लखनऊ। लखनऊ के रिजर्व पुलिस लाइन स्थित संगोष्ठी सदन में सोमवार को बाल संरक्षण एवं वन स्टॉप सेंटर सेवाओं पर एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को बाल एवं महिला पीड़ितों की सहायता प्रणाली के प्रति अधिक प्रशिक्षित और संवेदनशील बनाना था।
कार्यक्रम का आयोजन संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं मुख्यालय) श्रीमती अपर्णा कुमार, संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) श्री बबलू कुमार तथा पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय) श्री अमित कुमावत के मार्गदर्शन में किया गया। इसका संचालन सहायक पुलिस आयुक्त (महिला अपराध/ट्रेनिंग सेल) सुश्री सौम्या पाण्डेय के पर्यवेक्षण में हुआ।
इस प्रशिक्षण में कमिश्नरेट लखनऊ के विभिन्न थानों से 39 पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए। विशेषज्ञ प्रशिक्षक श्री सूर्यकांत चौरसिया द्वारा किशोर न्याय अधिनियम (JJ Act), बाल कल्याण पुलिस अधिकारी (CWPO) की भूमिका, चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) की कार्यप्रणाली और सोशल बैकग्राउंड रिपोर्ट की प्रक्रिया पर विस्तृत जानकारी दी गई।
इसके साथ ही प्रतिभागियों को बताया गया कि वन स्टॉप सेंटर के माध्यम से पीड़ित महिलाओं और बालिकाओं को चिकित्सा, कानूनी सहायता, मनोवैज्ञानिक परामर्श और अस्थायी आश्रय जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि संवेदनशील मामलों में पुलिसकर्मियों को सहानुभूतिपूर्ण और जिम्मेदार व्यवहार अपनाना चाहिए, ताकि पीड़ितों को बेहतर सहायता मिल सके।
कार्यशाला के दौरान केस स्टडी और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से भी प्रशिक्षण दिया गया। पुलिस कमिश्नरेट ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम भविष्य में भी लगातार आयोजित किए जाएंगे, जिससे पुलिसिंग को और अधिक प्रभावी और जनोन्मुख बनाया जा सके।












