लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रदेश कॉर्पोरेशन फॉर आउटसोर्स्ड सर्विसेज की समीक्षा बैठक में दिए गए उस महत्वपूर्ण वक्तव्य का स्वागत किया है,जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि आउटसोर्सिंग व्यवस्था को तकनीक आधारित, जवाबदेह,पारदर्शी तथा कर्मचारी हितैषी बनाया जाए तथा कर्मचारियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाए। संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि एक ओर मुख्यमंत्री आउटसोर्स कर्मचारियों के हितों की रक्षा,पारदर्शी नियुक्ति व्यवस्था, एकरूप सेवा शर्तों तथा जवाबदेह प्रशासनिक तंत्र के लिए लगातार प्रयासरत हैं,वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ऊर्जा निगमों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों को यूपीकोस के दायरे में लाने में लगातार बाधाएं उत्पन्न कर रहा है। इतना ही नहीं तो आउटसोर्स संविदा कर्मियों को बड़ी संख्या में हटाया जा रहा है। संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा तथा वित्त मंत्री सुरेश खन्ना द्वारा हटाए गए आउटसोर्स एवं संविदा कर्मियों को सेवा में वापस लेने के निर्देश दिए जाने के बावजूद 25,000 से अधिक संविदा कर्मियों को अब तक कार्य पर वापस नहीं लिया गया है। इससे बिजली व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है तथा लाखों उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण विद्युत सेवा उपलब्ध कराने में कठिनाइयां उत्पन्न हो रही हैं।
ऊर्जा निगमों के आउटसोर्स कर्मचारियों को तत्काल यूपीकोस के अधीन लाया जाए:संघर्ष समिति
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