निघासन-खीरी,11 जून(तरूणमित्र)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) निघासन एक बार फिर चर्चाओं में है। आरोप है कि सरकारी अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों को जांच से लेकर दवाओं तक के लिए बाहर का सहारा लेना पड़ रहा है। मरीजों का कहना है कि डॉक्टरों द्वारा अस्पताल में उपलब्ध दवाओं के बजाय बाहर की मेडिकल दुकानों से महंगी दवाएं लिखी जा रही हैं, जिससे उन्हें एक बार में 1500 से 2000 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी इस तरह की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। पूर्व सीएचसी अधीक्षक डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने मीडिया में प्रकाशित खबरों का संज्ञान लेते हुए बाहर की दवाएं लिखने पर सख्ती दिखाई थी। उन्होंने अस्पताल में अनधिकृत रूप से कार्य कर रहे लोगों को बाहर किया था तथा पैथोलॉजी केंद्रों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई भी की थी, जिससे व्यवस्थाएं सामान्य हुई थीं।
हालांकि, वर्तमान सीएचसी अधीक्षक के कार्यभार संभालने के बाद एक बार फिर पुरानी स्थिति लौटती दिखाई दे रही है। आरोप है कि अस्पताल में फिर से बाहरी लोगों की सक्रियता बढ़ गई है और मरीजों को जांच व दवाओं के लिए बाहर भेजा जा रहा है।
फ्री एम्बुलेंस सेवा पर पैसे लेने के आरोप
वही सरकार द्वारा आम जनता विशेष कर गर्भवती महिला ओर गम्भीर मरीजों निशुल्क स्वस्थ सेवा उपलब्ध कराई जा रही है एंबुलेंस सेवा पर सवाल खड़े हो रहे हैं मुंशीगढ़ निवासी अकीला बानो ने आरोप लगाया है कि उनकी बहु को अस्पताल पहुंचने के दौरान एंबुलेंस चालक ने किराए के नाम पर पैसे लिए हैं।
अस्पताल के सामने संचालित पैथोलॉजी केंद्रों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि डॉक्टरों द्वारा लिखी जाने वाली जांचों का सीधा लाभ इन पैथोलॉजी केंद्रों को मिल रहा है। मरीजों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में मुफ्त या सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं मिलने के बजाय उन्हें अतिरिक्त आर्थिक बोझ झेलना पड़ रहा है।












