नई दिल्ली: गाजा में इसराइल के सैन्य अभियान पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) की जांच रिपोर्ट को लेकर विवाद गहरा गया है। इसराइल ने रिपोर्ट को पक्षपातपूर्ण बताते हुए खारिज कर दिया है। इस बीच, जांच आयोग के अध्यक्ष और ओडिशा हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एस. मुरलीधर ने इन आरोपों पर प्रतिक्रिया दी है।
एक साक्षात्कार में जस्टिस मुरलीधर ने कहा कि कई लोग पूछते हैं कि रिपोर्ट तैयार करते समय इसराइली सैनिकों से बातचीत क्यों नहीं की गई। इस पर उन्होंने कहा, “इसराइली सैनिकों ने अपनी बात सिर्फ हमसे नहीं, बल्कि पूरी दुनिया से खुद कही है। उन्होंने बच्चों की हत्या के बाद उसके वीडियो बनाकर सार्वजनिक किए।”
क्या कहती है रिपोर्ट?
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि गाजा में सैन्य अभियान के दौरान फिलिस्तीनी बच्चों को जानबूझकर निशाना बनाया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन हमलों का उद्देश्य गाजा में फिलिस्तीनी समुदाय के भविष्य और अस्तित्व को कमजोर करना था।
हालांकि, इसराइल ने रिपोर्ट के सभी आरोपों को खारिज करते हुए इसे एकतरफा और तथ्यों से परे बताया है।
कौन हैं जस्टिस एस. मुरलीधर?
जस्टिस एस. मुरलीधर भारत के वरिष्ठ न्यायविद हैं। वह ओडिशा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं और सेवानिवृत्ति के बाद फिर से वकालत कर रहे हैं। उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने सीनियर एडवोकेट का दर्जा भी दिया है।
नवंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने उन्हें पूर्वी यरुशलम, कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों और इसराइल से जुड़े मामलों की जांच के लिए गठित स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया था।
यह रिपोर्ट उसी आयोग की जांच पर आधारित है, जिसे लेकर इस समय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस जारी है।












