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ज्येष्ठ माह के तीसरे बड़े मंगलवार को छावनी क्षेत्र के रामजानकी मार्ग स्थित अमोढ़ा के प्राचीन चतुर्भुजी मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। इस अवसर पर महिलाओं ने लकड़ी के चूल्हे पर कड़ाही चढ़ाकर पूड़ी और लपसी का भोग चतुर्भुजी भगवान को अर्पित किया। वैसे तो हर मंगलवार को श्रद्धालु चतुर्भुज भगवान के दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन बड़े मंगलवार के दिन विशेष भीड़ देखने को मिली। छावनी, अमोढ़ा, विशेषरगंज, रूपगढ़, पूरेवेद धिरौली बाबू, जैतापुर, पूरे तिलक, शेखपुर, चरथी और देवखाल सहित कई दर्जन गांवों के श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। मंदिर परिसर में मेले जैसा माहौल था, जहां बच्चों के खिलौने, जलेबी, मिठाइयों और महिलाओं के श्रृंगार के सामान की दुकानें सजी थीं। लोगों ने जमकर खरीदारी की। चतुर्भुजी मंदिर के महंत अनिल दास महाराज ने बताया कि ज्येष्ठ माह से लेकर आषाढ़ माह के अंतिम मंगलवार को लगने वाले बुढ़वा मेले तक दो महीने तक भक्तों की अपार भीड़ रहती है। क्षेत्रीय सैकड़ों गांवों के लोग निरंतर मंदिर आते-जाते रहते हैं। महंत अनिल दास महाराज के अनुसार, चतुर्भुजी बाबा यानी चतुर्भुज भगवान से जुड़ी एक किंवदंती है। कहा जाता है कि कलियुग में भगवान साक्षात प्रकट होकर अमोढ़ा के राजा ज़ालिम सिंह की गायों का दूध पी जाते थे। जब चरवाहों ने इसका पता लगाया और राजा ने चतुर्भुज भगवान का पीछा किया, तो भगवान पृथ्वी के अंदर समाने लगे। राजा ने खुदाई शुरू कराई, तभी नीचे से आवाज़ आई कि “मैं तुम्हें पाषाण रूप में ही मिल सकूंगा।” इसके बाद चतुर्भुज भगवान दिव्य पाषाण रूप में वहीं विराजमान हो गए, जो आज पूरे क्षेत्र में चतुर्भुजी भगवान के नाम से प्रसिद्ध हैं। क्षेत्र के श्रद्धालु डॉ. राजवंत सिंह, गोपाल जी सोनी, त्यागी पाण्डेय, रामकेवल यादव, राहुल पाण्डेय, आशीष सिंह और संतोष सोनी ने बताया कि यहां नारायण भगवान सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
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तीसरे बड़े मंगलवार अमोढ़ा मंदिर में उमड़ी भक्तों की भीड़:बस्ती में महिलाओं ने चढ़ाई कड़ाही, चतुर्भुज भगवान के किए दर्शन
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