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नगर पंचायत क्षेत्रों में गैर-आवासीय भवनों के संपत्ति कर निर्धारण की व्यवस्था में बदलाव किया गया है। नगर विकास विभाग ने प्रदेश की सभी नगर पंचायतों के लिए गैर-आवासीय भवनों के मासिक किराए की दरों का नया वर्गीकरण लागू किया है। असाधारण गजट के अनुसार अब इसी वर्गीकरण के आधार पर संपत्तियों का वार्षिक मूल्यांकन और संपत्ति कर निर्धारित किया जाएगा। उपयोग के आधार पर तय होंगी किराया दरें नई अनुसूची में गैर-आवासीय भवनों को उनके उपयोग के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है। प्रत्येक श्रेणी के लिए अलग किराया दर निर्धारित की गई है। कुछ भवनों पर आवासीय दर के बराबर, जबकि कुछ पर उससे अधिक और कई श्रेणियों में कई गुना अधिक दर लागू होगी। स्कूल, छात्रावास और छोटी दुकानों पर आवासीय दर सबसे कम दर वाली श्रेणी में छात्रावास, सरकारी व निजी शिक्षण संस्थान, तरणताल, क्रीड़ा केंद्र, व्यायामशाला, शारीरिक स्वास्थ्य केंद्र, सांस्कृतिक प्रेक्षागृह, संगीत-नृत्य केंद्र और सूक्ष्म व लघु औद्योगिक इकाइयां शामिल हैं। मॉल के बाहर एकल पर्दे वाले सिनेमाघर तथा छोटी चाय, दूध, फल-सब्जी, फोटोस्टेट, धोबी, दर्जी और नाई की दुकानें भी इसी श्रेणी में रखी गई हैं। इन पर आवासीय भवनों के बराबर किराया दर लागू होगी। दवा दुकान और बाजार की दुकानों की दर अधिक दूसरी श्रेणी में दवा की दुकानें, सभी प्रकार के वाणिज्यिक परिसर, स्थापित बाजारों की दुकानें, टेंट हाउस, भवन निर्माण सामग्री की दुकानें और निजी कोचिंग संस्थान शामिल हैं। इन पर आवासीय भवनों की तुलना में अधिक किराया दर निर्धारित की गई है। होटल, अस्पताल और पेट्रोल पंप पर कई गुना दर तीसरी श्रेणी में सरकारी, अर्धसरकारी और निजी कार्यालय, सार्वजनिक उपक्रम, निगम व बोर्ड के कार्यालय, क्लीनिक, पॉलीक्लिनिक, डेंटल क्लीनिक, जांच केंद्र, पैथोलॉजी लैब, नर्सिंग होम और चिकित्सालय शामिल हैं। इसके अलावा तकनीकी विश्वविद्यालय, मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज, प्रबंधन व विधि संस्थान, पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी, गोदाम, सामुदायिक भवन, विवाह स्थल, सभागार, मध्यम-बड़े उद्योग, रेस्टोरेंट, होटल, पर्यटन इकाइयां, टावर, मॉल, पब, बार और भोजन के साथ मदिरा परोसने वाले वासगृह भी इसी श्रेणी में रखे गए हैं। इन पर आवासीय दर की तुलना में कई गुना अधिक किराया दर लागू होगी। बाकी भवन चौथी श्रेणी में आएंगे ऐसे गैर-आवासीय भवन जिन्हें ऊपर दी गई किसी श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है, उन्हें अंतिम श्रेणी में रखा गया है। इनके लिए भी निर्धारित नियमों के अनुसार किराया दर तय की जाएगी। नगर पंचायत को गुणांक घटाने-बढ़ाने का अधिकार अधिशासी अधिकारी कृति सिंह ने बताया कि गजट में नगर पंचायतों को निर्धारित श्रेणियों के किराया गुणांक में बदलाव का अधिकार भी दिया गया है। नगर पंचायत प्रस्ताव पारित कर निर्धारित गुणांक को घटा या बढ़ा सकती है। इसी आधार पर संबंधित संपत्तियों का वार्षिक मूल्यांकन और संपत्ति कर निर्धारण किया जाएगा।
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नगर पंचायतों में अब नए सिरे से तय होगा संपत्तिकर:गैर-आवासीय भवनों की किराया दरों का वर्गीकरण, दुकानों से होटल-पेट्रोल पंप तक अलग-अलग श्रेणियां
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