लखनऊ। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि किसी भी राष्ट्र की पहचान उसके महापुरुषों, उसके इतिहास और उसकी संस्कृति से होती है। पिछले पाँच वर्षों में प्रदेश में लगभग 43 महापुरुषों, राष्ट्रनायकों एवं संत-महात्माओं की प्रतिमाएँ स्थापित की जा चुकी हैं। इसके अतिरिक्त 14 प्रतिमाएँ पूर्ण होकर स्थापना के लिए तैयार हैं, जिन्हें एक-दो माह में स्थापित किया जाएगा। वहीं 17 अन्य प्रतिमाओं के निर्माण को प्रशासनिक स्वीकृति मिलगयी है जिनका भी निर्माण कार्य प्रगति पर है।
पर्यटन मंत्री ने बताया कि वीरता और स्वाभिमान के प्रतीक महाराणा प्रताप की साढ़े बारह फीट ऊँची अश्वारोही कांस्य प्रतिमाएँ एटा, बलिया, फिरोजाबाद तथा सिरसागंज सहित विभिन्न स्थानों पर स्थापित की जा चुकी हैं। वाराणसी एवं मुरादाबाद में उनकी प्रतिमाएँ स्थापना के लिए तैयार हैं, जबकि देवलास (मऊ) एवं बाराबंकी में उनका निर्माण कार्य चल रहा है। इसी प्रकार सम्राट पृथ्वीराज चौहान, छत्रपति शिवाजी महाराज तथा रानी लक्ष्मीबाई की साढ़े बारह फीट ऊँची अश्वारोही कांस्य प्रतिमाओं की स्थापना भी प्रदेश के विभिन्न जनपदों में की जा रही है।
उन्होंने बताया कि लखनऊ स्थित राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय तथा भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की 65-65 फीट ऊँची भव्य प्रतिमाएँ स्थापित की गई हैं। गुरु गोरखनाथ की साढ़े बारह फीट ऊँची प्रतिमा गोरखपुर हवाई अड्डे पर स्थापित किए जाने हेतु तैयार है। सरदार वल्लभभाई पटेल की साढ़े बारह फीट ऊँची प्रतिमाएँ प्रतापगढ़ एवं मिजार्पुर में स्थापित की जाएँगी। इसका उद्देश्य केवल प्रतिमाओं का निर्माण कराना नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास, राष्ट्रभक्ति, त्याग, शौर्य, सामाजिक समरसता से जोड़ना है।












