लखनऊ। राजधानी में ‘अग्नि सुरक्षा सप्ताह’ के मौके पर उत्तर प्रदेश अग्निशमन तथा आपात सेवा द्वारा व्यापक स्तर पर जागरूकता और प्रशिक्षण अभियान चलाया गया। यह अभियान मुख्य अग्निशमन अधिकारी के निर्देशन में पूरे जिले के अलग-अलग इलाकों में आयोजित किया गया, जिसमें अस्पताल, स्कूल, मॉल, होटल और अन्य बड़े संस्थानों को शामिल किया गया।
इस अभियान के तहत मेदांता अस्पताल में विशेष मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इस दौरान अग्निशमन विभाग और अस्पताल की सुरक्षा टीम ने मिलकर आग लगने की स्थिति में बचाव कार्य का अभ्यास किया। हाईड्रोलिक प्लेटफॉर्म और आधुनिक उपकरणों की मदद से ऊंची इमारतों में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का प्रदर्शन किया गया। साथ ही डॉक्टरों, नर्सों और कर्मचारियों को आग लगने की स्थिति में क्या करना चाहिए, इसकी जानकारी दी गई।
इसी तरह गोमतीनगर रेलवे स्टेशन, फीनिक्स यूनाइटेड मॉल, अपोलो मेडिक्स अस्पताल और पिकैडली होटल समेत कई प्रमुख स्थानों पर भी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में वहां काम करने वाले कर्मचारियों, सुरक्षा कर्मियों और आम लोगों को आग लगने के कारण, उससे बचाव और आपात स्थिति में सुरक्षित तरीके से बाहर निकलने के बारे में बताया गया।
स्कूलों में भी जागरूकता अभियान चलाया गया, जहां छात्रों और शिक्षकों को आग से बचाव के तरीके सिखाए गए। इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्रों और फैक्ट्रियों में भी कर्मचारियों को अग्नि सुरक्षा उपकरणों के उपयोग का प्रशिक्षण दिया गया।
अग्निशमन विभाग की टीम ने फायर एक्सटिंग्विशर चलाने का सही तरीका भी सिखाया, जिसे PASS तकनीक कहा जाता है। इसमें पिन खींचना, आग के निचले हिस्से पर निशाना लगाना, लीवर दबाना और दाएं-बाएं घुमाकर आग बुझाना शामिल है।
अधिकारियों ने बताया कि किसी भी बहुमंजिला इमारत में केवल उपकरण होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि वहां काम करने वाले लोगों को उनका सही उपयोग आना भी जरूरी है। इसलिए इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित किए जाते हैं ताकि आपात स्थिति में लोग घबराएं नहीं और सही तरीके से प्रतिक्रिया दे सकें।
अभियान के दौरान लोगों को यह भी बताया गया कि भवनों में स्मोक डिटेक्टर लगाना, फायर एग्जिट को खाली रखना और बिजली के उपकरणों का सुरक्षित उपयोग करना बहुत जरूरी है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी पंपलेट बांटकर लोगों को आग से बचाव के प्रति जागरूक किया गया।












