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हाईकोर्ट में भोजशाला विवाद पर हुई नियमित सुनवाई, वसंत पंचमी-जुमे पर टकराव रोकने की मांग

इंदौर। मध्य प्रदेश के धार जिला मुख्यालय स्थित ऐतिहासिक भोजशाला से जुड़े विवाद को लेकर दायर याचिकाओं पर उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में शुक्रवार को हुई नियमित सुनवाई के दौरान आवेदक अंतर सिंह यादव, अनवर हुसैन, मजरुल्ला खान, नंदराम परमार, पुरुषोत्तम हिरवले, रामनारायण धाकड़ और रियाज मोहम्मद खान (सभी निवासी धार) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक चितले ने पक्ष रखा।

अधिवक्ता चितले ने अदालत को बताया कि भोजशाला एक संरक्षित ऐतिहासिक स्मारक है, जिसका धार्मिक उपयोग हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों द्वारा किया जाता रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि वसंत पंचमी और शुक्रवार एक ही दिन पड़ने की स्थिति में पूर्व में कई बार तनाव, झड़प और टकराव की स्थिति बनी है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से मांग की गई कि भविष्य में दोनों समुदायों के बीच टकराव की स्थिति न बने, इसके लिए उच्च स्तरीय समिति/आयोग गठित करने और केंद्र व राज्य शासन को आवश्यक विधायी प्रावधान या नियम बनाने के निर्देश दिए जाएं, ताकि विवाद की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

इस पर उच्च न्यायालय ने टिप्पणी की कि यह अलग याचिका है, जिसमें सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की मांग की गई है। भारतीय संविधान के तहत हम सभी धर्मों को साथ लेकर चलते हैं। साथ ही मामले में आगे की सुनवाई अगले दिन जारी रखने की बात कही।

सुनवाई के दौरान एक इंटरविनर द्वारा बहस की अनुमति मांगे जाने पर अदालत ने कहा कि न्यायालय ऐसा मंच नहीं है जहां हर कोई अपनी मांग लेकर उपस्थित हो। यदि किसी याचिका में ठोस आधार (सब्सटेंस) नहीं होगा तो उसे नहीं सुना जाएगा।

एएसआई के अधिवक्ता सुनील जैन को न्यायालय ने पक्षकार बताते हुए अपनी रिपोर्ट या पक्ष प्रस्तुत करने की अनुमति दी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सुनवाई लगातार जारी रखी जाएगी। अंतर सिंह एवं अन्य की ओर से ए़डवोकेट चितले अगली सुनवाई में अपनी दलीलें जारी रखेंगे।

 

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