
इजरायल की राजनीति में इस समय एक बड़ा भूचाल देखने को मिल रहा है। देश की संसद (नेसेट) को भंग करने की दिशा में बुधवार को एक बहुत बड़ा कदम उठाया गया, जब सांसदों ने संसद भंग करने वाले विधेयक के पक्ष में भारी मतदान किया। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद देश में निर्धारित समय से काफी पहले आम चुनाव होने की संभावना पूरी तरह से बढ़ गई है। जिससे बेंजामिन नेतन्याहू की कुर्सी पर खतरा मंडराने लगा है।
यह घटनाक्रम प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है, जो पहले से ही कई मोर्चों पर चौतरफा दबाव झेल रहे हैं। एक तरफ जहां उनकी दक्षिणपंथी गठबंधन सरकार पूरी तरह कमजोर पड़ती दिख रही है, वहीं दूसरी ओर अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स पार्टियों और आम जनता में भी उनके नेतृत्व के खिलाफ नाराजगी चरम पर पहुंच गई है।
यह भी पढ़ें: एक हफ्ते में दूसरी बार ईरान क्यों पहुंचे मोहसिन नकवी, क्या खिचड़ी पक रही?
संसद भंग करने के पक्ष में गिरे 110 वोट
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायल की 120 सदस्यीय संसद (नेसेट) में करीब 110 सांसदों ने संसद भंग करने वाले बिल के समर्थन में एक साथ वोट किया। अब इस बिल को एक खास समिति के पास भेजा जाएगा, जहां अगली चुनाव तारीख तय की जाएगी। इसके बाद इस बिल को कानून बनने से पहले संसद में तीन और चरणों से गुजरना होगा। अगर इसे आखिर में मंजूरी मिल जाती है तो इजरायल के संविधान के मुताबिक 90 दिनों के अंदर आम चुनाव कराना जरूरी होगा।
सहयोगियों की बगावत से हिला गठबंधन
बेंजामिन नेतन्याहू इजरायल के इतिहास में सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले नेता हैं लेकिन इस बार उनकी कुर्सी पर खतरा मंडरा रहा है। इस समय वह ईरान, लेबनान के हिज्बुल्लाह और गाजा के साथ जारी युद्ध को लेकर रक्षा विशेषज्ञों के निशाने पर हैं।
यह भी पढ़ें: भारत और इटली के रिश्ते होंगे और मजबूत, मोदी और मेलोनी ने उठाया बड़ा कदम
इसके अलावा शास और यूनाइटेड तोराह ज्यूडिज्म जैसी अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स पार्टियों ने भी सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया है। इन पार्टियों का कहना है कि नेतन्याहू अपने वादे के मुताबिक उनके धार्मिक युवाओं को अनिवार्य सैन्य सेवा से छूट दिलाने वाला कानून पास नहीं करा पाए।
जनता में भारी आक्रोश
राजनीतिक संकट के बीच बेंजामिन नेतन्याहू पर साल 2020 से ही धोखाधड़ी, रिश्वतखोरी और पद के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोपों में भ्रष्टाचार का मुकदमा चल रहा है। हालांकि, वह खुद को राजनीतिक साजिश का शिकार बताते आए हैं। इसके साथ ही, 2023 में हुए हमास के हमले को लेकर देश की जनता उन्हें सुरक्षा में बड़ी चूक का जिम्मेदार मानती है। हालिया ओपिनियन पोल्स और सर्वे में भी 55 प्रतिशत से अधिक इजरायली नागरिकों ने इच्छा जताई है कि नेतन्याहू को अब प्रधानमंत्री पद की रेस से बाहर हो जाना चाहिए।












