श्रावस्ती। रक्षाबंधनन की खुशियों पर इस बार खुले में बिकती मिठाइयों और मिलावटखोरी का साया मंडरा रहा है। एक तरफ सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सख्त फरमान है कि त्योहारों पर मिलावटी और दूषित खाद्य पदार्थों पर लगाम लगाई जाए, वहीं दूसरी तरफ भारत-नेपाल सीमा से सटे पिछड़े जनपद श्रावस्ती में फूड एंड सेफ्टी विभाग कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है। ग्रामीण चौराहों से लेकर जिला मुख्यालय भिनगा तक सड़कों के किनारे खुले में सजी दुकानों पर धूल, मक्खियों और प्रदूषण के बीच बेची जा रही मिठाइयां लोगों की सेहत के साथ सीधा खिलवाड़ कर रही हैं।
कल भाई-बहन के अटूट प्रेम का पावन पर्व रक्षाबंधन है। बाजारों में रौनक है, लेकिन इसी रौनक की आड़ में परोसा जा रहा है ‘मीठा जहर’। हमारी ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आई तस्वीरें व्यवस्था और प्रशासनिक दावों की पोल खोलने के लिए काफी हैं। मुख्यालय भिनगा के मुख्य बाजार से लेकर सुदूर ग्रामीण इलाकों तक, सड़कों पर बिना किसी ढक्कन या सुरक्षा के मिठाइयों के ढेर लगे हैं।
सड़कों से उड़ती धूल, गाड़ियों का धुआं और भिनभिनाती मक्खियां सीधे इन मिठाइयों पर बैठ रही हैं। हाइजीन और फूड सेफ्टी मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जिस त्योहार पर बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र और अच्छी सेहत की कामना करती हैं, उसी त्योहार पर विभाग की लापरवाही से बीमारियां बांटने का पूरा इंतजाम हो चुका है।
प्रदेश भर में जब छापेमारी और सैंपलिंग की खबरें आ रही हैं, तब श्रावस्ती का खाद्य सुरक्षा विभाग पूरी तरह से नदारद नजर आ रहा है। न कोई सघन चेकिंग अभियान, न खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों पर रोक। आखिर विभाग किसी बड़े हादसे या लोगों के बीमार पड़ने का इंतजार क्यों कर रहा है?













