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निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ कलेक्ट्रेट पहुंचे अभिभावक:श्रावस्ती में फीस दोगुनी से ज्यादा बढ़ाने का आरोप; बोले- पैसे नहीं दिए तो बच्चों को क्लास से निकालने की धमकी


श्रावस्ती में निजी स्कूलों की फीस और कथित अवैध वसूली के खिलाफ मंगलवार को अभिभावकों का गुस्सा सामने आया। स्कूली बच्चों के साथ उनके परिजन कलेक्ट्रेट स्थित जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और निजी स्कूल प्रबंधन पर मनमानी फीस वसूलने का आरोप लगाया। अभिभावकों ने डीएम से शिकायत कर स्कूल प्रबंधन के खिलाफ जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि किताब, ड्रेस, ट्रांसपोर्ट और दूसरी गतिविधियों के नाम पर भी अतिरिक्त रकम ली जा रही है। फीस नहीं देने पर बच्चों को कक्षा से बाहर करने और परीक्षा में बैठने से रोकने की धमकी दी जा रही है। 1200 की फीस अब 2500 रुपए, अभिभावक परेशान अभिभावक रामकुमार वर्मा ने आरोप लगाया कि स्कूल की फीस लगातार बढ़ाई जा रही है। उन्होंने बताया कि पिछले साल 1200 रुपए फीस थी, लेकिन अब 2500 रुपए मांगे जा रहे हैं। रामकुमार के मुताबिक, फीस को लेकर स्कूल प्रबंधन से सवाल करने पर बच्चों का एडमिशन रद्द करने की बात कही जाती है। उन्होंने कहा, “हम गरीब लोग हैं। इतनी फीस कहां से लाएं? इसी वजह से डीएम साहब के पास शिकायत करने आए हैं।” क्लास में बैठने से रोकने का आरोप अभिभावकों ने आरोप लगाया कि फीस जमा नहीं करने वाले बच्चों पर दबाव बनाया जा रहा है। उन्हें कक्षा से बाहर करने और परीक्षा में बैठने से रोकने की धमकी तक दी जाती है। छात्रा प्रिया ने बताया कि शिक्षिका की ओर से फीस जमा नहीं होने पर कक्षा में नहीं आने की बात कही गई। छात्रा का कहना है कि वह पढ़ना चाहती है, लेकिन परिवार के लिए इतनी फीस देना संभव नहीं है। किताबें स्कूल से ही खरीदने का आरोप अभिभावक श्यामलाल ने स्कूल प्रबंधन पर किताबों की बिक्री में भी मनमानी का आरोप लगाया। उनका कहना है कि स्कूल में पढ़ाई के लिए निर्धारित किताबें बाजार में आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। आरोप है कि अभिभावकों को किताबें स्कूल से ही खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है और इसके लिए बाजार की तुलना में कई गुना अधिक कीमत वसूली जाती है। श्यामलाल ने कहा कि ड्रेस के लिए भी स्कूल की ओर से दबाव बनाया जाता है। ड्रेस और ट्रांसपोर्ट के नाम पर भी वसूली अभिभावकों का आरोप है कि केवल मासिक फीस ही नहीं, बल्कि ड्रेस, ट्रांसपोर्ट, किताबों और विभिन्न गतिविधियों के नाम पर भी अतिरिक्त शुल्क लिया जा रहा है। परिजनों का कहना है कि इन खर्चों का बोझ सीधे उनके घरेलू बजट पर पड़ रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए लगातार बढ़ती फीस और अन्य शुल्क चुकाना मुश्किल हो रहा है। बच्चों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे परिजन मंगलवार को कई अभिभावक अपने बच्चों के साथ जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। उन्होंने अपनी शिकायत अधिकारियों के सामने रखी और निजी स्कूल प्रबंधन की कथित मनमानी पर रोक लगाने की मांग की। अभिभावकों ने कहा कि उनका विरोध बच्चों की पढ़ाई के खिलाफ नहीं है। वे चाहते हैं कि स्कूलों में नियमों के अनुसार फीस ली जाए और किसी बच्चे को आर्थिक स्थिति के कारण पढ़ाई से वंचित न किया जाए। शिकायत पर जिला विद्यालय निरीक्षक को जांच डीएम कार्यालय के प्रतिनिधि ने बताया कि अभिभावकों की शिकायत प्राप्त हो गई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक को जांच के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों ने कहा कि जांच में यदि निजी स्कूल द्वारा अवैध वसूली या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि फीस के विवाद के कारण किसी भी बच्चे की पढ़ाई बाधित न हो।

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