HomeHealth & Fitnessबिजली कर्मियों का वेतन रोकने पर संघर्ष समिति का कड़ा विरोध

बिजली कर्मियों का वेतन रोकने पर संघर्ष समिति का कड़ा विरोध

 

  • बिजली कर्मियों में भारी आक्रोश

लखनऊ l विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने कहा है कि बिजली कर्मियों पर उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के साथ बिजली कर्मियों को एक्ट के तहत मिल रही रियायती बिजली की सुविधा समाप्त करने के की दृष्टि से केस्को में बिजली कर्मियों के वेतन रोकने का आदेश पूरी तरह गैर कानूनी है और ऐसे आदेश से बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा फूट पड़ा है ।

संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मियों को रियायती बिजली की सुविधा इलेक्ट्रिसिटी रिफॉर्म एक्ट 1999, यूपी ट्रान्सफर स्कीम 2000 और इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 के प्राविधानों के अनुसार मिल रही है। इसमें कोई भी छेड़छाड़ इन अधिनियमों का उल्लंघन है जिसे कदापि स्वीकार नहीं किया जायेगा।

संघर्ष समिति ने बताया कि इलेक्ट्रिसिटी रिफॉर्म एक्ट 1999 के सेक्शन 23(7) में साफ लिखा है कि 14 जनवरी 2000 को बिजली कर्मियों को मिल रही रियायती बिजली की सुविधा किसी भी स्थिति में कमतर नहीं होगी। यू पी ट्रान्सफर स्कीम 2000 के सेक्शन 12(बी) में इसे पुनः लिखा गया है और इस सुविधा को टर्मिनल बेनिफिट्स बताया गया है । इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 के सेक्शन 133(2) में इसी भावना को प्रतिध्वनित किया गया है। 

संघर्ष समिति ने इस संबंध में कई बार पॉवर कार्पोरेशन के चेयरमैन को पत्र भेजकर इन सभी अधिनियमों का हवाला देते हुए मांग की है कि यदि किसी भी कर्मचारी या अधिकारी पर जबर्दस्ती मीटर लगाने का दबाव बनाया गया अथवा कोई प्रतिकूल कार्यवाही की गई तो इसकी तीखी प्रतिक्रिया होगी जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी। 

संघर्ष समिति ने कहा कि इसके बावजूद केस्को प्रबंधन ने बड़ी संख्या में बिजली कर्मियों का जुलाई माह का वेतन आज 6 अगस्त तक भी नहीं दिया और उसके पीछे कारण यह बताया जा रहा है कि उनके घरों पर मीटर नहीं लगा है इसलिए वेतन नहीं दिया जाएगा। संघर्ष समिति ने इसे पूरी तरह गैर कानूनी बताया है और कहा है कि केस्को की संघर्ष समिति के पदाधिकारियों से तत्काल वार्ता की जाए अन्यथा की स्थिति में केस्को में किसी भी औद्योगिक अशांति की पूरी जिम्मेदारी केस्को के प्रबंध निदेशक की होगी।

संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मी मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप लगातार बिजली व्यवस्था सुधार में जुटे हुए हैं किंतु शीर्ष प्रबंधन द्वारा उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों का वापस ना लेना और नए-नए ढंग से उत्पीड़न की इन कार्रवाइयों से बिजली कर्मियों का गुस्सा बढ़ रहा है।

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