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गांबिया में 66 लोगों की मौत हुई, फिर भी क्लीन चिट, नाम बदलकर आ रही मेडेन फार्मा

साल 2022 में मेडेन फार्मास्यूटिकल्स की खांसी की दवाओं से गाम्बिया में कथित तौर पर कम से कम 66 बच्चों की मौत हो गई थी। ये दवाएं डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) और एथिलीन ग्लाइकॉल (EG) जैसे जहरीले सॉल्वेंट से दूषित पाई गईं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इन दवाओं के खिलाफ अलर्ट जारी किया था। घाना, फ्रांस और स्विट्जरलैंड जैसे विदेशी लैब में इन दवाओं के जहरीले होने की पुष्टि हुई लेकिन देश के चंडीगढ़ लैब ने इन्हें सुरक्षित बता दिया। तब WHO ने कहा था कि इन दवाओं की जांच के बाद इनमें डाइथिलीन ग्लाइकोल और एथिलीन ग्लाइकोल की अनुचित मात्रा पाई गई है।

द न्यूज मिनट की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चंडीगढ़ लैब से आए नतीजों के आधार पर केंद्र सरकार ने कंपनी को क्लीन चिट दे दी थी। गाम्बिया की संसदीय जांच समिति और डॉक्टरों ने कहा था कि बच्चों की मौत इन दूषित दवाओं से हुई थी। 19 परिवारों ने गाम्बिया हाई कोर्ट में कंपनी, स्थानीय डिस्ट्रीब्यूटर और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ मुकदमा दायर किया। परिवार मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

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कोर्ट के समन का जवाब नहीं दे रही है

कंपनी ने कोर्ट समन का जवाब नहीं दिया है। द न्यूज मिनट का दावा है कि मेडेन फार्मास्यूटिकल्स ने साल 2025 में चुपचाप अपना नाम बदलकर ‘क्योरक्लिप फार्मास्यूटिकल्स’ कर लिया। दिल्ली के नेताजी सुभाष प्लेस में कंपनी का रजिस्टर्ड ऑफिस अब भी वहीं है, लेकिन बाहर कोई बोर्ड नहीं है। वहां अब किकास कॉस्मेटिक्स का साइनबोर्ड लगा है। स्टाफ कंपनी के बारे में कुछ नहीं बताते हैं।

कंपनी के डायरेक्टर नरेश कुमार गोयल और उनके परिवार के सदस्य कई दूसरी दवा कंपनियों से जुड़े हैं। इनमें इंटैक्ट ड्रग्स, रियल ड्रग्स और वीएमके फार्माटेक जैसी कंपनियां शामिल हैं। ऑफिस में नरेश गोयल की चर्चित नेताओं के साथ कुछ तस्वीरें लगी हैं। द न्यूज मिनट का दावा है कि हरियाणा के सोनीपत में कंपनी की फैक्ट्री का बोर्ड अब ‘क्योरक्लिप’ हो गया है। हरियाणा FDA कमिश्नर ने बताया कि मेडेन का लाइसेंस रद्द हो चुका है और क्योरक्लिप नाम से कोई नई कंपनी राज्य में रजिस्टर्ड नहीं है।

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किन आरोपों में घिरी है मेडेन?

पहले भी मेडेन पर कई बार आरोप लगे थे। वियतनाम ने साल 2013 में कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया था। बिहार, केरल और गुजरात में भी उनकी दवाएं खराब पाई गई थीं। हरियाणा सरकार को सप्लाई की गई कुछ दवाएं भी टेस्ट में फेल साबित हुई थी। साल 2023 में एक वकील यशपाल ने आरोप लगाया था कि कंपनी ने सैंपल बदलने के लिए हरियाणा के ड्रग कंट्रोलर को 5 करोड़ रुपये की रिश्वत दी थी। इसकी जांच शुरू हुई थी, लेकिन अब इसका स्टेटस पता नहीं चल रहा।

कितना कमती है यह कंपनी?

द न्यूज मिनट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ‘कंपनी के लेन-देन से यह सामने आया है कि साल 2022-23 में टर्नओवर घटा और उसके बाद लगातार नुकसान हो रहा है। फिर भी कंपनी GST रिटर्न नियमित भरती रही है। गाम्बिया के वकीलों को कंपनी ढूंढने में बहुत दिक्कत हुई थी। एक डायरेक्टर ने दावा किया कि कंपनी को बलि का बकरा बनाया गया। गाम्बिया के परिवारों के बच्चे, अब भी न्याय की उम्मीद में हैं। चार साल बाद भी कोई सख्त सजा या पूरा जवाबदेही तय नहीं हुई है।

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