सिद्धार्थनगर जिले के बांसी विकास खंड के बड़हरा गांव में ग्रामीणों ने मृत भोज का बहिष्कार करने का सामूहिक निर्णय लिया है। उन्होंने इस प्रथा को एक सामाजिक कुरीति बताया, जिसका उद्देश्य समाज से इसे समाप्त करना है। गांव के निवासी रामू ने बताया कि बृहस्पतिवार को उनकी बहू संजू देवी का प्रसव के दौरान निधन हो गया था। इस दुखद घटना के बाद, परिवार ने अंतिम संस्कार के दौरान मृत भोज न कराने का फैसला किया। परिवार का मानना था कि ऐसी दुखद घटना के बाद भोज आयोजित करना उचित नहीं होगा। उन्होंने अपनी यह बात समाज के सामने रखी, जिसे अन्य ग्रामीणों का पूर्ण समर्थन मिला। इसके परिणामस्वरूप, सभी ने मिलकर मृत भोज का बहिष्कार करने का निर्णय लिया। सोमवार को स्वर्गीय संजू देवी की आत्मा की शांति के लिए बौद्ध धर्म के विधि-विधान से शांति पाठ और पूजा का आयोजन किया गया। बौद्ध भंते ने यह शांति पाठ संपन्न कराया। इस अवसर पर जिले से आए महेंद्र कुमार बौद्ध ने मृत भोज को समाज का अभिशाप बताते हुए इसके पूर्ण बहिष्कार का आह्वान किया। डॉ. आर.के. निगम और शिवा ने बताया कि वे पहले भी कई ऐसे कार्यक्रमों में मृत भोज का बहिष्कार कर चुके हैं। इस दौरान लोगों ने भगवान बुद्ध को नमन किया। स्वर्गीय संजू देवी के पति शनि ने उन्हें पूरे सम्मान के साथ श्रद्धा सुमन अर्पित किए। उपस्थित सभी लोगों ने भगवान बुद्ध को स्मरण करते हुए शनि के लिए करुणा और सहनशक्ति की कामना की। स्वर्गीय संजू देवी के विचारों और आदर्शों से प्रेरित परिवार ने उनकी स्मृति में बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर और तथागत गौतम बुद्ध की पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर पंचशील और त्रिशरण भी ग्रहण किया गया। ग्राम प्रधान रामेश्वर श्रीवास्तव ने पुष्टि की कि गांव के अधिकतर लोगों ने मृत भोज का बहिष्कार किया है, जिसमें पूरब टोला के शत-प्रतिशत लोग शामिल हैं। इस कार्यक्रम में राहुल कुमार, राजेश, मुरली, रामलौटन, सुग्रीम, अशोक कुमार, सत्तन, सिद्धार्थ कुमार, प्रभात कुमार, पवन, पंकज, अमन, सत्यपाल, यशपाल, रोशनी, प्रज्ञा, आदर्श, आरव सहित कई ग्रामीण उपस्थित रहे।
सिद्धार्थनगर के बड़हरा गांव में मृत भोज का बहिष्कार:ग्रामीणों ने इसे सामाजिक कुरीति मानते हुए लिया सामूहिक निर्णय
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