सिद्धार्थनगर में व्यक्तिगत शौचालय निर्माण योजना के तहत 3510 पात्र लाभार्थियों का चयन अंतिम चरण में है। स्वच्छता को बढ़ावा देने और खुले में शौच की प्रवृत्ति को समाप्त करने के उद्देश्य से संचालित इस योजना में चालू सत्र के दौरान प्राप्त लगभग 10 हजार आवेदनों का गहन सत्यापन किया गया था। सत्यापन के बाद, 3510 आवेदकों को पात्र पाया गया है, जिन्हें जल्द ही योजना का लाभ मिलेगा। वहीं, 6490 आवेदन विभिन्न कारणों से अपात्र घोषित किए गए हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जिले को 25 हजार व्यक्तिगत शौचालय निर्माण का लक्ष्य मिला है। इस लक्ष्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर सर्वेक्षण और सत्यापन की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि केवल वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को ही योजना से जोड़ा जाए। अपात्र घोषित किए गए आवेदनों के प्रमुख कारणों में पहले से शौचालय की उपलब्धता, अपूर्ण या भ्रामक जानकारी देना, पात्रता मानकों को पूरा न करना और कुछ मामलों में डुप्लीकेट आवेदन शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि आगे आने वाले आवेदनों की भी इसी तरह सख्ती से जांच की जाएगी और किसी भी प्रकार की अनियमितता मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। जिला सलाहकार अमित श्रीवास्तव ने बताया कि व्यक्तिगत शौचालय निर्माण स्वच्छ और स्वस्थ समाज की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और स्वास्थ्य को मजबूती मिलती है, साथ ही बच्चों और बुजुर्गों के जीवन स्तर में भी सुधार आता है। डीपीआरओ वाचस्पति झा ने जानकारी दी कि चयनित 3510 लाभार्थियों के बैंक खातों का सत्यापन कर शीघ्र ही अनुदान राशि हस्तांतरित की जाएगी, ताकि वे अपने घरों में शौचालय निर्माण कार्य शुरू कर सकें। उन्होंने कहा कि निर्धारित समय सीमा के भीतर अधिकतम पात्र परिवारों को योजना से आच्छादित कर जिले को स्वच्छता के मामले में आदर्श बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
ब्लॉकवार पात्र लाभार्थियों की संख्या इस प्रकार है: बांसी- 154, बढ़नी- 526, भनवापुर- 367, बर्डपुर- 154, डुमरियागंज- 222, इटवा- 263, जोगिया- 71, खेसरहा- 570, खुनियांव- 33, लोटन- 185, मिठवल- 236, नौगढ़- 309, शोहरतगढ़- 300 और उसका बाजार- 120।
प्रशासन ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि सभी चयनित लाभार्थियों के बैंक खातों का सत्यापन कर धनराशि हस्तांतरण की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए, ताकि योजना का लाभ समय पर पात्र परिवारों तक पहुंच सके।












