समुद्र में ड्यूटी के दौरान लापता जवानों के परिजनों को जल्द मिलेंगे सभी लाभ
नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) में महिलाओं को पुरुष अधिकारियों के बराबर अवसर देने और ड्यूटी के दौरान समुद्र में लापता होने वाले जवानों के परिवारों को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए मंगलवार को दो महत्वपूर्ण नीतियों को मंजूरी दे दी। सरकार ने इसे नारी सशक्तीकरण और जवानों के परिवारों के हित में बड़ा कदम बताया है।
नई नीति के तहत तटरक्षक बल में अधिकारियों की भर्ती और सेवा व्यवस्था पूरी तरह लैंगिक तटस्थ होगी। अब महिला अधिकारियों को पुरुषों की तरह शॉर्ट सर्विस और स्थायी नियुक्ति, दोनों में समान अवसर मिलेंगे। पहले से शॉर्ट सर्विस पर कार्यरत महिला अधिकारी पात्रता पूरी करने पर स्थायी नियुक्ति पा सकेंगी, जबकि स्थायी सेवा में मौजूद महिला अधिकारियों को उच्च पदों पर पदोन्नति के लिए भी समान आधार पर विचार किया जाएगा। पुरुष अभ्यर्थियों के लिए भी शॉर्ट सर्विस कमीशन का दायरा बढ़ाया गया है।
दूसरी नीति ड्यूटी के दौरान समुद्र में लापता होने वाले तटरक्षक कर्मियों के परिवारों को राहत देने के उद्देश्य से बनाई गई है। इसके तहत ऐसे मामलों में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कर्मी को मृत मानने का अधिकार तय किया गया है, जिससे अनुग्रह राशि और अन्य सेवा लाभ देने में अनावश्यक देरी नहीं होगी। इससे परिजनों को कठिन समय में जल्द आर्थिक सहायता मिल सकेगी।
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय तटरक्षक बल ने पिछले पांच दशकों में समुद्री सुरक्षा, खोज एवं बचाव अभियान तथा तटीय निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने विश्वास जताया कि नई नीतियों से बल का मनोबल बढ़ेगा और उसकी परिचालन क्षमता भी मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 में स्वर्ण जयंती की ओर बढ़ रहे तटरक्षक बल को आधुनिक, सक्षम और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है।
नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में आयोजित कार्यक्रम में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, तटरक्षक बल के महानिदेशक परमेश शिवमणि और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सरकार का मानना है कि इन दोनों फैसलों से एक ओर महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर ड्यूटी के दौरान जान जोखिम में डालने वाले जवानों के परिवारों को समय पर राहत और सम्मान मिल सकेगा।












