ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई अभी तक लोगों के सामने नहीं आए हैं। उनके पिता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में शहीद हुए थे। मौत के छह हफ्ते से ज्यादा समय बात भी मोजतबा खामेनेई को न तो देखा गया है, न ही उनकी आवाज सुनी गई है।
ईरान अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहा है। अब ईरानी शासन के लिए अस्तित्व का सवाल पैदा हो गया है। इस मुश्किल वक्त में नए नेता मोजतबा खामेनेई पूरी तरह गायब हैं। उनकी तरफ से जो बयान आ रहे हैं वे या तो टीवी पर पढ़कर सुनाए जा रहे हैं या सोशल मीडिया पर पोस्ट किए जा रहे हैं। कुछ वीडियो तो AI से बनाए गए लगते हैं। इससे कई लोग अटकलें लगा रहे हैं कि मोजतबा खामेनेई घायल हैं, बाहर गए हैं या फिर वे फैसले लेने की स्थिति में नहीं हैं।
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गायब रहना मोजतबा खामेनेई की रणनीति है?
मोजतबा खामेनेई के पिता अली खामेनेई हमेशा सार्वजनिक जीवन में सक्रिय नजर आते थे। खुफिया एजेंसियों के अलर्ट करने के बाद भी वह सार्वजनिक बैठक करते थे। उनकी मौत भी एक बैठक के दौरान ही हुई। वह हर हफ्ते वे भाषण देते, फैसले बताते और देश की नीतियों पर बात करते थे। लेकिन मोजतबा खामेनेई बिल्कुल अलग हैं।
मोजतबा खामेनेई को हुआ क्या है?
CNN की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि अमेरिका-इजरायल के हमलों में मोजतबा खामेनेई के पैर में फ्रैक्चर हो गया था, आंख में चोट लगी थी और चेहरे पर भी छोटी-छोटी चोटें आई थीं। दूसरी रिपोर्ट में कहा गया है कि वे मीटिंग्स में सिर्फ आवाज के जरिए हिस्सा ले रहे हैं और बड़े फैसलों में शामिल हैं।
अब सवाल यह है कि असल में फैसले कौन ले रहा है? क्या मोजतबा खामेनेई वाकई नियंत्रण करने की स्थिति में हैं या फिर उनका पद खाली सा हो गया है?
सिर्फ मोजतबा खामेनेई के नाम का हो रहा है इस्तेमाल
विशेषज्ञों का कहना है कि मोजतबा खामेनेई खुद बड़े फैसले नहीं ले पा रहे हैं। सिस्टम सिर्फ उनकी मंजूरी का नाम इस्तेमाल करके बातचीत आगे बढ़ा रहा है। इससे अंदरूनी आलोचना से अधिकारी और शीर्ष नेतृ्त्व बच रहा है।
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ईरान में अमेरिका से बात को सरेंडर बता रहे लोग
ईरान अमेरिका के साथ बातचीत कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अब ईरान के साथ बहुत समझदार लोग काम कर रहे हैं। बातचीत पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हो रही है, जहां ईरान की तरफ से संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची नेतृत्व कर रहे हैं।
ईरान के राष्ट्रवादी, अमेरिका से बात को भी आत्मसमर्पण मान रहे हैं। वे चाहते हैं कि ईरान और हमले करता रहे। ऐसे में बातचीत करने वाले नेता दोनों तरफ का दबाव झेल रहे हैं।
कुछ दिन पहले जब विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज व्यापार के लिए खुला है तो उनके अपने समर्थकों ने ही उन पर हमला बोल दिया। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की भी आलोचना हुई जब उन्होंने पड़ोसी अरब देशों से माफी मांगी।
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कैसे मुश्किल हालात में एकजुट है ईरान?
अभी ईरान की स्थिति बहुत नाजुक है। युद्ध अभी खत्म नहीं हुआ है। नए नेता की गैरमौजूदगी में कुछ वरिष्ठ नेता ही देश चला रहे हैं। मोजतबा खामेनेई के गायब रहने की वजह से ये नेता आसानी से अपनी बात को सर्वोच्च नेता की मंजूरी बता कर लोगों को समझा रहे हैं। ईरान अभी भी अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। सिस्टम में फूट न पड़े, इसके लिए नेता एकजुटता दिखा रहे हैं, लेकिन अंदरूनी सवाल और भ्रम बढ़ता जा रहा है।












