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सिद्धार्थनगर में नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी का आरोप:कंसल्टेंसी पर दुबई भेजने के नाम पर लिया पैसा, एसपी कार्यालय पहुंची पीड़िता


सिद्धार्थनगर के तेतरी बाजार स्थित ‘खान इंटरनेशनल मैनपावर कंसल्टेंसी’ धोखाधड़ी के आरोपों का सामना कर रही है। करीब आधा दर्जन युवाओं ने कंसल्टेंसी पर विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी और वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक (SP) से शिकायत की है। पीड़ितों का कहना है कि उन्हें कम वेतन पर नौकरी का प्रस्ताव दिया गया, जबकि कंसल्टेंसी प्रबंधन इसे तकनीकी नियमों की गलतफहमी बता रहा है। बर्डपुर निवासी अकलुबुन्निशा ने आरोप लगाया है कि कंसल्टेंसी ने उनके बेटे इमरान और उसके तीन साथियों को दुबई की एक फर्नीचर कंपनी में काम दिलाने का वादा किया था। उन्हें 1300 AED (लगभग 29,000 रुपये) मासिक वेतन का भरोसा दिया गया था। इस प्रक्रिया के लिए प्रति व्यक्ति 90,000 रुपये का खर्च तय हुआ था, जिसमें से पीड़ितों ने 20-20 हजार रुपये अग्रिम राशि के तौर पर जमा किए थे। हालांकि, 15 अप्रैल को जब वीजा मिला, तो उस पर मासिक वेतन 800 से 1100 AED ही अंकित था। वेतन में यह अंतर देखकर युवाओं ने विदेश जाने से इनकार कर दिया। पीड़ितों का आरोप है कि इसके बाद न तो उन्हें जमा की गई राशि वापस की जा रही है और न ही उनके पासपोर्ट लौटाए जा रहे हैं। इस मामले पर कंसल्टेंसी के असिस्टेंट मैनेजर शाहिद एच. खान ने अपनी सफाई दी। उन्होंने बताया कि दुबई मंत्रालय के नियमों के अनुसार, समझौते में केवल 8 घंटे की मूल सैलरी ही दर्शाई जा सकती है। यदि कोई कर्मचारी 10 घंटे काम करता है, तो ओवरटाइम (OT) जोड़ने के बाद उसकी कुल आय 1300 AED से अधिक हो जाती है। शाहिद एच. खान ने आगे कहा कि पैसा दुबई भेजा जा चुका है। अब यदि वीजा रद्द कराया जाता है, तो प्रति व्यक्ति 35,000 रुपये का खर्च आएगा। चूंकि युवाओं ने केवल 20,000 रुपये जमा किए हैं, इसलिए कंपनी को ही नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने पासपोर्ट वापसी के लिए दूतावास की प्रक्रिया और उम्मीदवारों के हस्ताक्षर को अनिवार्य बताया। हालांकि, किसी भी निजी एजेंसी द्वारा किसी व्यक्ति का पासपोर्ट रोकना ‘पासपोर्ट एक्ट 1967’ का सीधा उल्लंघन माना जाता है। फिलहाल, पीड़ितों ने इस मामले में मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) पर भी अपनी शिकायत दर्ज कराई है।

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