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बस्ती जिले के विक्रमजोत विकास खंड की बस्थनवां ग्राम पंचायत में बुधवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब प्रयागराज उच्च न्यायालय के आदेश पर एक जिलास्तरीय जांच टीम दूसरी बार पशु शेडों की तलाश में पहुंची। यह टीम मनरेगा के तहत निर्मित होने वाले पशु शेडों के कथित घोटाले की जांच कर रही है। जांच टीम ने लगभग पांच घंटे तक ग्राम पंचायत के राजस्व ग्राम रानीपुर और हलवइया चक में लाभार्थियों के पशु शेडों की खोज की। टीम दो दिन पहले शनिवार को भी गांव पहुंची थी। टीम के पहुंचने पर कई ग्रामीण अपने घरों में ताले लगाकर चले गए। यह मामला वित्तीय वर्ष 2020-21 से संबंधित है, जब रानीपुर बस्थनवां ग्राम पंचायत के 28 लाभार्थियों के लिए मनरेगा के तहत लगभग 73 हजार रुपये की लागत से पशु शेड बनाए जाने थे। आरोप है कि विक्रमजोत ब्लॉक के अधिकारियों, ग्राम प्रधान और फर्म संचालकों की मिलीभगत से किसी भी लाभार्थी का पशु शेड नहीं बनाया गया और न ही उन्हें इसकी रकम दी गई। यह मामला एक साल बाद तब सामने आया जब 2021-22 में बस्थनवां गांव निवासी विनोद यादव और प्रभावती देवी सहित कुछ लाभार्थियों ने खंड विकास अधिकारी, विक्रमजोत से आईजीआरएस के माध्यम से शिकायत की। उन्होंने बताया कि न तो उनके पशु शेड बने हैं और न ही उन्हें उनके पैसे मिले हैं। मामले में गठित तत्कालीन ब्लॉक स्तरीय टीम की जांच से असंतुष्ट शिकायतकर्ताओं सहित 15 लाभार्थियों ने 2023-24 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। उच्च न्यायालय के निर्देश पर, उपनिदेशक कृषि बस्ती मंडल, सीआरओ बस्ती और अधिशाषी अभियंता लोक निर्माण विभाग के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय जांच टीम रानीपुर बस्थनवां गांव पहुंची। टीम ने लाभार्थियों के घर-घर जाकर पशु शेडों की गहन पूछताछ की, लिखित बयान दर्ज किए और वीडियो रिकॉर्डिंग भी की। जांच टीम के सदस्य मिले नतीजों से हैरान दिखे। उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करने वाले ग्राम पंचायत निवासी राम किशोर, नीलम, शिवपूजन, विपदा, शिवकुमारी, गायत्री देवी, राम मनोहर, प्रभावती, राधा देवी, गायत्री, ज्ञानमती, श्री प्रसाद, सोनी, केवला और प्रभावती ने जांच टीम के सामने अपने बयान दर्ज कराए।
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हाईकोर्ट के निर्देश पर पशु शेड की जांच:बस्थनवां में लाभार्थियों के गायब शेड खोजने दूसरी बार पहुंची टीम
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