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राज्यपाल ने पोछें गोल्ड मेडलिस्ट के आंसू:संघर्षों को याद कर भावुक हुई छात्रा, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में पहुंचीं


सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु का 10वां दीक्षांत समारोह सोमवार को गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में आयोजित समारोह में शिक्षा, शोध, नवाचार, पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण पर विशेष जोर दिया गया। राज्यपाल ने पोंछे स्वर्ण पदक विजेता छात्रा के आंसू समारोह का सबसे भावुक क्षण तब आया, जब स्वर्ण पदक विजेता छात्रा उषा जायसवाल मंच पर अपने संघर्षों का जिक्र करते हुए भावुक हो गईं। उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। यह देखकर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल अपनी सीट से उठीं और टिश्यू पेपर से उनके आंसू पोंछते हुए उन्हें ढांढस बंधाया। इसके बाद पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। रविवार शाम पहुंचीं राज्यपाल, सांस्कृतिक संध्या से हुआ स्वागत राज्यपाल आनंदीबेन पटेल रविवार शाम करीब 6:30 बजे सिद्धार्थ विश्वविद्यालय परिसर पहुंचीं। उनके स्वागत में विश्वविद्यालय प्रशासन ने सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया। सोमवार सुबह 10 बजे वंदे मातरम्, राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के साथ मुख्य समारोह का शुभारंभ हुआ। कई जनप्रतिनिधि और शिक्षाविद रहे मौजूद समारोह में प्रसिद्ध पर्यावरणविद् डॉ. मधुलिका अग्रवाल मुख्य अतिथि और उत्तर प्रदेश सरकार की उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी विशिष्ट अतिथि रहीं। कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय, डुमरियागंज सांसद जगदंबिका पाल, शोहरतगढ़ विधायक विनय वर्मा, कपिलवस्तु विधायक श्यामधनी राही समेत कई जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद् और अधिकारी मौजूद रहे। पर्यावरण संरक्षण को बताया सबसे बड़ी चुनौती अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज की सबसे बड़ी चुनौती है। यदि जल, जंगल और जमीन को बचाने के लिए समय रहते गंभीर प्रयास नहीं किए गए तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर संकटों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने विद्यार्थियों से कम से कम एक पौधा लगाने, जल संरक्षण के लिए जनजागरण करने और समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने वाले संस्थान नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन के केंद्र भी हैं। महिला सशक्तिकरण पर दिया विशेष जोर राज्यपाल ने कहा कि समाज में बेटा और बेटी दोनों समान हैं। दोनों को समान अवसर और सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब बेटियां आगे बढ़ती हैं तो परिवार, समाज और राष्ट्र भी आगे बढ़ता है। उषा ने सुनाई संघर्ष से सफलता तक की कहानी स्वर्ण पदक विजेता उषा जायसवाल ने कहा कि जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कॉमर्स के क्षेत्र में अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश की, लेकिन परिस्थितियों ने कई बार रास्ता रोका। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी, एमबीए की पढ़ाई पूरी की और स्वर्ण पदक हासिल किया। अपनी संघर्षगाथा सुनाते-सुनाते वह भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख सकीं और रो पड़ीं। इस पर राज्यपाल ने उन्हें संभालते हुए आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
37 स्वर्ण पदक किए गए प्रदान दीक्षांत समारोह में कुल 37 स्वर्ण पदक प्रदान किए गए, जिनमें 13 डोनर स्वर्ण पदक शामिल रहे। विशेष बात यह रही कि 13 विद्यार्थियों ने दो या उससे अधिक स्वर्ण पदक हासिल किए। विभिन्न संकायों के मेधावी छात्र-छात्राओं को उपाधियां और पदक प्रदान किए गए, जबकि पीएचडी की उपाधि प्राप्त करने वाले शोधार्थियों को भी सम्मानित किया गया। चार शिक्षकों का सम्मान, आठ पुस्तकों का लोकार्पण विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षा क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले चार शिक्षकों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर शिक्षकों द्वारा लिखित आठ पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। साथ ही दीक्षा उत्सव की झलकियों पर आधारित लघु फिल्म का भी प्रदर्शन किया गया।
‘किलकारी’ बालगृह और डिजिटल लाइब्रेरी का उद्घाटन राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के नव निर्मित बालगृह ‘किलकारी’ का लोकार्पण किया तथा दिव्यांगजन सुविधाओं से युक्त डिजिटलाइज्ड लाइब्रेरी का उद्घाटन भी किया। विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गांवों के बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और सामाजिक जागरूकता पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर सभी का मन मोह लिया। विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया तथा आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को किट वितरित की गई। कुलपति बोलीं- यह केवल उपाधि वितरण का समारोह नहीं कुलपति प्रो. कविता शाह ने कहा कि 10वां दीक्षांत समारोह केवल उपाधि वितरण का अवसर नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की मेहनत, शिक्षकों के समर्पण और विश्वविद्यालय की सामाजिक प्रतिबद्धता का उत्सव है। उन्होंने कहा कि सिद्धार्थ विश्वविद्यालय शिक्षा, शोध, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्र में लगातार नई उपलब्धियां स्थापित कर रहा है तथा भविष्य में भी उत्कृष्टता की नई ऊंचाइयों को छूता रहेगा। समारोह का सबसे यादगार पल बना भावुक दृश्य पूरे समारोह में शिक्षा, संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक उत्तरदायित्व का सुंदर संगम देखने को मिला। हालांकि सबसे अधिक चर्चा उस भावुक पल की रही, जब राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने संघर्षों से सफलता तक पहुंची स्वर्ण पदक विजेता उषा जायसवाल के आंसू पोंछकर उन्हें नई ऊर्जा और आत्मविश्वास दिया। यह दृश्य बेटियों के सम्मान, संवेदनशीलता और प्रोत्साहन का सशक्त संदेश बन गया।

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