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टीएमसी संकट गहराया, काकोली घोष दस्तिदार के बेटे ने ममता बनर्जी को भेजा लीगल नोटिस

पश्चिम बंगाल: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में चल रहे संकट के बीच एक नया विवाद सामने आया है. बारासात से टीएमसी सांसद डॉ. काकोली घोष दस्तिदार के बेटे डॉ. बैद्यनाथ घोष दस्तिदार ने पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी और चार अन्य प्रमुख नेताओं को लीगल नोटिस भेजा है.

बैद्यनाथ ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने बारासात विधानसभा क्षेत्र से कभी कोई चुनाव टिकट नहीं मांगा था. साथ ही उन्होंने टीएमसी नेताओं द्वारा अपने और अपने परिवार के ऊपर लगाए आरोपों को भी मनगढ़ंत और बेबुनियाद बताया है.

वहीं, सोमवार को तामील होने वाले इस नोटिस में उन्होंने 15 दिनों के अंदर सार्वजनिक माफी और बयानों को वापस लेने की मांग की है, ऐसा न करने की सूरत में वह मानहानि की सख्त कानूनी कार्यवाही शुरू करेंगे.

लीगल नोटिस के अनुसार, प्रतिष्ठित मनोचिकित्सक डॉ. बैद्यनाथ ने साफ किया है कि उनकी कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं थी. उन्होंने बारासात विधानसभा क्षेत्र से कभी कोई राजनीतिक नामांकन या टिकट नहीं मांगा था. इस संबंध में सोशल मीडिया या मीडिया इंटरव्यू में किए गए दावे पूरी तरह झूठे और गुमराह करने वाले हैं.

उन्होंने नोटिस में खुलासा किया कि इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (IPAC) के प्रतिनिधियों और बारासात जिला टीएमसी के तत्कालीन अध्यक्ष सोहम पाल ने खुद व्हाट्सएप और कॉल के माध्यम से डॉ. बैद्यनाथ से कई बार संपर्क किया था. उन्होंने डॉ. बैद्यनाथ को बारासात से चुनाव लड़ने और स्वास्थ्य शिविरों में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया था.

बैद्यनाथ घोष दस्तिदार ने पूर्व विधायक सोनाली गुहा के उस बयान पर भारी नाराजगी और आपत्ति व्यक्त की है, जिसमें कहा गया था कि वो, उनके भाई और उनकी मां डॉ. काकोली घोष दस्तिदार नियमित रूप से शराब का सेवन करते हैं. डॉक्टर बैद्यनाथ ने इस बयान को पूरी तरह गलत बताते हुए इसे उनके चरित्र को ठेस पहुंचाने की साजिश करार दिया है.

एडवोकेट पूजा शुक्ला के माध्यम से जारी किए गए इस नोटिस में सभी पांच नेताओं- ममता बनर्जी, सांसद कल्याण बनर्जी, सांसद सौगत रॉय, सांसद महुआ मोइत्रा और सोनाली गुहा से भविष्य में बैद्यनाथ के खिलाफ किसी भी तरह की झूठी बयानबाजी बंद करने, भविष्य में उनके या उनके परिवार के बारे में कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष टिप्पणी न करने को कहा गया है.

साथ ही नोटिस में चेतावनी दी गई है कि यदि 15 दिनों में सार्वजनिक स्पष्टीकरण और माफी नहीं मांगी गई तो वह सिविल, क्रिमिनल और अन्य उपलब्ध कानूनी उपायों का सहारा लेंगे.

 

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