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बिना जमीन किसान बने, करोड़ों की टैक्स छूट डकारी, 300 संदिग्ध मामले पकड़े गए

  • फर्जी कृषि आय दिखाकर 2,038 करोड़ की छूट का दावा 

नई दिल्ली। कृषि आय पर मिलने वाली कर छूट की आड़ में देश में बड़े स्तर पर कर चोरी और काले धन को वैध बनाने के खेल का खुलासा हुआ है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड की जांच में सामने आया है कि कई लोगों ने बिना खेती और बिना जमीन के ही खुद को किसान बताकर करोड़ों रुपये की आय को कृषि आय घोषित किया और भारी कर छूट हासिल कर ली। शुरुआती जांच में ऐसे 300 से अधिक संदिग्ध मामलों की पहचान की गई है, जिनमें 50 लाख रुपये से लेकर 400 करोड़ रुपये तक की कृषि आय दिखाई गई।

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जिन लोगों ने इतनी बड़ी कृषि आय घोषित की, उनके नाम पर भूमि रिकॉर्ड में कोई खेती योग्य जमीन तक दर्ज नहीं मिली। विभागीय अधिकारियों के अनुसार इन मामलों में करीब 2,038 करोड़ रुपये की कर छूट का दावा किया गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह सिर्फ शुरूआती आंकड़ा है और डेटा विश्लेषण का दायरा बढ़ने के साथ ऐसे मामलों की संख्या और बढ़ सकती है।

आयकर विभाग की जांच में यह भी सामने आया कि कई लोगों ने जमीन बेचने से हुए लाभ को कृषि आय बताकर कर बचाने की कोशिश की। कुछ मामलों में केवल कागजों पर खेती दिखाई गई, जबकि जमीन पर वास्तविक कृषि गतिविधियों के कोई प्रमाण नहीं मिले। अधिकारियों का कहना है कि कई करदाताओं ने अघोषित आय को कृषि आय के रूप में दिखाकर उसे वैध बनाने का प्रयास किया। यही वजह है कि अब इस पूरे नेटवर्क को गंभीर आर्थिक गड़बड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

पूरे मामले में आधुनिक तकनीक की अहम भूमिका रही। आयकर विभाग ने डेटा विश्लेषण मंच ‘सक्षम’ के जरिए उन आयकर विवरणों को चिन्हित किया, जिनमें असामान्य रूप से अधिक कृषि आय घोषित की गई थी। इसके बाद इन मामलों का मिलान भूमि अभिलेख, बैंक लेनदेन, संपत्ति रिकॉर्ड और अन्य सरकारी आंकड़ों से किया गया। जांच एजेंसियों ने सैटेलाइट चित्रों की मदद से यह भी पता लगाया कि जिन जमीनों पर खेती का दावा किया गया, वहां वास्तव में खेती हो भी रही थी या नहीं। कई स्थानों पर खेती के बजाय खाली जमीन, निर्माण कार्य या अन्य गतिविधियां मिलीं।

यह पूरा मामला वित्त वर्ष 2020-21 से 2022-23 के बीच दाखिल आयकर विवरणों से जुड़ा है। विभाग ने अब संदिग्ध करदाताओं को नोटिस जारी करने शुरू कर दिए हैं और उनसे आय के स्रोत तथा कृषि गतिविधियों के प्रमाण मांगे जा रहे हैं। गलत जानकारी देने वालों के खिलाफ कर वसूली के साथ दंडात्मक कार्रवाई की भी तैयारी चल रही है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने साफ किया है कि सरकार का उद्देश्य वास्तविक किसानों को परेशान करना नहीं है। 

कार्रवाई केवल उन लोगों पर होगी जो कृषि आय की आड़ में कर चोरी कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा विश्लेषण और सैटेलाइट आधारित निगरानी को और मजबूत किया जाएगा, ताकि कर व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़े और फर्जी दावों पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।

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