Homeदेश (National)दिल्ली-मुंबई नहीं छोटे शहर में ज्यादा स्टार्टअप और UPSC टॉपर, समझें कैसे?

दिल्ली-मुंबई नहीं छोटे शहर में ज्यादा स्टार्टअप और UPSC टॉपर, समझें कैसे?

देश में इस बात की चर्चा होती है कि दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद और बैंगलुरु जैसे बड़े मेट्रो शहरों में ज्यादा स्टार्टअप खुल रहे हैं क्योंकि यहां सुविधाएं अधिक हैं। साथ ही इस बात की भी चर्चा होती है कि बड़े शहरों में अच्छी कोचिंग होने के कारण यूपीएससी टॉपर भी यहीं से निकलते हैं। मगर, यह आंकड़े सही नहीं हैं।

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने रविवार को बताया कि अब भारत के अधिकतर स्टार्टअप संस्थापक और संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) टॉपर द्वितीय और तृतीय श्रेणी के शहरों के बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह दिखाता है कि टेक्नोलॉजी और डिजिटल संपर्क ने देश भर में सभी को समान अवसर दिलाने में कितनी बड़ी भूमिका निभाई है।

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छोटे शहरों से निकल रहे टॉपर

जम्मू क्षेत्र के अलग-अलग स्कूलों में 10वीं और 12वीं कक्षा में टॉप करने वाले छात्रों को सम्मानित करने के लिए आयोजित एक समारोह में मंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में भी ऐसा ही चलन देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री ने उदाहरण देते हुए बताया कि यूपीएससी की परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 11वीं रैंक हासिल करने वाला उम्मीदवार सीमावर्ती जिले पुंछ से है, जबकि डोडा और बडगाम जैसे जिलों से सफल कृषि-स्टार्टअप और उद्यमी सामने आ रहे हैं। यह इस क्षेत्र में बढ़ती प्रतिभा और लोगों की महत्वाकांक्षाओं को दर्शाता है।

50 प्रतिशत स्टार्टअप छोटे शहरों के

उन्होंने अपने संबोधन में कहा, ‘देश में लगभग 2.30 लाख स्टार्टअप में से करीब 50 प्रतिशत द्वितीय एवं तृतीय श्रेणी के शहरों में हैं। यह बड़े शहरों के बाहर भी उद्यमिता की बढ़ती भावना को दर्शाता है।’ जितेंद्र सिंह ने कहा कि आज 35 से 40 प्रतिशत स्टार्टअप महिलाओं द्वारा चलाए जा रहे हैं, जो भारत की नवोन्मेषण-आधारित विकास में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है।

सिविल सेवा के क्षेत्र में भी ऐसा ही चलन

उन्होंने कहा कि सिविल सेवा के क्षेत्र में भी ऐसा ही चलन देखने को मिल रहा है, जहां देश के कई बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले उम्मीदवार अब छोटे कस्बों और जिलों से सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह पहले के उस चलन से एक बड़ा बदलाव है, जब बड़े शहरों को ही पारंपरिक रूप से बेहतरीन शिक्षा और करियर के मौकों का मुख्य केंद्र माना जाता था।

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सुविधाओं और रोजगार के मौकों का लाभ

मंत्री ने प्रौद्योगिकी के प्रभाव पर जोर देते हुए कहा कि डिजिटल साधन और इंटरनेट कनेक्टिविटी के बड़े पैमाने पर उपलब्ध होने से देश भर के महत्वाकांक्षी युवाओं के लिए समान अवसर पैदा हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारत में 100 करोड़ से ज़्यादा स्मार्टफोन उपयोगकर्ता हैं, इसलिए अब विद्यार्थी अपनी भौगोलिक स्थिति की परवाह किए बिना, सस्ती और आसानी से उपलब्ध पठन-पाठन सुविधाओं और रोजगार के मौकों का लाभ उठा सकते हैं।

इससे पहले एक और कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ने जम्मू-कश्मीर में आयुष विभाग की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला और कहा कि इस केंद्र शासित प्रदेश में स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और आयुष सेवाओं का विस्तार करने में काफी प्रगति हुई है।

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