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25 मई तक विकास कार्य पूरे करने का अल्टीमेटम:कार्यकाल समाप्ति से पहले पंचायतों में बढ़ी प्रशासनिक हलचल


सिद्धार्थनगर जिले में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त होने वाला है। इसे देखते हुए जिले की ग्राम पंचायतों में प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। पंचायत विभाग ने सभी ग्राम पंचायतों को 25 मई तक स्वीकृत विकास कार्य पूरे करने और लंबित भुगतान निपटाने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों के बाद ग्राम पंचायत सचिवों, पंचायत सहायकों और ग्राम प्रधानों में हलचल बढ़ गई है। कई पंचायतों में अधूरे पड़े इंटरलॉकिंग, नाली, स्ट्रीट लाइट, सामुदायिक शौचालय, पंचायत भवन मरम्मत और सफाई व्यवस्था जैसे विकास कार्यों को तेजी से पूरा कराया जा रहा है। कार्यकाल समाप्त होने से पहले सभी कार्यों का रिकॉर्ड और भुगतान प्रक्रिया पूरी करने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों और सचिवों के बीच लगातार बैठकें हो रही हैं। निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ग्राम पंचायतों में केवल उन्हीं कार्यों को कराया जाए, जिनके लिए खातों में पर्याप्त धनराशि उपलब्ध हो। बजट के बिना या उपलब्ध राशि से अधिक कार्य कराने पर भविष्य में भुगतान संबंधी विवाद उत्पन्न हो सकते हैं। प्रशासन को आशंका है कि कार्यकाल समाप्ति के बाद यदि भुगतान लंबित रहा या वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें सामने आईं, तो पंचायत स्तर पर विवादों और शिकायतों की संख्या बढ़ सकती है। इसी आशंका के मद्देनजर पंचायत विभाग ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखने पर विशेष जोर दिया है। विभाग ने साफ तौर पर कहा है कि यदि पंचायत खाते में उपलब्ध धनराशि से अधिक कार्य कराया गया या भुगतान को लेकर कोई विवाद उत्पन्न हुआ, तो संबंधित ग्राम पंचायत सचिव की जिम्मेदारी तय की जाएगी। इसके अतिरिक्त, सभी अभिलेख, माप पुस्तिका, भुगतान फाइल और विकास कार्यों के दस्तावेज समय पर व्यवस्थित करने के निर्देश भी दिए गए हैं सूत्रों के अनुसार कई ग्राम पंचायतों में कार्यकाल समाप्ति से पहले भुगतान कराने और अधूरे कार्यों को पूरा दिखाने की जल्दबाजी भी देखी जा रही है। कुछ पंचायतों में ठेकेदारों और पंचायत प्रतिनिधियों के बीच बकाया भुगतान को लेकर बातचीत तेज हो गई है। वहीं प्रशासनिक स्तर पर भी पंचायतों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है, ताकि अंतिम समय में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या फर्जी भुगतान की शिकायत सामने न आए।
ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने से पहले पंचायतों में बढ़ी इस सक्रियता को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में भी चर्चाएं तेज हैं। लोगों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि कार्यकाल खत्म होने से पहले पंचायतों में कितने विकास कार्य धरातल पर पूरे हो पाते हैं और कितने मामलों में भुगतान एवं गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े होते हैं।

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