नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज सुबह एक्स हैंडल पर एक सुभाषितम् साझा कर धैर्य के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि सब्र किसी भी देश की सबसे बड़ी ताकत है। यह देश को सबसे मुश्किल चुनौतियों के बीच भी एकजुट रहने और लगातार तरक्की, खुशहाली और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि चलते हुए पहाड़ भी एक युग के आखिर में हवा से हिल सकते हैं। फिर भी, पक्के इरादे वाले का स्थिर मन मुश्किल हालात में भी कभी नहीं डगमगाता। यह सुभाषितम् इस प्रकार है, चलन्ति गिरयः कामं युगान्तपवनाहताः । कृच्छ्रेऽपि न चलत्येव धीराणां निश्चलं मनः ॥
धैर्य किसी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है। इससे कठिन चुनौतियों के बीच भी देश को एकजुट रहने के साथ ही प्रगति, समृद्धि और आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।
चलन्ति गिरयः कामं युगान्तपवनाहताः।
कृच्छ्रेऽपि न चलत्येव धीराणां निश्चलं मनः।। pic.twitter.com/r98zJBGmwE
— Narendra Modi (@narendramodi) July 8, 2026
इसका अर्थ है- प्रलयकाल की भयंकर आंधी के प्रभाव से भले ही विशाल पर्वत भी अपनी जगह से हिलकर डगमगा जाएं, लेकिन गंभीर कष्ट या संकट आने पर भी धीर (वीर और समझदार) पुरुषों का मन अपने संकल्प से कभी विचलित नहीं होता। यह श्लोक सीख देता है कि विकट परिस्थितियों में भी व्यक्ति को अपना मानसिक संतुलन और सत्य का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए।












