सु्प्रीम कोर्ट ने देश में मतदान को अनिवार्य बनाने के निर्देश से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ऐसे फैसले नीतिगत क्षेत्रों में आते हैं, जिसके संबंध में न्यायपालिका इसके लिए आदेश जारी नहीं कर सकती।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह अपनी शिकायत संबंधित पक्षों के समक्ष रखें। सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका, अजय गोयल ने दायर की है।
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सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जानबूझकर मतदान न करने वालों के खिलाफ दंडात्मक प्रावधान लागू करने और मतदान को अनिवार्य बनाने जैसी मांगों पर अदालत विचार नहीं कर सकती। याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की थी कि जो लोग जानबूझकर मतदान नहीं करते, उनके लिए सरकारी सुविधाओं पर प्रतिबंध लगाने संबंधी दिशानिर्देश जारी किए जाएं।
चीफ जस्टिस ने क्या कहा?
CJI सूर्यकांत ने कहा, ‘लोकतंत्र कानूनी दबाव से नहीं, बल्कि जन-जागरूकता से फूलता-फलता है। एक ऐसे देश में, जो कानून के शासन पर चलता है और लोकतंत्र में विश्वास करता है और जहां हमने 75 वर्षों में इस पर भरोसा दिखाया है, हर व्यक्ति से उम्मीद की जाती है कि वह मतदान करने जाए। अगर वे नहीं जाते तो नहीं जाते। जरूरत जागरूकता की है, हम उन्हें मजबूर नहीं कर सकते।’
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याचिकाकर्ता ने क्या सुझाव दिया?
याचिकाकर्ता ने भी सुझाव दिया कि अदालत निर्वाचन आयोग को गैर-मतदाताओं के लिए सरकारी सुविधाओं पर रोक लगाने का निर्देश दे। इस पर प्रधान न्यायाधीश ने सवाल उठाया कि घर पर रहने को अपराध कैसे बनाया जा सकता है।
CJI सूर्यकांत ने कहा, ‘क्या हम उनकी गिरफ्तारी का निर्देश दें? अगर कोई नागरिक मतदान करने नहीं जाता, तो हम क्या कर सकते हैं?’
कोर्ट ने क्या मुश्किलें गिनाईं?
सुप्रीम कोर्ट ने अनिवार्य मतदान कानून की व्यावहारिक कठिनाइयों का भी जिक्र किया। कहा कि चुनाव के दिन कई नागरिक अपने काम में व्यस्त रहते हैं, जिनमें जज भी शामिल हैं। चीफ जस्टिस ने कहा, ‘अगर हम इसे स्वीकार कर लें तो जस्टिस बागची को कामकाजी दिन होने के बावजूद मतदान के लिए पश्चिम बंगाल जाना पड़ेगा।’ जस्टिस बागची ने कहा,’न्यायिक कार्य भी महत्वपूर्ण है।’
बेंच ने कहा, ‘अगर कोई गरीब व्यक्ति कहे कि मुझे अपनी मजदूरी कमानी है, मैं मतदान कैसे करूं? तो हम उन्हें क्या जवाब देंगे?’
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याचिकाकर्ता ने क्या कहा?
याचिकाकर्ता ने कहा कि चुनाव आयोग को एक समिति गठित करने का निर्देश दिया जाना चाहिए, जो मतदान न करने वालों पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव तैयार करे। इसके जवाब में चीफ जस्टिस ने कि ये मुद्दे, नीतिगत क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं।












