AIMIM के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी रविवार को बहराइच के मटेरा में रैली करेंगे। ओवैसी रैली में शामिल होने के लिए लखनऊ पहुंचे। एयरपोर्ट पर समर्थकों ने नारे लगाए– देखो कौन आया, शेर आया–शेर आया। असदुद्दीन ओवैसी का सपा के गढ़ बहराइच के मटेरा विधानसभा में शाम 5 से 10 बजे तक का कार्यक्रम है। मटेरा इलाके में स्थित शंकरपुर चौराहे पर जनसभा को संबोधित करेंगे। इस दौरान वह यूपी विधानसभा चुनाव में 200 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर सकते हैं। इसका इशारा शुक्रवार को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली बहराइच पहुंचे पर कही थी। उन्होंने कहा था कि करीब 200 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, हालांकि इस पर अंतिम फैसला राष्ट्रीय अध्यक्ष करेंगे। इस दौरान शौकत अली ने महाराजा सुहेलदेव को एक ‘काल्पनिक पात्र’ बताया था। शौकत अली ने कहा कि अगर महाराजा सुहेलदेव वास्तविक थे, तो जिले में उनका कोई किला या महल क्यों नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि हर राजा का महल होता है। उन्होंने सलार मसूद गाजी का भी जिक्र किया, जिनके बारे में उन्होंने कहा कि लोग उन्हें बाहरी बताते हैं, जबकि उनका जन्म राजस्थान के अजमेर में हुआ था। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि महाराजा सुहेलदेव ने कोई लड़ाई लड़ी थी, तो उनके साथ 21 अन्य राजा कौन थे और उनके नाम क्या थे? शौकत अली ने कहा कि इन सवालों का कोई जवाब नहीं है, जिससे उनकी काल्पनिक प्रकृति सिद्ध होती है। आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर उन्होंने बताया कि पार्टी बहराइच से चुनावी अभियान का शंखनाद करने जा रही है।
औवैसी ने बहराइच का मटेरा ही क्यों चुना इसकी दो वजह हैं। पहली- मटेरा विधानसभा सीट मुस्लिम बहुल मानी जाती है। इस सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की आबादी लगभग 45% है। यहाँ की कुल मतदाता संख्या लगभग 3.4 लाख से अधिक है। यहां मुस्लिम वोटरों की संख्या लगभग 1.5 लाख से 1.55 लाख के बीच है।यहां पर समाजवादी पार्टी का लगातार तीन बार से कब्जा रहा है। वर्तमान में मारिया शाह समाजवादी पार्टी से विधायक हैं। इससे पहले उनके पति यासर शाह भी दो बार इसी सीट से विधायक रह चुके हैं।
दूसरी- बहराइच में 11वीं शताब्दी में (1033-1034 ईस्वी के आसपास) महाराजा सुहेलदेव (श्रावस्ती के राजा) और महमूद गजनवी के भांजे सैयद सालार मसूद गाजी (गाजी मियां) के बीच एक ऐतिहासिक युद्ध हुआ था। यहां पर महाराज सुहेलदेव ने सालार मसूद को मार गिराया था।
गाजी मियां की मृत्यु के बाद उनकी मजार बहराइच शहर में बनाई गई। यह दरगाह क्षेत्र में एक प्रमुख ऐतिहासिक-धार्मिक स्थल है, जहाँ हर साल बड़ा उर्स और मेला लगता था। मटेरा इलाके से लगे क्षेत्र में सालार मसूद गाजी की दरगाह का प्रभाव है। सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह पर लगने वाले जेठ मेल और सालाना उर्स पर रोक लगा दी थी। मामला हाईकोर्ट पहुंचा था। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद सामान्य रूप से सभी रस्में पूरी हो सकी थीं। कौन हैं असदुद्दीन ओवैसी और क्या है उनकी पार्टी का इतिहास? ————————————
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