HomeHealth & Fitnessकर्नाटक में विभाग बंटवारे पर बगावत, मंत्री रामलिंगा रेड्डी का इस्तीफा

कर्नाटक में विभाग बंटवारे पर बगावत, मंत्री रामलिंगा रेड्डी का इस्तीफा

बेंगलुरु। कर्नाटक की नई कांग्रेस सरकार में विभागों के बंटवारे के बाद सियासी घमासान शुरू हो गया है। जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने शुक्रवार को मंत्रिमंडल से इस्तीफा देकर मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व वाली सरकार को बड़ा झटका दिया। रेड्डी ने आरोप लगाया कि उन्हें बेंगलुरु शहरी क्षेत्र से जुड़ा विभाग देने का वादा किया गया था, लेकिन अंतिम समय में उन्हें जल संसाधन विभाग सौंप दिया गया।

मुख्यमंत्री को भेजे अपने इस्तीफा पत्र में रेड्डी ने लिखा कि वह अपनी अंतरात्मा के विरुद्ध काम नहीं कर सकते, इसलिए मंत्री पद से इस्तीफा दे रहे हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वह विधायक बने रहेंगे और कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे।

रेड्डी ने कहा कि वर्ष 2023 में भी उन्हें बेंगलुरु विकास विभाग दिए जाने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में परिवहन विभाग आवंटित कर दिया गया। उन्होंने दावा किया कि नई सरकार के गठन के दौरान उन्हें आश्वासन दिया गया था कि ढाई वर्ष बाद बेंगलुरु शहरी विकास से संबंधित विभाग उन्हें सौंपा जाएगा। उनके अनुसार मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और उनके भाई डी.के. सुरेश ने व्यक्तिगत रूप से यह भरोसा दिलाया था।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद वादा पूरा नहीं किया गया, जिसके चलते उन्होंने मंत्री पद छोड़ने का फैसला लिया। उन्होंने कहा कि पांच दशक से अधिक लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने कभी किसी मुख्यमंत्री से विशेष विभाग की मांग नहीं की, लेकिन इस बार किए गए वादे से पीछे हटना उनके लिए स्वीकार्य नहीं था।

अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए रेड्डी ने बताया कि उन्होंने 1973 में एनएसयूआई से छात्र राजनीति शुरू की थी और नौ बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। वह जयनगर और बीटीएम लेआउट समेत बेंगलुरु के कई निर्वाचन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। साथ ही वीरप्पा मोइली, एस.एम. कृष्णा, धर्म सिंह और सिद्दारमैया सरकारों में मंत्री के रूप में भी काम कर चुके हैं।

रेड्डी ने अपने कार्यालय में समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में इस्तीफे पर हस्ताक्षर किए। इस दौरान कुछ नेताओं ने उनसे फैसला वापस लेने का आग्रह भी किया, लेकिन उन्होंने अपने निर्णय पर कायम रहने का संकेत दिया। रेड्डी के इस्तीफे को मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार सरकार के लिए शुरुआती दौर का बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। विभागों के बंटवारे को लेकर पैदा हुआ यह विवाद अब कांग्रेस नेतृत्व के लिए नई चुनौती बनता दिखाई दे रहा है।

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