ते का भोग दिलाएगा तरक्की, फिर नहीं मिलेगा मौका

News Desk

मर्यादा पुरुषोत्तम राम का जन्मोत्सव देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है. अयोध्या से लेकर काशी तक इस दिन देशभर के राम मंदिरों में आस्थावानों की भीड़ होती है. वैदिक हिन्दू पंचांग के अनुसार, चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को ‘रामनवमी’ का महापर्व मनाया जाता है. त्रेता युग में इस दिन ही अभिजीत मुहूर्त में कौशल्या के गर्भ से प्रभु श्री राम का जन्म हुआ था. इस बार राम नवमी के महापर्व पर ग्रह नक्षत्रों का अद्भुत संयोग भी बन रहा है, जो इस दिन को बेहद खास बनाता है. वैदिक पंचांग के मुताबिक, चैत्र शुक्ल नवमी तिथि की शुरुआत 26 मार्च को सुबह 11 बजकर 49 मिनट पर हो रही है, जो अगले दिन यानी 27 मार्च को सुबह 10 बजकर 07 मिनट तक रहेगा. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार रामनवमी के महापर्व 27 मार्च को मनाया जाएगा. इस दिन पुनर्वसु और पुष्य नक्षत्र के साथ अतिगण्ड योग का महासंयोग बन रहा है. दोपहर में चंद्रमा कर्क राशि में प्रवेश कर रहे हैं.

40 मिनट का समय सबसे शुभ
बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी के ज्योतिष डिपार्टमेंट के प्रोफेसर पंडित सुभाष पांडेय बताते है कि 27 मार्च को अभिजीत मुहूर्त का समय दोपहर 12 बजकर 7 मिनट से 12 बजकर 47 मिनट तक है. इसी शुभ मुहूर्त में प्रभु श्रीराम का जन्म होगा और रामभक्त उनका जन्मोत्सव मनाएंगे. इस दिन कुछ आसान प्रयोग से मनुष्य अपने जीवन को खुशहाली से भर सकता है.

निगेटिव ऊर्जा समाप्त
इस दिन अखंड रामायण का पाठ करना बेहद शुभकारी माना जाता है. इससे घर की निगेटिव ऊर्जा समाप्त होती है. इस दिन हो सके तो ब्राह्मणों को श्रीरामचरितमानस की पुस्तक का दान भी करना चाहिए. इससे जीवन के अनजान संकट दूर होते हैं. रामनवमी के दिन तुलसी के माले का दान करना भी बेहद चमत्कारिक होता है. इससे माता लक्ष्मी की कृपा जातकों पर बरसती है और मनुष्य को धन, वैभव और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है. इस दिन रामभक्त हनुमान की पूजा से भी जीवन के सभी कष्ट और क्लेश दूर होते हैं. संकट मोचन हनुमान जी को तुलसी के पत्ते का भोग जरूर लगाएं. इससे शारीरिक कष्ट भी दूर होते हैं.

खाटू श्याम का लक्खी मेला शुरू, मान्यता से महत्व तक, पढ़ें हर सवाल का जवाब


राजस्थान के सीकर जिले में बाबा खाटूश्याम मंदिर है। जहां आज से लक्खी मेला शुरू हो रहा है। इस मेले में जाने के लिए लाखों लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। अब देश और दुनिया के लोग आज से मेले में शामिल हो सकते है। राजस्थान के इस मेले में कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक के लोग पहुंचते हैं।

लक्खी मेला खाटूश्याम मंदिर द्वारा आयोजित किया जा रहा है। मंदिर के समिति ने बताया कि यह मेला 28 फरवरी तक चलेगा। मतलब 8 दिन तक यह मेला चलेगा। मंदिर कमेटी ने अनुमान लगाया है कि इस बार मेले में करीब 35 लाख श्रद्धालु आएंगे। मंदिर कमेटी ने श्रद्धालुओं को सुरक्षित मेला और भगवान दर्शन की व्यवस्था की है।

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इस मेले में आने वाले लोगों की सुरक्षा का ध्यान हर वक्त पुलिस प्रशासन कर रही है। मेले में आने वाले लोगों के लिए पुलिस ने कुछ गाइडलाइन जारी किया है। साथ सीकर से मंदिर पैदल आने वाले भक्तों के लिए एक अलग कोरीडोर बनाया गया है, जिससे गाड़ी से आने वाले भक्त पैदल आएं। मेले में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मंदिर परिसर में 14 लाइनें बनाई गईं हैं। इस मेले की भव्यता को देखते हुए लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है। इस मेले की मान्यता क्या है, यह मेला हर साल फाल्गुन माह में ही क्यों लगाया जाता है? इन्हीं सवालों के जवाब जानिए इस रिर्पोट में-

लक्खी मेला की मान्यता क्या है?

लोगों की धार्मिक मान्यता के अनुसार बर्बरीक (बाबा खाटूश्याम ) जो घटोत्कच के बेटे और भीम के पोते थे। बर्बरीक ने अपनी मां से वादा किया था कि वह महाभारत युद्ध में हारने वालों का साथ देगे और हारने वाले को युद्द में जीताएगें। जिसके बाद भगवान बर्बरिक के सामने श्री कृष्ण भगवान एक साधु का रूप धारण आए। कृष्ण भगवान ने गुरू दक्षिणा के तौर पर बर्बरिक शीश मांगा जिसके बाद बर्बरिक को बिना किसी संकोच के अपना सिर श्री कृष्ण के चरणों सौप दी।


बर्बरिक भगवान की ईमादारी देख कृष्ण भगवान खुश हो गए। इसके बाद कृष्ण भगवान ने बर्बरिक भगवान को आर्शवाद दिया कि भगवान बर्बरिक को कलियुग में लोग पूजेंगे साथ ही उन्हें श्याम नाम से पूजा जाएगा। इसी वजह से आज भी ख्याटू श्याम भगवान को लोग श्रद्धा भाव से पूजते हैं। लोगों की मान्यता है कि ख्याटू श्याम भगवान हारे को सहारा देते है।

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यह मेला फाल्गुम माह में इसलिए मनाया जाता है। क्योंकि खाटूश्याम भगवान ने इसी माह में अपना शीश दान किया था। मध्यता है कि इस महिने में जो भी भक्त खाटूश्याम भगवान के दर्शन करते हैं, भगवान उनका मनोकामना जरूर पूरी करते हैं।

सुरक्षा के लिए इंतजाम

लक्खी मेले में लोगों की सुरक्षा के लिए 5000 पुलिस हर वक्त तैनात रह रहे हैं। जगह- जगह लोगों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरा लगया गया है। इस मेले में लाखों लोग आने वाले हैं, इसलिए भीड़ को नियंत्रण करने के लिए 14 लाइनें बनाईं गई हैं। इन लाइनों से गुजर कर लोग बाबा खाटूश्याम का दर्शन कर पाएगें। जानकारी के लिए बता दे कि इस मेले में लोगों बीआईपी दर्शन नहीं मिल पाएगी।

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जिला प्रशासन के गाइड लाइन

इस मेले में सुरक्षा बनाए रखने के लिए सीकर जिला प्रशासन ने कुछ जरूरी गाइड लाइन बनाए है। इन नियमों को सभी लोगों का मानना अनिवार्य है। लक्खी मेले में लोगों डिजे (DJ) बनाने पर प्रतिबंध लगाया है। ताकि मंदिर के आस- पास डिजे (DJ) का शोर न हो। मेले में इत्र और काटेदार गुलाब का फुल ले जाना भी प्रतिबंधित है।

कैसे पहुंचे मंदिर

राजस्थान का खाटू श्याम मंदिर सीकर में स्थित है। जहां जाने के लिए लोग ट्रेन, बस या प्लेन से जा सकते हैं। अगर आप प्लेन से जा रहे हैं तो अपने शहर से जयपुर जा सकते हैं। जयपुर से सीकर कुछ किलोमीटर दूर है तो आपको टैक्सी या बस लेनी होगी। तब आप खाटू श्याम मंदिर पहुंच जाएंगे।


अगर आप ट्रेन से खाटू श्याम मंदिर जा रहे हैं तो मंदिर के सबसे पास रिंगास जंक्शन स्टेशन पर उतर जाएं। इस स्टेशन से कुछ किलोमीटर की दूरी पर मंदिर है। जहां आप टैक्सी या बस में बैठकर जा सकते हैं।

दिल्ली करोल बाग में स्लीपर बस पलटी: 2 की मौत, 23 घायल

News Desk

नई दिल्ली। करोल बाग इलाके में स्थित झंडेवालान मंदिर के पास मंगलवार तड़के एक स्लीपर टूरिस्ट बस अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसे में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि 23 यात्री घायल हो गए। पुलिस और स्थानीय लोगों की त्वरित कार्रवाई से बस में फंसे यात्रियों को निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया।

पुलिस के मुताबिक 25 मार्च 2026 को करीब 1:05 बजे पीसीआर कॉल के जरिए सूचना मिली कि करोल बाग के हनुमान मंदिर के पास एक स्लीपर बस पलट गई है और कई यात्री घायल हैं। यह बस टूरिस्ट स्लीपर बस थी, जो जयपुर से दिल्ली के फतेहपुरी, सदर बाजार की ओर जा रही थी। बस में हादसे के समय करीब 30 यात्री सवार थे।

लोगों की मदद से पुलिस ने शुरू किया रेस्क्यू
सूचना मिलते ही करोल बाग थाने की टीम मौके पर पहुंची। उस समय बस पलटी हुई थी और कई यात्री अंदर फंसे हुए मदद के लिए चिल्ला रहे थे। पुलिसकर्मियों ने तुरंत एक गुजर रही जेसीबी मशीन को रुकवाया और स्थानीय लोगों की मदद से बस को हल्का उठाकर सीमेंट के ब्लॉकों से सहारा दिया। इसके बाद राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया।

सबसे पहले करीब 10 गंभीर घायलों को एंबुलेंस की मदद से सर गंगाराम अस्पताल भेजा गया। बाद में अन्य पुलिस अधिकारियों और टीमों के पहुंचने के बाद बाकी यात्रियों को भी सुरक्षित बाहर निकाला गया।

आरएमएल में हुई दो यात्रियों की मौत
कुल 23 घायलों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जिनमें से 12 को डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया, जहां दो पुरुषों की मौत हो गई। 10 को सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया और एक को लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज भेजा गया।

मृतकों में से एक की पहचान शहबाज आलम (30) के रूप में हुई है, जो उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के धामपुर गांव का रहने वाला था। दूसरे मृतक (लगभग 25–26 वर्ष) की पहचान अभी नहीं हो सकी है और पुलिस उसकी पहचान कराने की कोशिश कर रही है।

बस चालक पंकज कुमार (26) निवासी अलवर, राजस्थान भी घायल है और उसका इलाज चल रहा है। पुलिस ने चालक को हिरासत में ले लिया है। मामले की जांच की जा रही है

RSS और रॉ पर बैन लगे…, अमेरिकी आयोग ने ऐसी सिफारिश क्यों की है?

RSS और रॉ पर बैन लगे..., अमेरिकी आयोग ने ऐसी सिफारिश क्यों की है?

अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) ने अपनी 2026 की वार्षिक रिपोर्ट में भारत को उन देशों की सूची में रखा है, जहां ‘विशेष चिंता’ की जरूरत है। USCIRF ने अमेरिकी सरकार से सिफारिश की है कि भारत को ‘कंट्री ऑफ पर्टिकुलर कंसर्न’ की लिस्ट में रखा जाए। आसान भाषा में इसे ‘विशेष चिंता वाला देश’ कह सकते हैं।

USCIRF ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (R&W) पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है। अमेरिकी संस्था का दावा है कि भारत में धार्मिक आजादी खतरे में है, अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। आयोग का कहना है कि रॉ और RSS धार्मिक स्वतंत्रता के मामलों में भेदभावपूर्ण नीति अपनाते हैं।

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USCIRF का नया दावा क्या है?

USCIRF की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति 2025 में और बिगड़ी है, जिसमें धार्मिक अल्पसंख्यकों और उनके पूजा स्थलों को निशाना बनाया गया। रिपोर्ट में अमेरिकी सरकार से अपील की गई है कि वह भारत को हथियार न बेचे और ऐसी बिक्री को रोकने के लिए आर्म्स एक्सपोर्ट कंट्रोल एक्ट की धारा 6 लागू कर दे। सुरक्षा सहायता और द्विपक्षीय व्यापार नीतियों को धार्मिक स्वतंत्रता में सुधार से जोड़े।

USCIRF ने अमेरिकी संसद से ‘ट्रांजिशनल रिप्रेशन रिपोर्टिंग एक्ट 2024’ को फिर से पारित करने की मांग की थी। यह मांग की जा रही है कि अमेरिका में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ भारतीय सरकार की ओर से किए जा रहे दमन की सालाना रिपोर्ट भी दी जाए।

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भारत सरकार ने क्या कहा है?

भारत सरकार ने इस रिपोर्ट पर अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। बीते कुछ साल में USCIRF की रिपोर्टों को पूर्वाग्रह और राजनीति से प्रेरित बताया है। भारत ऐसे आरोपों को एक सिरे से खारिज करता रहा है।

USCIRF क्या चाहता है?

  • भारत को विशेष चिंता वाला देश माना जाए
  • RSS और R&W पर रोक लगे, संपत्ति जब्त हो
  • अमेरिका में संस्था से जुड़े लोगों पर प्रतिबंध लगे
  • हथियार बिक्री रोकने के लिए आर्म्स एक्सपोर्ट कंट्रोल एक्टर की धारा 6 लागू हो
  • सुरक्षा सहायता और व्यापार नीतियों को धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़ा जाए
  • भारत में USCIRF और राज्य विभाग को जांच करने की इजाजत मिले

किस आधार पर USCRIF कह रहा है ऐसा?

USCIRF का इशारा वक्फ कानूनों की तरफ है। आयोग का कहना है कि साल 2025 में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति और खराब हुई, सरकार ने अल्पसंख्यक समुदायों और उनके पूजा स्थलों को निशाना बनाने वाली नई विधेयकों को लागू किया।

अमेरिका का कहना है कि धर्म परिवर्तन से जुड़े कानूनों को देश के कई राज्यों ने सख्त किया है, कड़ी जेल योजनाओं का खाका तैयार किया है। भारतीय अधिकारियों ने नागरिकों और धार्मिक शरणार्थियों को डिपोर्ट करने की आसान योजनाएं बनाई हैं। भारत ने अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों पर सही समय पर कार्रवाई नहीं की है।

USCIRF का कहना है कि महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में सांप्रदायिक झड़पें हुईं, जिनमें RSS से जुड़े विश्व हिंदू परिषद जैसे समूहों को हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया गया। वक्फ (संशोधन) अधिनियम और उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण अधिनियम जैसी विधेयकों की आलोचना की गई है।

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USCIRF पर लगते हैं दुष्प्रचार के आरोप

अमेरिका की यह संस्था, भारत के खिलाफ नफरती सोच से भरी है। ऐसे आरोप इस संस्था पर कई बार लगे हैं। साल 2025 में विदेश मंत्रालय ने USCIRF की रिपोर्ट को पूर्वाग्रही और राजनीतिक रूप से प्रेरित करार दिया था। मंत्रालय ने कहा था कि USCIRF अलग-थलग घटनाओं को गलत तरीके से पेश कर भारत की जीवंत विविधतापूर्ण संस्कृति का अपमान करती है। यह अमेरिका का सुनियोजित एजेंडा है। भारत सरकार ने कहा था कि भारत में डेढ़ अरब लोग रहते हैं, यहां हर धर्म के अनुयायी हैं। भारत सह अस्तित्व में भरोसा करता है। भारत ने कई बार USCIRF को वीजा देने से इनकार किया है। यह संस्था भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करती है।

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USCIRF है क्या?

यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) की स्थापना साल 1998 में हुई थी। साल 1998 में ही अमेरिकी संसद ने इसे एक अधिनियम बनाकर स्थापित किया था। यह विदेश में धार्मिक स्वतंत्रता की जांच करने का दावा करती है। अमेरिकी राष्ट्रपति, विदेश मंत्री और संसद को यह सिफारिशें भेजती है। इस आयोग में 9 कमिश्नर होते हैं, जिनकी नियुक्ति राष्ट्रपति और अमेरिकी संसद के सीनियर नेता करते हैं।

गर्मी से राहत, किसानों के लिए आफत, बारिश, तेज आंधी और ओले, जानिए मौसम का हाल

गर्मी से राहत, किसानों के लिए आफत, बारिश, तेज आंधी और ओले, जानिए मौसम का हाल

देशभर में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। मार्च के महीने में ही कई राज्यों में लू चलने से लोग परेशान हो गए थे लेकिन अब बदलते मौसम के कारण लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी। मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से उत्तर, पूर्व और मध्य भारत के कई राज्यों में बारिश, तेज हवाएं, गरज-चमक और ओले गिरने की संभावना बनी हुई है। देशभर में पिछले 48 घंटों से मौसम का मिजाज बदला हुआ है, जिससे अधिकांश राज्यों के न्यूनतम और अधिकतम तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है। अगले 48 घंटों में भी मौसम इसी तरह रह सकता है।

दिल्ली-एनसीआर में पिछले 48 घंटों में बादलों की आवाजाही और हल्की बूंदाबांदी के बाद लोगों को गर्मी और प्रदूषण से राहत मिली है। न्यूनतम और अधिकतम तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है जिससे मौसम काफी सुहावना है। मौसम विभाग के अनुसार, आज भी दिल्ली में बादलों की आवाजाही जारी रहेगी। आज दिल्ली में तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ हल्की बारिश होने की संभावना बै। मौसम में इस बदलाव के कारण एयर क्वालिटी में सुधार देखने को मिल रहा है। सीपीसीबी के अनुसार, आने वाले दिनों में प्रदूषण का स्तर कम होकर 100-150 के बीच रह सकता है।

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आज का मौसम

हिमाचल-कश्मीर में बारिश-बर्फबारी

मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में भी पश्चिम विक्षोभ के सक्रिय रहने की संभावना जताई है। जम्मू-कश्मीर में अगले कई दिनों तक बारिश और बर्फबारी का क्रम जारी रहेगा, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी। यानी कश्मीर वालों को अभी कुछ दिन और ठंड का सामना करना होगा। हिमाचल प्रदेश के चंबा, मंडी, केलांग, कांगड़ा, कुल्लू, शिमला, हमीरपुर, सोलन, ऊना और सिरमौर समेत करीब 10 जिलों में आज मौसम खराब रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने इन जिलों में 40 से 50 किलोमीट प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने और बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। हिमाचल में बढ़ते तापमान से राहत जरूर मिलेगी और रात और सुबह के समय सर्दी बढ़ेगी।

यूपी-बिहार में कैसा रहेगा मौसम?

उत्तर भारत के अन्य राज्यों की तरह उत्तर प्रदेश में भी मौसम में बदलाव से गर्मी से राहत मिली है। हालांकि, तेज हवाओं और ओले गिरने से फसलों को नुकसान हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार, आज पश्चिम विक्षोभ के सक्रिय होने का असर उत्तर प्रदेश में भी देखने को मिलेगा। आज भी उत्तर प्रदेश में आंधी और बारिश की संभावना जताई गई है, जिसने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। मौसम विभाग ने कुछ जिलों में तो येलो अलर्ट भी जारी कर दिया है।

ओले

वहीं, बिहार की बात करें तो बिहार में भी मौसम ने करवट ली है। मौसम में बदलाव से गर्मी से राहत तो मिली है लेकिन ओले गिरने से फसलों के नुकसान की संभावना बनी हुई है। पटना, भोजपुर, बक्सर, कैमूर, रोहतास, गया, औरंगाबाद, जहानाबाद, अरवल गोपालगंज, सिवान, सारण, वैशाली, ईस्ट चंपारण, वेस्ट चंपारण, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, दरभंगा, मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर, अररिया, सुपौल, किशनगंज, कटिहार, मधेपुरा, पूर्णिया, सहरसा, भागलपुर, खगड़िया, बांका, मुंगेर, बेगूसराय, लखीसराय, शेखपुरा, नवादा और जमुई में आंधी-बारिश और बिजली गिरने का येलो अलर्ट जारी किया गया है।

इन राज्यों में भी होगी बारिश

मौसम विभाग ने उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और राजस्थान के लिए आने वाले कुछ दिनों के लिए हल्की बारिश की संभावना जताई है। उत्तराखंड में 19 और 20 मार्च को,हिमाचल प्रदेश में 18 और 19 मार्च को, पंजाब-हरियाणा, चंडीगढ़ और राजस्थान में 19 और 20 मार्च को कुछ स्थानों बारिश के साथ ओले गिरने की संभावना जताई है।

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अन्य राज्यों का मौसम

अन्य राज्यों की बात करें तो महाराष्ट्र ,गुजरात , कोंकण और गोवा के लिए हल्की बारिश का अलर्ट जारी किया है। विदर्भ में और छत्तीसगढ़ में मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है। इन दोनों जगहों पर ओले गिरने की संभावना है। इसके अलावा दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में भी बारिश की संभावना जताई गई है। कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु में मौसम की गतिविधियां आज भी जारी रहेंगीं। वहीं, पूर्वोत्तर भारत में भी बारिश होने की संभावना है।

क्या इस्लामाबाद में निकलेगा ईरान-अमेरिका युद्ध का समाधान! व्हाइट हाउस का बयान

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वाशिंगटन। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रही जंग लगातार जारी है। इन सब के बीच हाल की कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि जंग रोकने को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हो सकती है। हालांकि इसकी पुष्टि करने से व्हाइट हाउस ने इनकार किया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट से संपर्क कर पूछा कि कुछ रिपोर्टों के मुताबिक क्या अमेरिका के शीर्ष अधिकारी इस्लामाबाद में ईरानी अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। इस पर लेविट ने कहा कि ये संवेदनशील कूटनीतिक चर्चाएं हैं और अमेरिका प्रेस के जरिए बातचीत नहीं करेगा। यह एक बदलती हुई स्थिति है और मुलाकातों के बारे में लगाए जा रहे अंदाजों को तब तक अंतिम नहीं माना जाना चाहिए, जब तक कि व्हाइट हाउस द्वारा उनकी औपचारिक घोषणा न की जाए।
रिपोर्ट के मुताबिक लेविट की यह टिप्पणी कुछ प्रकाशनों में अधिकारियों के हवाले से उन खबरों के बाद आई, जिनमें कहा गया था कि पिछले महीने शुरू हुए ईरान-अमेरिका युद्ध को खत्म करने पर बातचीत इस्लामाबाद में हो सकती है। खबरों में एक पाकिस्तानी अधिकारी और एक दूसरे सूत्र का हवाला दिया, वहीं इजराइल ने चैनल का हवाला देते हुए एक इजराइली अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि ईरान और अमेरिका इस हफ्ते के आखिर में इस्लामाबाद में बातचीत के लिए मिल सकते हैं। उन्होंने बताया कि वैंस के अलावा, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर अमेरिका का प्रतिनिधित्व करेंगे और ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर गालिबफ तेहरान से आने वाले प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। खास बात यह है कि पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने सोमवार को कहा था कि उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से बात की और इस क्षेत्र में शांति लाने में इस्लामाबाद की मदद का वादा किया।
इस जंग के बीच सोमवार को समाधान की कुछ उम्मीद जगी जब ट्रंप ने दावा किया कि ईरान किसी समझौते के लिए उत्सुक है और कुशनर-विटकॉफ ने रविवार को एक ईरानी नेता के साथ बातचीत की थी। हालांकि ट्रंप ने उस नेता का नाम नहीं बताया, लेकिन ईरान के मोहम्मद बाघर गालिबफ ने बाद में ट्रंप के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कोई बातचीत नहीं हुई थी। ईरानी नेता ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि फेक न्यूज का इस्तेमाल वित्तीय और तेल बाजारों में हेरफेर करने और उस दलदल से निकलने के लिए किया जाता है, जिसमें अमेरिका और इजराइल फंसे हुए हैं।

अगर आप भी रात में कपड़े धोते हैं तो आज ही बदल दीजिए ये आदत, आपके घर पर हो सकते हैं ये 5 तरह के नकारात्मक प्रभाव

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रात के समय घर के कामकाज में व्यस्त होना आम बात है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि रात में कपड़े धोना केवल थकान ही नहीं बढ़ाता बल्कि घर की ऊर्जा और आपकी सेहत पर भी असर डाल सकता है? वास्तु और ज्योतिष शास्त्र में इस बात को लेकर कई मान्यताएं हैं, जो घर की पॉजिटिव एनर्जी और मानसिक शांति के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं. कई लोग समय की कमी के कारण रात में ही कपड़े धो लेते हैं, लेकिन ज्योतिष के अनुसार यह आदत आपके घर और जीवन में अनजाने में परेशानियों का कारण बन सकती है. आइए जानते हैं कि रात में कपड़े धोने से क्या-क्या नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं और इसे कैसे सही समय पर करने से घर और परिवार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.

रात का समय: शांति और ऊर्जा का समय
ज्योतिष के अनुसार रात का समय चंद्रमा की ऊर्जा से जुड़ा होता है. यह समय घर में शांति, विश्राम और सकारात्मक ऊर्जा के संचयन का होता है. जब आप रात में पानी का अधिक इस्तेमाल करते हैं और कपड़े धोते हैं, तो यह घर की प्राकृतिक ऊर्जा के संतुलन को प्रभावित कर सकता है. घर में अचानक पानी के बहाव और हलचल से न केवल ऊर्जा का संतुलन बिगड़ता है, बल्कि यह घर के वातावरण में हल्की अस्थिरता भी ला सकता है. चंद्रमा की ऊर्जा नाजुक होती है और रात में पानी का अत्यधिक इस्तेमाल घर के माहौल में तनाव और बेचैनी पैदा कर सकता है.

बढ़ती निगेटिव एनर्जी
अगर आप रात को गंदे कपड़े इधर-उधर रखते हैं या धोकर कमरे में ही सुखाने के लिए छोड़ देते हैं, तो यह सिर्फ गंदगी का कारण नहीं बनता. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह घर में निगेटिव एनर्जी के बढ़ने का कारण बन सकता है. आपने महसूस किया होगा कि कई बार देर रात तक कपड़े सूखते हुए कमरे में भारीपन या थकान जैसी भावना पैदा होती है. इसका कारण यह है कि घर के भीतर गीले कपड़े नकारात्मक ऊर्जा को रोकते हैं और मानसिक शांति को प्रभावित करते हैं.

सेहत पर भी असर
रात में कपड़े धोकर उन्हें बंद कमरे में छोड़ देना आपकी सेहत पर भी असर डाल सकता है. कपड़ों में नमी लंबे समय तक बनी रहती है और कमरे में मॉइस्चर बढ़ जाता है. इससे फंगस, बैक्टीरिया और बदबू की समस्या हो सकती है.
ज्योतिष में इसे भी नकारात्मक संकेत माना गया है क्योंकि नमी और फंगस न केवल घर की ऊर्जा को प्रभावित करते हैं, बल्कि यह शारीरिक स्वास्थ्य जैसे सांस की समस्या, एलर्जी और त्वचा संबंधी परेशानियों का कारण बन सकते हैं.

दिन में कपड़े धोने का महत्व
ज्योतिष और वास्तु दोनों ही मानते हैं कि कपड़े धोने के लिए सुबह या दिन का समय सबसे अनुकूल होता है. दिन के समय सूर्य की ऊर्जा कपड़ों को जल्दी सुखाने में मदद करती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखती है.
यदि आप अपने घर की ऊर्जा को संतुलित रखना चाहते हैं और निगेटिव प्रभावों से बचना चाहते हैं, तो कोशिश करें कि कपड़े दिन में धोएं और खुले स्थान पर सुखाएं. यह न केवल घर की शांति बनाए रखेगा बल्कि आपकी सेहत और मानसिक स्थिति के लिए भी लाभकारी होगा.

ध्यान रखें
-रात में कपड़े धोने से बचें.
-गीले कपड़े हमेशा दिन में खुले वातावरण में सुखाएं.
-घर के पानी का संतुलित इस्तेमाल करें.
-यदि अनिवार्य हो तो रात में धोने के बाद तुरंत कमरे के बाहर या बालकनी में सुखाएं.

इन सरल उपायों से न केवल घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है बल्कि परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य और मन की शांति पर भी अच्छा असर पड़ता है.

गंगा एक्सप्रेसवे हादसा: कार से टकराई बाइक, तीन की मौत

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उन्नाव। अंतिम संस्कार में शामिल होकर लौट रहे वृद्ध समेत तीन की बाइक में बेहटा मुजावर क्षेत्र में गंगा एक्सप्रेसवे की सर्विस लेन पर कार ने टक्कर मार दी। सिर और अन्य जगहों में चोट लगने से तीनों की मौत हो गई। हादसे के बाद काफी देर तक शव वहीं पड़े रहे। राहगीर की सूचना पर पहुंची पुलिस ने तीनों को सीएचसी पहुंचाया जहां डॉक्टर ने एक-एक कर तीनों को मृत घोषित कर दिया।

कार की टक्कर से बाइक सवार बुजुर्ग समेत तीन की मौत

हरदोई जिले के कासिमपुर क्षेत्र के अटिया गांव निवासी 60 वर्षीय राजू राठौर के चाचा रामजीवन की मंगलवार को बीमारी से मौत हो गई थी। अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए राजू राठौर कासिमपुर क्षेत्र के सिद्दीकपुर निवासी 50 वर्षीय रामबालक पुत्र शिवराज और गढ़ी निवासी 45 वर्षीय पवन पुत्र श्रीराम के साथ बाइक से बांगरमऊ क्षेत्र के नानामऊ गंगा घाट आया था।

एक ही बाइक से लौट रहे थे गांव

सोमवार रात लगभग 10:30 बजे सभी एक बाइक से गांव लौट रहे थे। बेहटा मुजावर क्षेत्र में रानीपुर गांव के पास निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे की सर्विस लेन पर अज्ञात कार ने बाइक में टक्कर मार दी। हादसे में राजू, पवन व रामबालक की मौत हो गई। पुलिस तीनों को लेकर बांगरमऊ सीएचसी पहुंची। डॉक्टर ने तीनों को मृत घोषित कर दिया। बेहटा मुजावर एसओ मुन्ना कुमार ने बताया शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए है। टक्कर मारने वाली कार का का पता लगाया जा रहा है।

टोंगा में आया 7.6 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, दहशत का माहौल

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नुकुअलोफा। दक्षिण प्रशांत महासागर स्थित टोंगा द्वीप समूह के पास मंगलवार तड़के 7.6 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आने से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। संयुक्त राज्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के अनुसार यह भूकंप स्थानीय समयानुसार सुबह 4:37 बजे आया। भूकंप का केंद्र टोंगा के वावाउ द्वीप समूह में स्थित नेइआफू से लगभग 153 किलोमीटर पश्चिम में बताया गया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस भूकंप की गहराई पृथ्वी की सतह से करीब 237 से 238 किलोमीटर के बीच थी, जिसे वैज्ञानिक दृष्टि से गहरा भूकंप माना जाता है। इतनी अधिक गहराई पर आने वाले भूकंप सामान्यतः सतह पर कम विनाशकारी प्रभाव डालते हैं। यही कारण है कि फिलहाल किसी बड़े नुकसान या किसी के हताहत होने की कोई सूचना सामने नहीं आई है। भूकंप के झटकों के बाद संभावित खतरे को देखते हुए प्रशांत सुनामी चेतावनी केंद्र (पीटीडब्ल्यूसी) ने स्थिति का आकलन किया। केंद्र ने स्पष्ट किया कि इस भूकंप से सुनामी का कोई खतरा नहीं है, क्योंकि इसका केंद्र धरती के भीतर काफी गहराई में था। आमतौर पर उथले भूकंप ही समुद्र में बड़े स्तर पर हलचल पैदा कर सुनामी का कारण बनते हैं।
एक दिन पहले हिहिफो में आया था भूकंप
गौरतलब है कि इस घटना से एक दिन पहले भी टोंगा के हिहिफो क्षेत्र के पास 6.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। हालांकि उस भूकंप से भी किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं आई थी। लगातार आ रहे भूकंपों के कारण स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल जरूर बना हुआ है। वहीं, भूकंपीय गतिविधियों का असर अन्य क्षेत्रों में भी देखा गया। नेपाल में सोमवार को 4.1 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिनका केंद्र सुदूरपश्चिम प्रांत के बजहांग जिले के पास था। आसपास के इलाकों में भी लोगों ने हल्के झटके महसूस किए, हालांकि वहां भी किसी प्रकार के नुकसान की सूचना नहीं है।

जब भाग्य ना दे साथ तो इन पवित्र स्थलों की ओर करें रुख, मिलेगा धन और सुकून, दूर होंगी सभी समस्याएं

जब जीवन में बार-बार असफलताएं सामने आती हैं और भाग्य साथ नहीं देता, तब इंसान मानसिक रूप से टूटने लगता है. ऐसे कठिन समय में आध्यात्मिक शरण लेना ना केवल मन को शांति देता है, बल्कि नई ऊर्जा और सकारात्मकता भी प्रदान करता है. भारत में कई ऐसे पवित्र स्थल हैं, जहां जाकर लोग अपने दुख-दर्द भूलकर आत्मिक सुकून का अनुभव करते हैं. मान्यता है कि इन धार्मिक स्थलों पर श्रद्धा से दर्शन करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और किस्मत भी बदल सकती है.

जिंदगी में कभी ना कभी ऐसा समय आता है, जब लगता है कि सबकुछ थम गया हो. मेहनत तो बहुत करते हैं, पर भाग्य साथ नहीं देता. कभी रिश्ते उलझ जाते हैं, कभी पैसा टिकता नहीं, तो कभी मन बेचैन रहता है. ऐसे में कई लोग निराश होकर बैठ जाते हैं, तो कुछ लोग आस्था की राह चुनते हैं. कहते हैं कि मंदिर सिर्फ पत्थर की मूर्तियां नहीं, बल्कि विश्वास के द्वार हैं. जब जीवन दिशा खो दे तो आस्था का रास्ता हमेशा रोशनी दिखाता है. भारत की धरती पर ऐसे अनगिनत स्थान हैं, जहां सिर्फ सिर झुकाने से मन को शांति और जीवन को नई दिशा मिल जाती है. आइए जानते हैं उन जगहों के बारे में, जब भाग्य साथ ना दे तो इन पवित्र स्थानों पर जरूर जाएं…

अगर किस्मत सोई हो, तो सीधा उज्जैन महाकाल की शरण में जाएं. महाकाल के दर पर सिर झुकाने से जीवन की रुकावटें अपने आप दूर होने लगती हैं. कहते हैं, जो सच्चे मन से महाकाल को पुकारे, उसकी किस्मत फिर से जाग उठती है.

शादी में अड़चन हो या रिश्ता बार-बार टूटता हो, तो कामाख्या धाम (असम) की यात्रा करें. यह शक्ति पीठ माना जाता है. यहां की ऊर्जा विवाह और संबंधों में स्थिरता लाती है.

अगर कर्ज या आर्थिक बोझ ने चैन छीन लिया हो, तो त्र्यंबकेश्वर (नासिक) जाएं. कहा जाता है कि यहां जाने से व्यक्ति कर्ज मुक्त हो जाता है.

जब आत्मा व्यथित हो, मन का चैन खो गया हो, तो वृंदावन का रास्ता पकड़ लें. राधा-कृष्ण का यह पावन स्थान आत्मा को शांति और भक्ति का अमृत देता है.

अगर मृत्यु का भय सताए या जीवन अनिश्चित लगे, तो काशी विश्वनाथ की शरण लें. कहा जाता है, जो काशी में भगवान शंकर का नाम लेता है, उसे मोक्ष निश्चित मिलता है.

अगर धन टिकता ना हो, हाथ में आते ही चला जाए, तो खाटू श्याम की आराधना करें. खाटू श्याम जी का आशीर्वाद जीवन में स्थिरता और समृद्धि लाता है.

जब मन को संतोष ना मिले, हर चीज के बावजूद भीतर खालीपन रहे, तो शांति निकेतन (पश्चिम बंगाल) जाएं. वहां की सरलता और शांत वातावरण आत्मा को ठहराव देता है

अगर मन बार-बार भटकता हो, निर्णय न ले पाएं, तो तिरुपति बालाजी की शरण लें. वहां की दिव्यता माया के भ्रम को तोड़कर सही दिशा दिखाती है.
राहु-केतु का प्रभाव परेशान करे, तो कालहस्ति मंदिर (आंध्र प्रदेश) जाएं. यहां पूजा करने से ग्रहों का दोष शांत होता है.

अगर नक्षत्र प्रबल या अशुभ हों, तो पुष्कर तीर्थ (राजस्थान) में स्नान करें. यह एकमात्र स्थान है, जहां ब्रह्मा जी का मंदिर है. यहां स्नान से तीनों लोकों का आशीर्वाद मिलता है.

बंगाल की सियासत गरमाई, ममता बनर्जी का भाजपा पर बड़ा हमला

कोलकाता|बंगाल चुनाव की तपिश के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नक्सलबाड़ी में जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान ‘दीदी’ के निशाने पर केंद्र की भाजपा सरकार रही। ममता बनर्जी ने अपने भाषण में नागरिकता के मुद्दे से लेकर आदिवासियों के हक तक, हर उस नब्ज को टटोला, जो बंगाल की राजनीति में सबसे ज्यादा संवेदनशील मानी जाती है। ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि न NRC होने दूंगी, न डिटेंशन कैंप बनने दूंगी।

“बुजुर्गों को कतार में खड़ा करना शर्मनाक”

चुनावी सभा को संबोधित करते हुए सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि जिस देश में बुजुर्गों ने अपनी पूरी जिंदगी खपा दी, आज उनसे उनकी नागरिकता का सबूत मांगा जा रहा है। उन्होंने कहा, “बुजुर्ग नागरिकों को लंबी-लंबी कतारों में खड़ा किया जा रहा है। उनकी नागरिकता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। ममता बनर्जी ने कहा कि जिन लोगों ने वोट देकर सरकार चुनी, आज वही सरकार उनसे पूछ रही है कि वे इस देश के नागरिक हैं या नहीं? ऐसी पार्टी को वोट मांगने का कोई हक नहीं है।

हमने हर धर्म के लिए काम किया- ममता बनर्जी

ममता बनर्जी ने कहा कि एसआईआर के लिए कितनी लाइनें थीं? वे जानना चाहते हैं कि आपके परिवार में कितने बच्चे हैं। आप किस देश के नागरिक हैं। उन्होंने कितने आदिवासियों, राजबंशियों को निकाला है? कितने हिंदू, मुसलमान मारे गए हैं? क्या यह उनकी जिम्मेदारी है? ‘दीदी’ ने आगे कहा कि जब देश में आजादी का आंदोलन हुआ था, तब भाजपा पैदा भी नहीं हुई थी। आज वे धर्म की बात करते हैं। पहले वे कहते थे कि ममता बनर्जी दुर्गा पूजा की इजाजत नहीं देतीं, लेकिन यहां इतने सारे लोग दुर्गा पूजा, काली पूजा मनाते हैं। हमने हर धर्म के लिए काम किया है

हमने आदिवासियों को जंगल के अधिकार दिए-सीएम ममता

भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार ममता बनर्जी ने कहा कि हमने आदिवासियों को जंगल के अधिकार दिए हैं। भाजपा नाटक करती है, आदिवासियों पर अत्याचार करती है। सब जगह देखें आदिवासियों पर कितना अत्याचार हुआ, लेकिन मैंने बिरसा मुंडा कॉलेज बनवाया। मैंने बिरसा मुंडा की मूर्ति बनवाई। मैंने उनके लिए काम किया है।

जंग के मैदान में हथियार फेंककर भागे ट्रंप, नेतन्याहू बोले- कुछ भी हो हम तो लड़ेंगे और जीतेंगे

यरूशलेम। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जंग का मैदान छोड़कर भाग गए हैं। पहले दिन ट्रंप ने दमदारी से कहा था कि अमेरिका ओर इजराइल ने मिलकर ईरान पर हमला किया है। फिर 24वें दिन बोले अब अमेरिका 5 दिन तक ईरान पर हमला नहीं करेगा। तभी इजराइली पीएम ने ऐलान करते हुए कहा कि हम ये जंग लड़ेंगे और जीतेंगे। उन्होंने सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई महत्वपूर्ण चर्चा की जानकारी साझा करते हुए बताया कि दोनों नेता एक ऐसे समझौते की दिशा में काम कर रहे हैं, जो इजरायल के रणनीतिक हितों को सुरक्षित रखते हुए युद्ध के लक्ष्यों को प्राप्त कर सके। हालांकि, इस बातचीत के बावजूद नेतन्याहू ने ईरान और लेबनान के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखने का अपना संकल्प दोहराया है।
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने सोशल मीडिया के माध्यम से स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ट्रंप इजरायल और अमेरिका की संयुक्त सैन्य उपलब्धियों को एक ठोस समझौते में बदलने के पक्ष में हैं। नेतन्याहू ने कहा कि इजरायली सेना ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को लक्षित करना जारी रखेगी। उन्होंने खुलासा किया कि हाल ही में इजरायली अभियानों में दो और ईरानी परमाणु वैज्ञानिकों को ढेर किया गया है और हिजबुल्लाह के खिलाफ भी कार्रवाई तेज कर दी गई है। उनका संदेश स्पष्ट है कि जब तक अंतिम समझौता नहीं होता, इजरायल अपने हितों की रक्षा के लिए सैन्य दबाव कम नहीं करेगा। इसी बीच, वाशिंगटन से एक राहत भरी खबर आई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि उन्होंने अमेरिकी सैन्य विभाग को ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे और बिजली संयंत्रों पर प्रस्तावित हमलों को पांच दिनों के लिए स्थगित करने का निर्देश दिया है। ट्रंप के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच शत्रुता समाप्त करने को लेकर सकारात्मक और उत्पादक बातचीत शुरू हुई है और यह स्थगन इन्हीं चर्चाओं की प्रगति पर निर्भर करेगा। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब युद्ध अपने चौथे सप्ताह में है और तेल की बढ़ती कीमतों सहित वैश्विक हवाई मार्गों पर मंडराते खतरे ने अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया है।
दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी हलचल तेज है। बहरीन ने एक नया मसौदा प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें सदस्य देशों को होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का अधिकार देने की वकालत की गई है। इस प्रस्ताव में मांग की गई है कि ईरान वाणिज्यिक जहाजों पर हमले तुरंत बंद करे। यदि यह प्रस्ताव पारित होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बलों को नेविगेशन बाधित करने वाले तत्वों के खिलाफ संबंधित देशों के क्षेत्रीय जल के भीतर भी सैन्य कार्रवाई करने की अनुमति मिल सकती है। हालांकि, सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों की वीटो शक्ति को देखते हुए इस प्रस्ताव के भविष्य पर अभी सस्पेंस बना हुआ है। आने वाले पांच दिन क्षेत्र में शांति की स्थापना या युद्ध के विस्तार की दृष्टि से अत्यंत निर्णायक साबित होने वाले हैं।

रसोई में बार-बार बर्तन के गिरने का क्या मतलब? जानें वास्तु संकेत, कहीं बड़ी अनहोनी तो नहीं…

रसोई घर को हमेशा से घर का सबसे पवित्र और ऊर्जा से भरपूर स्थान माना जाता है. हां न केवल भोजन बनता है, बल्कि पूरे परिवार के स्वास्थ्य और ऊर्जा का स्रोत भी यहीं से जुड़ा होता है. कई बार ऐसा भी होता है कि रसोई घर में आपसे बार-बार बर्तन गिरने लगते हैं. कई लोग इसे सिर्फ एक सामान्य घटना मानते हैं, लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार इसे संकेतों के रूप में भी देखा जाता है. अक्सर कहा जाता है कि अगर रसोई में बार-बार बर्तन गिर रहे हैं, तो यह नकारात्मक ऊर्जा या किसी प्रकार के वास्तु दोष का संकेत हो सकता है. विशेष रूप से यदि यह घटना बार-बार एक ही जगह पर हो रही है, तो यह संकेत देता है कि उस स्थान पर ऊर्जा का संतुलन बिगड़ा हुआ है. इस स्थिति में घर के सदस्यों के बीच तनाव, छोटी-मोटी बहस या मानसिक अशांति भी बढ़ सकती है.

वास्तु के अनुसार रसोई में अग्नि तत्व का विशेष महत्व होता है, जो ऊर्जा और जीवन शक्ति का प्रतीक है. यदि रसोई में गैस स्टोव की दिशा गलत हो, बर्तन ठीक से व्यवस्थित न हों, या किचन में अव्यवस्था बनी रहे, तो यह अग्नि तत्व को असंतुलित कर सकता है. इस असंतुलन के कारण छोटे-छोटे हादसे जैसे बर्तन का गिरना, टूटना या खरोंच आना आम हो सकता है. इसके अलावा, यह भी माना जाता है कि यदि घर में अचानक से बर्तन गिरने की घटनाएं बढ़ जाएं, तो यह किसी अनचाही ऊर्जा या नकारात्मक प्रभाव का संकेत भी हो सकता है, जिसे समय रहते सुधारना जरूरी होता है.

क्या है इसकी वजह?
हालांकि, हर बार इसका मतलब किसी अनहोनी से जोड़ना जरूरी नहीं है. कई बार इसका कारण केवल ध्यान भटकना, थकान, फिसलन भरा फर्श, गीले हाथ, या किचन में सही तरीके से काम न करना भी हो सकता है. इसलिए सबसे पहले अपने व्यवहारिक कारणों पर ध्यान देना चाहिए. अगर बार-बार ऐसा हो रहा है, तो रसोई की साफ-सफाई, बर्तन रखने की व्यवस्था और काम करने के तरीके को सुधारना जरूरी है. साथ ही, किचन में पर्याप्त रोशनी और हवा का प्रवाह भी बनाए रखना चाहिए ताकि सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे.

क्या है वास्तु उपाय?
वास्तु उपायों के अनुसार, रसोई को हमेशा साफ और व्यवस्थित रखना चाहिए. बर्तन इस्तेमाल के बाद तुरंत धोकर सही जगह पर रखने चाहिए. किचन में टूटी-फूटी चीजों को तुरंत हटा देना चाहिए क्योंकि इन्हें नकारात्मक ऊर्जा का स्रोत माना जाता है. इसके अलावा, किचन के दक्षिण-पूर्व दिशा को विशेष रूप से शुभ माना जाता है, इसलिए यदि संभव हो तो स्टोव को उसी दिशा में रखें. रोजाना किचन में दीपक जलाना या हल्का धूप-दीप करना भी सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने में मदद कर सकता है. इस प्रकार, रसोई में बार-बार बर्तन गिरना केवल एक संयोग भी हो सकता है, लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.