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रानीपुर में 7वीं मोहर्रम का जुलूस निकला:कर्बला की याद में निकला ऐतिहासिक जुलूस, दिया एकता का संदेश


रानीपुर थाना क्षेत्र में 7वीं मोहर्रम का जुलूस पारंपरिक श्रद्धा और उत्साह के साथ निकाला गया। कर्बला की याद में निकले इस जुलूस ने धार्मिक आस्था के साथ-साथ समाज में एकता, भाईचारे और सद्भाव का संदेश दिया। जुलूस के दौरान विभिन्न स्थानों पर अकीदतमंदों का स्वागत किया गया और शरबत व ठंडे पानी की सबीलें लगाकर सेवा भाव का परिचय दिया गया। वक्ताओं ने इस अवसर पर कहा कि कर्बला की जंग सत्ता के लिए नहीं, बल्कि इंसानियत को बचाने के लिए लड़ी गई थी। हजरत इमाम हुसैन ने अपने 72 साथियों और परिवार के सदस्यों के साथ भूखे-प्यासे रहकर भी जुल्म और अत्याचार के सामने घुटने नहीं टेके। उन्होंने यह संदेश दिया कि सच्चाई की राह में कितनी भी मुश्किलें आएं, एक सच्चे इंसान को कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहिए। आज भी जब दुनिया अन्याय, हिंसा और नफरत जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, तब कर्बला का पैगाम अधिक प्रासंगिक दिखाई देता है। हजरत इमाम हुसैन की शहादत प्रेम, भाईचारा, न्याय और मानवता को समाज की वास्तविक ताकत के रूप में स्थापित करती है। यही कारण है कि मोहर्रम पर सभी धर्मों और समुदायों के लोग शहीद-ए-कर्बला को श्रद्धापूर्वक याद करते हैं। इस जुलूस की एक विशेष बात यह रही कि इसमें बड़ी संख्या में हिंदू समाज के लोगों ने भी भाग लिया। उन्होंने हुसैनियत के संदेश को आत्मसात करते हुए कौमी एकता की शानदार मिसाल पेश की। लोगों ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन किसी एक धर्म या समुदाय के नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत के रहबर हैं, जिनकी कुर्बानी सदियों तक मानवता को राह दिखाती रहेगी। कार्यक्रम के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता एवं पत्रकार आसिफ सिद्दीकी सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिकों ने लोगों से आपसी भाईचारा बनाए रखने, समाज में प्रेम और सौहार्द को बढ़ावा देने तथा कर्बला के संदेश को अपने जीवन में अपनाने की अपील की। उपस्थित लोगों ने एक स्वर में कहा कि हुसैनियत का पैगाम अमन, मोहब्बत और इंसाफ का पैगाम है, जिसे घर-घर तक पहुंचाने की आवश्यकता है।

जुलूस के सफल और शांतिपूर्ण आयोजन के बाद क्षेत्रीय नागरिकों ने रानीपुर पुलिस की कार्यशैली की खुलकर प्रशंसा की। लोगों ने कहा कि प्रभारी निरीक्षक श्री हरेंद्र कुमार मिश्र एवं उनकी टीम की सतर्कता, सूझबूझ और निरंतर निगरानी के कारण पूरा कार्यक्रम सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। ग्रामीणों और अकीदतमंदों ने पुलिस प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनता और पुलिस के आपसी सहयोग का यह उत्कृष्ट उदाहरण लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

7वीं मोहर्रम का यह भव्य और ऐतिहासिक आयोजन आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देता रहेगा कि हजरत इमाम हुसैन की शहादत केवल एक घटना नहीं बल्कि सत्य, न्याय, बलिदान, मानवता और इंसानियत की ऐसी अमर मिसाल है, जो कयामत तक दुनिया को राह दिखाती रहेगी। “या हुसैन” की सदाएं सदियों से गूंजती रही हैं और आगे भी इंसानियत को जगाने का काम करती रहेंगी।

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